कक्षा ६ विज्ञान अध्याय 11 पाठ्य प्रश्न के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन2026-09-08
प्र1.
क्या आपने कभी सोचा है कि मृदा कैसे बनती है?
उत्तर
मृदा का निर्माण लंबे समय में (कई हजारों वर्षों में) सूर्य, जल और सजीवों द्वारा चट्टानों के विघटन (टूटने-बिखरने) से होता है।
मृदा कैसे बनती है: सूर्य, जल और सजीव चट्टान को तोड़ते हैं, और टूटे कण सड़ी हुई वनस्पति तथा जंतु-अवशेषों से मिलकर मृदा बनाते हैं।
चट्टान को तोड़ने वाले कारक:
सूर्य— चट्टान दिन में गर्म होकर फैलती है और रात में ठंडी होकर सिकुड़ती है; बार-बार ऐसा होने से उसमें दरारें पड़ जाती हैं।
जल— वर्षा का जल दरारों में भर जाता है; बहती नदी का जल चट्टानों के टुकड़ों को आपस में रगड़कर गोल कंकड़ और रेत बना देता है।
सजीव— जड़ें दरारों में घुसकर उन्हें चौड़ा करती हैं; शैवाल-लाइकेन चट्टान की सतह को धीरे-धीरे क्षय करते हैं; केंचुए और कीट सब कुछ मिलाते-पलटते रहते हैं।
मृदा को अनवीकरणीय क्यों माना जाता है: कुछ सेंटीमीटर मृदा बनने में सैकड़ों से हजारों वर्ष लगते हैं, किंतु नंगी पहाड़ी से एक तेज वर्षा उसे एक ही दोपहर में बहा ले जा सकती है। इसीलिए जड़ों से मृदा को थामने वाले वन इतने महत्वपूर्ण हैं।
प्रकृति में पुनर्चक्रण (कहानी से): पेड़ों से गिरने वाली पत्तियाँ सड़ जाती हैं और मृदा को पोषक तत्वों से समृद्ध करती हैं, और उसी मृदा से नए पौधे उगते हैं— यही अज्जी ने वन की सैर के समय बताया था।
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