कक्षा ७ सामाजिक विज्ञान अध्याय 11 आइए पता लगाएँ के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-08

प्र1.
कल्पना कीजिए कि आप एक किसान हैं और जहाँ आप रहते हैं, वहाँ लोग वस्तु विनिमय प्रणाली का प्रयोग करते हैं। आपको यहाँ अनेक प्रकार की वस्तुओं की आवश्यकता है, जैसे – एक जोड़ी नए जूते, एक स्वेटर और अपनी दादी के लिए दवाइयाँ। परंतु आपके पास देने के लिए केवल एक बैल है। इस बैल का विनिमय करके आप कैसे विभिन्न प्रकार की आवश्यक वस्तुओं को विभिन्न लोगों एवं स्थानों से प्राप्त करेंगे?
उत्तर

मुझे एक बड़े विनिमय को छोटे-छोटे विनिमयों की श्रृंखला में बाँटना पड़ेगा, क्योंकि किसी एक व्यक्ति के पास जूते, स्वेटर और दवाइयाँ — तीनों एक साथ होने और उसे बैल की आवश्यकता होने की संभावना बहुत कम है।

चरण 1 — ऐसा व्यक्ति ढूँढ़ना जिसे वास्तव में बैल चाहिए।
चरण 2 — एक जोड़ी जूते बैल के मूल्य के बराबर नहीं, इसलिए बैल के बदले कई बोरे गेहूँ लेना।
चरण 3 — गेहूँ मोची तक ले जाना; तय करना कि कितने बोरे एक जोड़ी जूतों के बराबर हैं।
चरण 4 — शेष गेहूँ लेकर दूसरे व्यक्ति के पास स्वेटर के लिए जाना।
चरण 5 — बचे हुए गेहूँ से तीसरे व्यक्ति से दवाइयाँ लेना।
चरण 6 — बचे हुए बोरे घर लाकर सुरक्षित भंडारण करना।

अर्थात् बैल को पहले एक विभाज्य वस्तु — गेहूँ — में बदला जाता है, तभी उसे टुकड़ों में व्यय किया जा सकता है।

संकेत: ध्यान दीजिए कि यहाँ गेहूँ मुद्रा का काम कर रहा है। वह एक कच्चा विनिमय माध्यम बन गया है। वास्तविक मुद्रा का आरंभ ठीक इसी प्रकार हुआ था।
प्र2.
इसमें आपको किस प्रकार की चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है?
उत्तर

इस श्रृंखला के हर चरण में एक चुनौती छिपी है।

चुनौतीकिसान की कहानी में यह कैसी दिखती है
उपयुक्त व्यक्ति ढूँढ़नापहले ऐसा व्यक्ति चाहिए जिसे बैल की आवश्यकता ही हो
असमान मूल्यबैल के बदले केवल एक जोड़ी जूते उचित विनिमय नहीं
लंबी श्रृंखलाबैल → गेहूँ → जूते, स्वेटर, दवाइयाँ : तीन अलग व्यक्तियों से तीन सौदे
हर बार मोल-भावहर जगह नई बातचीत कि कितना गेहूँ उस वस्तु के बराबर है
ढुलाईगेहूँ के बोरे कई स्थानों पर ले जाने पड़ेंगे
भंडारणबचा हुआ गेहूँ सुरक्षित रखना पड़ेगा — वह सड़ भी सकता है और चूहे भी खा सकते हैं
बार-बार ढोनाअगली बार कुछ चाहिए तो फिर वही बोरे उठाने पड़ेंगे

अगले पृष्ठ की भाषा में ये ही आवश्यकताओं का द्विसंयोग, मूल्य के सामान्य मानक माप का अभाव, विभाज्यता, सुवाह्यता और टिकाऊपन की समस्याएँ हैं।

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