कक्षा ७ विज्ञान अध्याय 5 पाठ्य प्रश्न के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-08

प्र1.
हम अवलोकन करते हैं कि जिस मोमबत्ती को ढका नहीं गया [चित्र 5.6 (क)], वह जलती रहती है जबकि जिस मोमबत्ती को काँच के गिलास से ढका गया [चित्र 5.6 (ख)] वह कुछ समय बाद जलना बंद कर देती है। ऐसा क्यों होता है?
उत्तर

क्योंकि ढकी हुई मोमबत्ती को वायु की निरंतर आपूर्ति नहीं मिलती। गिलास के भीतर की ऑक्सीजन शीघ्र ही समाप्त हो जाती है और ऑक्सीजन के बिना लौ बुझ जाती है।

मोम + ऑक्सीजन (वायु से) → कार्बन डाइऑक्साइड + जलवाष्प + ऊष्मा + प्रकाश
गिलास के भीतर: ऑक्सीजन समाप्त → अभिक्रिया रुकी → लौ बुझ गई
ऐसा क्यों होता है: वायु का जो घटक दहन में सहायक होता है वह ऑक्सीजन है। ढकी मोमबत्ती जलते-जलते मोम के कार्बन को कार्बन डाइऑक्साइड में बदल देती है, जो गिलास के भीतर एकत्र होती जाती है। कार्बन डाइऑक्साइड दहन में सहायक नहीं है, अतः जैसे-जैसे ऑक्सीजन का स्थान वह लेती जाती है, लौ मंद पड़कर बुझ जाती है।
प्र2.
मोमबत्ती पर पलट कर रखे गए काँच के गिलास के अंदर कार्बन डाइऑक्साइड की उपस्थिति से इसकी पुष्टि की जा सकती है। आप कार्बन डाइऑक्साइड गैस की उपस्थिति का परीक्षण कैसे कर सकते हैं?
उत्तर

चूने के पानी के परीक्षण द्वारा। पेट्री डिश में थोड़ी मात्रा में ताजा चूने का पानी डालिए (अथवा मोमबत्ती बुझते ही गिलास में डालकर हिलाइए)। चूने का पानी दूधिया हो जाता है, जिससे कार्बन डाइऑक्साइड की उपस्थिति की पुष्टि होती है।

कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड + कार्बन डाइऑक्साइड → कैल्सियम कार्बोनेट + जल
   (चूने का पानी, स्वच्छ)         (श्वेत, अघुलनशील → दूधिया)
ऐसा क्यों होता है: गिलास के भीतर की कार्बन डाइऑक्साइड मोम से प्राप्त कार्बन और वायु में उपस्थित ऑक्सीजन की अभिक्रिया से बनी थी। कैल्सियम कार्बोनेट जल में नहीं घुलता, अतः उसके सूक्ष्म श्वेत कण द्रव में लटके रहते हैं और चूने का पानी दूधिया दिखाई देता है — यही इसे इतना उपयोगी परीक्षण बनाता है, क्योंकि इसका परिणाम आँखों से दिखता है।
प्र3.
यदि किसी व्यक्ति के वस्त्रों में आग लग जाए तो आग बुझाने का सबसे अच्छा उपाय क्या है?
उत्तर

व्यक्ति के चारों ओर एक कंबल या कोई मोटा वस्त्र कसकर लपेट दीजिए। इससे वायु की आपूर्ति बंद हो जाती है और आग बुझ जाती है।

  • व्यक्ति को रुकने, गिरने और भूमि पर लोटने को कहिए — लोटने से भी लौ दब जाती है।
  • यदि जल पास हो तो उसे भी डाला जा सकता है।
  • सहायता के लिए पुकारिए और जलन छोटी दिखे तब भी चिकित्सक को दिखाइए।
ऐसा क्यों होता है: आग को तीन चीजें चाहिए — ईंधन, ऑक्सीजन और ऊष्मा। यहाँ वस्त्र ही ईंधन है जिसे तुरंत हटाया नहीं जा सकता, अतः सबसे शीघ्र जो हटाया जा सकता है वह है ऑक्सीजन। कंबल जलते वस्त्र और वायु के बीच एक आवरण बना देता है और लौ उसी कारण बुझ जाती है जिस कारण ढकी हुई मोमबत्ती बुझी थी।
सावधानी: आग बुझाने के लिए संश्लेषित रेशों से बने कंबल अथवा वस्त्र का उपयोग कदापि नहीं करना चाहिए — ये पिघलकर त्वचा से चिपक सकते हैं और चोट कहीं अधिक गंभीर हो जाती है। सूती, ऊनी अथवा जूट का प्रयोग कीजिए। व्यक्ति को दौड़ने भी मत दीजिए — दौड़ने से ताजी वायु मिलकर लौ और भड़कती है।
प्र4.
हम यह भी जानते हैं कि कागज एक दहनशील पदार्थ है परंतु इसे वायु में कितनी भी देर रखा जाए पर फिर भी इसका दहन नहीं होता है। दहन प्रारंभ करने के लिए और क्या आवश्यक है?
उत्तर

ऊष्मा — इतनी ऊष्मा कि पदार्थ अपने प्रज्वलन तापमान तक पहुँच जाए, अर्थात वह न्यूनतम तापमान जिस पर वह आग पकड़ता है।

अतः दहन के लिए तीन बातें एक साथ आवश्यक हैं, जिन्हें अग्नि त्रिकोण कहते हैं —

🔥 ऑक्सीजन ऊष्मा ईंधन (दहनशील पदार्थ) कोई एक भुजा हटाइए, आग बुझ जाएगी
अग्नि त्रिकोण (चित्र 5.8) — आग के लिए ईंधन, ऑक्सीजन और ऊष्मा तीनों एक साथ चाहिए।
  1. एक दहनशील पदार्थ, जिसे ईंधन भी कहा जाता है — कागज, लकड़ी, कपास, मिट्टी का तेल।
  2. ऑक्सीजन — जो वायु से प्राप्त होती है।
  3. ऊष्मा, जो ईंधन को उसके प्रज्वलन तापमान तक पहुँचाती है।
ऐसा क्यों होता है: मेज पर रखे कागज के पास तीन में से दो बातें पहले से हैं — वह स्वयं ईंधन है और वायु चारों ओर है। कमी तीसरी की है। कमरे का तापमान कागज के प्रज्वलन तापमान से बहुत कम होता है, इसलिए वह स्वयं कभी आग नहीं पकड़ता। जलती माचिस की तीली अथवा लेंस से केंद्रित सूर्य की किरणें वही ऊष्मा प्रदान करती हैं।
संकेत: आग बुझाने का हर उपाय इसी त्रिकोण की कोई एक भुजा हटाता है — कंबल या रेत ऑक्सीजन हटाते हैं, जल ऊष्मा हटाता है, और गैस सिलिंडर का रेगुलेटर बंद करना ईंधन हटाता है।
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