नहीं — सूरजमुखी के तने की अनुप्रस्थ काट (चित्र 3.7) में कोशिकाएँ स्पष्टतः एक जैसी नहीं हैं, और बाहर से भीतर की ओर एक निश्चित क्रम में अनेक भिन्न ऊतक पहचाने जा सकते हैं।
| बाहर से भीतर | कोशिकाएँ कैसी दिखती हैं | प्रकार्य |
|---|---|---|
| उपत्वचा + बाह्यत्वचा (बाह्यत्वचीय रोम सहित) | मोमी परत के नीचे चपटी, आयताकार, संहत कोशिकाओं की एक परत | सुरक्षा; जल-हानि नियंत्रण |
| श्लेषोतक | सजीव कोशिकाएँ, कोने स्थूलित | त्वचा के ठीक नीचे लचीला अवलंब |
| मृदूतक / भरण ऊतक | बड़ी, पतली भित्ति वाली, विरल, अवकाशयुक्त | भंडारण, प्रकाश-संश्लेषण, भराव |
| दृढ़ोतक | छोटी कोशिकाएँ, अत्यंत मोटी लिग्निनयुक्त भित्ति; अधिकतर मृत | कठोर यांत्रिक दृढ़ता |
| संवहन बंडल — बाहर फ्लोएम, बीच में पार्श्व विभज्योतक, भीतर जाइलम | फ्लोएम — सजीव चालनी नलिकाएँ; जाइलम — चौड़ी, मोटी भित्ति वाली मृत नलिकाएँ | भोजन परिवहन, परिधि वृद्धि, जल परिवहन |
कारण: एक ही आकार की कोशिका पाँच अलग कार्य नहीं कर सकती। जल का संवहन करने वाली कोशिका को खोखला और मृत होना पड़ेगा; भोजन संचित करने वाली को सजीव और विस्तृत; दृढ़ता देने वाली को मोटी भित्ति वाला। इसलिए तना अनेक विशेषीकृत ऊतकों से बनता है, जिनमें से प्रत्येक का आकार उसके कार्य के अनुरूप है — यही श्रम विभाजन है।