प्र1.
परमाणु में कोई रिक्त स्थान न हो? इससे विभिन्न वस्तुओं का आकार किस प्रकार प्रभावित हुआ होगा?
उत्तर
प्रत्येक वस्तु अत्यधिक सिकुड़ जाती — जबकि उसका द्रव्यमान ठीक उतना ही बना रहता।
कितना? नाभिक का व्यास परमाणु के व्यास से लगभग 105 गुना छोटा है। यदि सारा रिक्त स्थान हटा दिया जाए तो प्रत्येक लंबाई उसी गुणक से घटेगी और प्रत्येक आयतन उसके घन से।
लंबाई का मापक गुणक = 105
आयतन का मापक गुणक = (105)3 = 1015
7 cm व्यास की क्रिकेट गेंद हो जाती
7 cm ÷ 105 = 7 × 10–5 cm = 0.7 µm — धूल के कण से भी छोटी
लगभग 1.6 m लंबा आपका शरीर हो जाता
1.6 m ÷ 105 = 1.6 × 10–5 m = 16 µm — लगभग एक बाल की मोटाई जितना
आयतन का मापक गुणक = (105)3 = 1015
7 cm व्यास की क्रिकेट गेंद हो जाती
7 cm ÷ 105 = 7 × 10–5 cm = 0.7 µm — धूल के कण से भी छोटी
लगभग 1.6 m लंबा आपका शरीर हो जाता
1.6 m ÷ 105 = 1.6 × 10–5 m = 16 µm — लगभग एक बाल की मोटाई जितना
द्रव्यमान अपरिवर्तित रहेगा, अतः घनत्व 1015 गुना बढ़ जाएगा। 160 g की क्रिकेट गेंद 0.7 µm में सिमटकर भी 160 g की ही रहेगी। ऐसे पदार्थ की एक चम्मच का द्रव्यमान लाखों टन होगा।
ऐसा क्यों होता है: परमाणु का लगभग संपूर्ण द्रव्यमान नाभिक में है और लगभग संपूर्ण आयतन इलेक्ट्रॉन वाले क्षेत्र में। इलेक्ट्रॉन क्षेत्र हटाइए तो आयतन चला जाता है, द्रव्यमान नहीं — यही एकमात्र कारण है कि नाभिकीय द्रव्य इतना अकल्पनीय रूप से सघन होता है।
क्या आप जानते हैं? यह केवल विचार-प्रयोग नहीं है। न्यूट्रॉन तारे में गुरुत्व वास्तव में परमाणुओं को तब तक दबा देता है जब तक नाभिक एक-दूसरे से सट न जाएँ। न्यूट्रॉन तारे में सूर्य से भी अधिक द्रव्यमान एक नगर के आकार के गोले में समाया रहता है।