कक्षा ९ गणित अध्याय 8 प्रश्नावली 8.1 के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-08

प्र1.
उस अनुक्रम के प्रथम पाँच पदों को ज्ञात कीजिए, जिसका nवाँ पद निम्नलिखित प्रकार से दिया गया है— (i) tn = 3n – 4 (ii) tn = 2 – 5n (iii) tn = n² – 2n + 3 जहाँ n ≥ 1 हो।
उत्तर

प्रत्येक सूत्र में n = 1, 2, 3, 4, 5 रखिए।

(i) tn = 3n – 4

t1 = 3 – 4 = –1   t2 = 6 – 4 = 2   t3 = 9 – 4 = 5   t4 = 12 – 4 = 8   t5 = 15 – 4 = 11
प्रथम पाँच पद: –1, 2, 5, 8, 11

(ii) tn = 2 – 5n

t1 = 2 – 5 = –3   t2 = 2 – 10 = –8   t3 = 2 – 15 = –13   t4 = –18   t5 = –23
प्रथम पाँच पद: –3, –8, –13, –18, –23

(iii) tn = n2 – 2n + 3

t1 = 1 – 2 + 3 = 2   t2 = 4 – 4 + 3 = 3   t3 = 9 – 6 + 3 = 6
t4 = 16 – 8 + 3 = 11   t5 = 25 – 10 + 3 = 18
प्रथम पाँच पद: 2, 3, 6, 11, 18
ऐसा क्यों होता है: पहले दो सूत्र n में रैखिक हैं, अत: उनके पद प्रत्येक कदम पर समान मात्रा से बदलते हैं — (i) में +3 से और (ii) में –5 से। दोनों समानांतर श्रेढ़ियाँ हैं, एक बढ़ती और एक घटती। तीसरा सूत्र द्विघात है, अत: उसके अंतर 1, 3, 5, 7 हैं — जो स्वयं बढ़ रहे हैं — और वह समानांतर श्रेढ़ी नहीं है। सूत्र का रूप देखकर ही अनुक्रम का स्वभाव पहचाना जा सकता है, एक भी पद निकाले बिना।
स्वयं जाँचिए: (iii) में n2 – 2n + 3 = (n – 1)2 + 2 है, अत: पद वर्ग संख्याओं 0, 1, 4, 9, 16 से 2 अधिक हैं — फिर वही 2, 3, 6, 11, 18 प्राप्त होते हैं।
प्र2.
अनुक्रम tn = 5n – 3 हो, जबकि n ≥ 1 के 10वें एवं 15वें पदों को ज्ञात कीजिए।
उत्तर
t10 = 5 × 10 – 3 = 50 – 3 = 47
t15 = 5 × 15 – 3 = 75 – 3 = 72
ऐसा क्यों होता है: tn = 5n – 3 एक समानांतर श्रेढ़ी है, जिसका प्रथम पद t1 = 2 और सार्व अंतर 5 है। अत: 15वाँ पद 10वें पद से पाँच कदम आगे होना चाहिए: 47 + 5 × 5 = 72, जो सीधे प्रतिस्थापन से भी यही आया। एक ही मान तक दो स्वतंत्र रास्तों से पहुँचना अच्छी जाँच है।
प्र3.
निर्धारित कीजिए कि क्या 97 और 172 अनुक्रम tn = 5n – 3 के पद हैं, जबकि n ≥ 1 है।
उत्तर

tn = 97 और tn = 172 हल कीजिए और देखिए कि n प्राकृत संख्या आती है या नहीं।

5n – 3 = 97 → 5n = 100 → n = 20
5n – 3 = 172 → 5n = 175 → n = 35

n के दोनों मान प्राकृत संख्याएँ हैं, अत: 97, 20वाँ पद है और 172, 35वाँ पद है — दोनों ही इस अनुक्रम के पद हैं।

ऐसा क्यों होता है: इस अनुक्रम का प्रत्येक पद 5 के किसी गुणज से 3 कम है, अत: उसका इकाई अंक 2 या 7 होता है। 97 और 172 के इकाई अंक 7 और 2 हैं, और 3 जोड़ने पर 100 तथा 175 मिलते हैं, जो 5 से विभाज्य हैं। यदि 98 की जाँच करते तो 5n = 101 और n = 20.2 आता — यह कोई स्थिति नहीं है, अत: 98 पद नहीं होता।
संकेत: "क्या k एक पद है?" सदैव यही प्रश्न है: क्या समीकरण tn = k का हल प्राकृत संख्या है?
प्र4.
अनुक्रम tn = 5n – 3 जहाँ n ≥ 1 है, में कौन-सा पद 607 है?
उत्तर
5n – 3 = 607
5n = 610
n = 122

अत: 607 इस अनुक्रम का 122वाँ पद है। जाँच: 5 × 122 – 3 = 610 – 3 = 607।

ऐसा क्यों होता है: n के लिए हल करना सूत्र को उल्टा चलाना है। सूत्र 5n – 3 स्थिति लेकर मान देता है; समीकरण मान लेकर स्थिति देता है। इसी दो-तरफा उपयोग के कारण व्यापक सूत्र पदों की सूची से कहीं अधिक शक्तिशाली है।
प्र5.
एक अनुक्रम t1 = –5, tn+1 = tn + 3 पुनरावर्ती सूत्र द्वारा दर्शाया जाता है, जब n ≥ 1 हो। अनुक्रम के प्रथम पाँच पद ज्ञात कीजिए। क्या इस अनुक्रम का एक पद 52 है? यदि हाँ, तो यह अनुक्रम का कौन-सा पद है?
उत्तर

t1 = –5 से प्रारंभ कीजिए और प्रत्येक बार 3 जोड़िए।

t2 = –5 + 3 = –2
t3 = –2 + 3 = 1
t4 = 1 + 3 = 4
t5 = 4 + 3 = 7
प्रथम पाँच पद: –5, –2, 1, 4, 7

पद अचर 3 से बढ़ते हैं, अत: यह समानांतर श्रेढ़ी है, जिसमें a = –5 और d = 3 है। पहले व्यापक सूत्र बनाइए, फिर हल कीजिए:

tn = –5 + (n – 1) × 3 = 3n – 8
3n – 8 = 52
3n = 60
n = 20

हाँ — 52 इस अनुक्रम का पद है, 20वाँ पद। जाँच: 3 × 20 – 8 = 52।

ऐसा क्यों होता है: केवल पुनरावर्ती सूत्र से 52 तक पहुँचने के लिए उन्नीस पद निकालने पड़ते। पहले उसे व्यापक सूत्र tn = 3n – 8 में बदलना ही उचित मार्ग है — और दोनों रूप एक ही अनुक्रम बताते हैं, क्योंकि t1 = 3 – 8 = –5 है और n के प्रत्येक कदम पर 3 जुड़ता है।
संकेत: यहाँ सूत्र tn+1 = tn + 3 लिखा है, tn = tn–1 + 3 नहीं। दोनों एक ही बात कहते हैं — किसी भी पद के बाद वाला पद उससे 3 अधिक है — केवल संकेतांक बदला है।
प्र6.
मान लीजिए, T1 = 1, T2 = 2, T3 = 4 और Tn = Tn–1 + Tn–2 + Tn–3 हो, जबकि n ≥ 4 है। T4, T5, T6, T7, और T8 ज्ञात कीजिए।
उत्तर

प्रत्येक पद अपने से पहले के तीन पदों का योग है।

T4 = T3 + T2 + T1 = 4 + 2 + 1 = 7
T5 = T4 + T3 + T2 = 7 + 4 + 2 = 13
T6 = T5 + T4 + T3 = 13 + 7 + 4 = 24
T7 = T6 + T5 + T4 = 24 + 13 + 7 = 44
T8 = T7 + T6 + T5 = 44 + 24 + 13 = 81

अनुक्रम है — 1, 2, 4, 7, 13, 24, 44, 81, …

ऐसा क्यों होता है: चूँकि सूत्र तीन कदम पीछे देखता है, इसे तीन प्रारंभिक पद चाहिए और वह n = 4 से ही प्रारंभ हो सकता है। ध्यान दीजिए कि विरहांक सूत्र का यही विस्तार है: दो पद पीछे जाने पर 1, 2, 3, 5, 8, … मिलता है; तीन पद पीछे जाने पर 1, 2, 4, 7, 13, …। किसी पुनरावर्ती सूत्र को जितने कदम पीछे जाना है, उतने ही प्रारंभिक पद चाहिए।
क्या आप जानते हैं? पिछले तीन पदों को जोड़कर बनने वाला अनुक्रम ट्राइबोनाची अनुक्रम कहलाता है, दो-पद वाले नियम की तुलना में।
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