प्र1.
उस अनुक्रम के प्रथम पाँच पदों को ज्ञात कीजिए, जिसका nवाँ पद निम्नलिखित प्रकार से दिया गया है— (i) tn = 3n – 4 (ii) tn = 2 – 5n (iii) tn = n² – 2n + 3 जहाँ n ≥ 1 हो।
उत्तर
प्रत्येक सूत्र में n = 1, 2, 3, 4, 5 रखिए।
(i) tn = 3n – 4
t1 = 3 – 4 = –1 t2 = 6 – 4 = 2 t3 = 9 – 4 = 5 t4 = 12 – 4 = 8 t5 = 15 – 4 = 11
प्रथम पाँच पद: –1, 2, 5, 8, 11
प्रथम पाँच पद: –1, 2, 5, 8, 11
(ii) tn = 2 – 5n
t1 = 2 – 5 = –3 t2 = 2 – 10 = –8 t3 = 2 – 15 = –13 t4 = –18 t5 = –23
प्रथम पाँच पद: –3, –8, –13, –18, –23
प्रथम पाँच पद: –3, –8, –13, –18, –23
(iii) tn = n2 – 2n + 3
t1 = 1 – 2 + 3 = 2 t2 = 4 – 4 + 3 = 3 t3 = 9 – 6 + 3 = 6
t4 = 16 – 8 + 3 = 11 t5 = 25 – 10 + 3 = 18
प्रथम पाँच पद: 2, 3, 6, 11, 18
t4 = 16 – 8 + 3 = 11 t5 = 25 – 10 + 3 = 18
प्रथम पाँच पद: 2, 3, 6, 11, 18
ऐसा क्यों होता है: पहले दो सूत्र n में रैखिक हैं, अत: उनके पद प्रत्येक कदम पर समान मात्रा से बदलते हैं — (i) में +3 से और (ii) में –5 से। दोनों समानांतर श्रेढ़ियाँ हैं, एक बढ़ती और एक घटती। तीसरा सूत्र द्विघात है, अत: उसके अंतर 1, 3, 5, 7 हैं — जो स्वयं बढ़ रहे हैं — और वह समानांतर श्रेढ़ी नहीं है। सूत्र का रूप देखकर ही अनुक्रम का स्वभाव पहचाना जा सकता है, एक भी पद निकाले बिना।
स्वयं जाँचिए: (iii) में n2 – 2n + 3 = (n – 1)2 + 2 है, अत: पद वर्ग संख्याओं 0, 1, 4, 9, 16 से 2 अधिक हैं — फिर वही 2, 3, 6, 11, 18 प्राप्त होते हैं।