प्र1.
[विरहांक-फिबोनाची अनुक्रम 1, 2, 3, 5, 8, 13, 21, 34, …] क्या आप इस अनुक्रम के आगामी दो पद लिख सकते हैं?
उत्तर
पुनरावर्ती सूत्र Vn = Vn–1 + Vn–2 का उपयोग कीजिए, अर्थात प्रत्येक बार अंतिम दो पदों को जोड़िए।
V8 = 34, V7 = 21
V9 = V8 + V7 = 34 + 21 = 55
V10 = V9 + V8 = 55 + 34 = 89
V9 = V8 + V7 = 34 + 21 = 55
V10 = V9 + V8 = 55 + 34 = 89
अनुक्रम इस प्रकार आगे बढ़ता है — 1, 2, 3, 5, 8, 13, 21, 34, 55, 89, 144, …
ऐसा क्यों होता है: यह सूत्र दो कदम पीछे जाता है, एक नहीं, अत: इसे दो प्रारंभिक मान चाहिए — यहाँ V1 = 1 और V2 = 2। इसी कारण सूत्र केवल n ≥ 3 के लिए लिखा गया है: n = 1 या n = 2 पर जोड़ने के लिए दो पूर्व पद हैं ही नहीं। पुनरावर्ती सूत्र तभी पूर्ण होता है, जब उसके साथ प्रारंभिक पद भी दिए जाएँ।
क्या आप जानते हैं? आचार्य विरहांक ने सातवीं शताब्दी में वृत्तजातिसमुच्चय में यह अनुक्रम प्राकृत छंद में लघु और गुरु अक्षरों की व्यवस्थाएँ गिनते हुए लिखा था। गोपाल और हेमचंद्र ने बारहवीं शताब्दी में इसका अध्ययन किया — फिबोनाची से लगभग पचास वर्ष पहले।