सीधा उत्तर — पृष्ठ 161 से 166 तक शारदा केवल यह सिखाती है कि श्लोक के पदों को गद्य-क्रम में कैसे जमाया जाए। यह पाठ नहीं, परिशिष्ट है — इसमें न कथा है, न कवि-परिचय, न ‘अभ्यासाद् जायते सिद्धिः’ जैसा प्रश्न-खण्ड। जो दो तालिकाएँ यहाँ छपी हैं, वे भी दोनों ओर से पूरी भरी हुई हैं — प्रश्न भी छपे हैं, उत्तर भी। इसलिए यहाँ उत्तर लुप्त नहीं हैं, प्रश्न ही नहीं हैं।
पुस्तक स्वयं क्या कहती है — तीनों प्रारम्भिक परिशिष्टों के अन्त में (पृष्ठ 183) पुस्तक लिखती है — ‘अस्मिन् परिशिष्टत्रये श्लोकानाम् अन्वयक्रमाः समासाः प्रयोगाश्च इत्येते विचाराः सामान्यतया प्रदर्शिताः सन्ति। छात्राः विस्तृताध्ययनार्थम् अन्यान् ग्रन्थान् परिशीलयेयुः।’ अर्थात् परिशिष्ट केवल सामान्य दिशा दिखाते हैं; विस्तार के लिए व्याकरण-ग्रन्थ देखने चाहिए।
छह पृष्ठों में क्या-क्या है —
| पृष्ठ | विषय | रूप |
|---|---|---|
| 161 | अन्वय की आवश्यकता · श्लोकान्वयविधि का विभाजन (दण्डान्वय / खण्डान्वय) · दण्डान्वय का स्मृति-श्लोक तथा उसके नियम | गद्य + चित्र-रेखाचित्र |
| 162 | ‘शास्त्राण्यधीत्यापि…’ श्लोक — पदच्छेदः, दण्डान्वयः, विवरणम् (अध्याहार) | साधित उदाहरण |
| 163 | उन्नीस पदों को संख्या देकर क्रमशः योजनम् · खण्डान्वय के दो स्मृति-श्लोक · आकाङ्क्षा | सूची + पद्य + गद्य |
| 164 | योग्यता · आसत्तिः · तात्पर्यम् — तीनों उदाहरण-सहित | गद्य |
| 165 | प्रश्न पूछने का क्रम · ‘सम्पूर्णकुम्भो न करोति…’ श्लोक, पदच्छेदः तथा खण्डान्वय-तालिका का पहला भाग | गद्य + तालिका |
| 166 | तालिका का शेष भाग तथा पूरा अन्वयः | तालिका |