प्र1.
पात्र को छुए बिना धातु की प्लेट पर डंडे से चोट मारकर उसके समीप एक प्रबल ध्वनि उत्पन्न कीजिए। शीट पर दानों का अवलोकन कीजिए। क्या ध्वनि का दानों पर कोई प्रभाव पड़ता है?
उत्तर
हाँ — तनी हुई शीट पर रखे दाने उछलते और इधर-उधर सरकते हैं, जबकि पात्र को किसी ने छुआ तक नहीं।
ऐसा क्यों होता है, चरण दर चरण:
1. चोट खाई धातु की प्लेट कंपन करती है और वायु में संपीडन-विरलन भेजती है।
2. ये तनी हुई शीट तक पहुँचते हैं। संपीडन उसे दबाता है, विरलन उसे छोड़ता है — इस प्रकार शीट प्रति सेकंड कई बार दबती-छूटती है और कंपन करने लगती है।
3. कंपन करती शीट अपने ऊपर रखे दानों को ऊपर उछाल देती है।
1. चोट खाई धातु की प्लेट कंपन करती है और वायु में संपीडन-विरलन भेजती है।
2. ये तनी हुई शीट तक पहुँचते हैं। संपीडन उसे दबाता है, विरलन उसे छोड़ता है — इस प्रकार शीट प्रति सेकंड कई बार दबती-छूटती है और कंपन करने लगती है।
3. कंपन करती शीट अपने ऊपर रखे दानों को ऊपर उछाल देती है।
दाने गुरुत्व के विरुद्ध ऊपर उठे हैं, अतः उन पर कार्य हुआ है। यह कार्य ध्वनि से ही आ सकता था, इसलिए क्रियाकलाप सिद्ध करता है कि ध्वनि ऊर्जा वहन करती है। जब स्रोत कंपन करता है तो वह माध्यम को ऊर्जा स्थानांतरित करता है; माध्यम के कण अन्य कणों से टकराकर उस ऊर्जा को आगे बढ़ाते हैं।
संकेत: दानों को समान रूप से बिखेरिए, एक जगह ढेर न लगने दीजिए — ढेर भारी होता है और उसे उठाने में अधिक ऊर्जा लगती है, जिससे प्रभाव दिखना कठिन हो जाता है।