कक्षा ९ विज्ञान अध्याय 10 चिंतन कीजिए के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-08

प्र1.
दो अंतरिक्ष यात्री अंतरिक्ष स्टेशन की यांत्रिक भुजा में सुधार करने के लिए अंतरिक्ष में साथ-साथ चल रहे हैं। क्या वे एक-दूसरे से बातचीत कर सकते हैं और धातु की वस्तुओं के परस्पर टकराने की ध्वनि वैसे ही सुन सकते हैं जैसे वे पृथ्वी पर सुनते हैं?
उत्तर

नहीं — सीधे नहीं सुन सकते। बाह्य अंतरिक्ष लगभग निर्वातित है और वहाँ ध्वनि तरंग के संचरण के लिए कोई माध्यम नहीं है।

ऐसा क्यों होता है: ध्वनि संपीडनों और विरलनों की एक श्रृंखला है — ऐसे क्षेत्र जहाँ माध्यम के कण पास-पास आ जाते हैं और ऐसे क्षेत्र जहाँ वे दूर हट जाते हैं। कोई कण इस विक्षोभ को आगे तभी बढ़ा सकता है जब वह अपने पड़ोसी कण से टकराए। जहाँ कण ही न हों वहाँ संघट्ट भी नहीं होंगे, अतः विक्षोभ को आगे ले जाने वाला कुछ नहीं बचता। निर्वात बेलजार प्रयोग (चित्र 10.7) यही दर्शाता है — जैसे-जैसे वायु बाहर निकाली जाती है, घंटी बजती दिखाई तो देती है पर उसकी ध्वनि लुप्त हो जाती है।

पृथ्वी पर वही टकराहट आसानी से सुनाई देती है क्योंकि दोनों यात्रियों के बीच की वायु एक उत्तम माध्यम है।

क्या आप जानते हैं? अंतरिक्ष यात्री अपने परिधान में लगे रेडियो सेट से बात करते हैं। रेडियो तरंगें विद्युतचुंबकीय तरंगें हैं, यांत्रिक नहीं, अतः उन्हें माध्यम की आवश्यकता नहीं होती। यदि दोनों हेलमेट आपस में सटा दिए जाएँ तो टकराहट सुनी जा सकती है — तब हेलमेट का ठोस पदार्थ माध्यम का कार्य करता है।
प्र2.
अधिकांश चमगादड़ रात्रि के अंधेरे में अपने शिकार का पता लगाने हेतु ध्वनि का उपयोग कैसे करते हैं?
उत्तर

अधिकांश चमगादड़ पराश्रव्य तरंगों के छोटे-छोटे स्पंद (20 kHz से अधिक आवृत्ति) उत्सर्जित करते हैं और फिर वस्तुओं तथा शिकार से परावर्तित होकर लौटने वाली प्रतिध्वनियों को सुनते हैं। इसे प्रतिध्वनि द्वारा स्थान निर्धारण (echolocation) कहते हैं।

  • चमगादड़ पराश्रव्य तरंगों का एक स्पंद भेजता है।
  • यह स्पंद किसी कीट, दीवार अथवा टहनी से परावर्तित हो जाता है।
  • चमगादड़ के कान लौटती हुई प्रतिध्वनि ग्रहण करते हैं।
  • समय-विलंब से वह वस्तु की दूरी और प्रतिध्वनि की दिशा तथा प्रबलता से उसकी स्थिति एवं आकार का अनुमान लगा लेता है।
शिकार की दूरी = v × t / 2  (ध्वनि वहाँ तक जाती है और लौटती भी है)
यदि वायु में प्रतिध्वनि 0.02 s में लौटे, तो दूरी = 340 m s⁻¹ × 0.02 s ÷ 2 = 3.4 m
पराश्रव्य तरंगें ही क्यों: कम तरंगदैर्घ्य छोटी वस्तुओं से स्पष्ट रूप से परावर्तित होती है। वायु में 40 kHz पर λ = 344 m s⁻¹ ÷ 40000 s⁻¹ ≈ 0.0086 m ≈ 0.9 cm — मच्छर जैसे छोटे कीट से टकराकर लौटने के लिए पर्याप्त छोटी। 100 Hz की ध्वनि का λ ≈ 3.4 m होता, जो कीट के चारों ओर से निकल जाती।
क्या आप जानते हैं? डॉल्फिन, व्हेल और कुछ पक्षी भी प्रतिध्वनि द्वारा स्थान निर्धारण करते हैं, और इसी सिद्धांत का उपयोग मनुष्य सोनार तथा अल्ट्रासोनोग्राफी में करते हैं।
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