प्र1.
नए उपकरण वैज्ञानिकों को इस ग्रह का वास्तविक समय में निरीक्षण करने, जलवायु, पारितंत्रों तथा मानवीय गतिविधियों के बीच के छिपे हुए संबंधों को उजागर करने में सहायता करते हैं। ये उपकरण बदलते ग्रह के विषय में कौन-सी नई खोजों को उजागर करेंगे और वे भूमंडलीय ऊष्मण एवं जलवायु परिवर्तन को समझने की हमारी क्षमता को कैसे बढ़ाएँगे?
उत्तर
सबसे बड़ा परिवर्तन यह है कि अब पृथ्वी का कभी-कभार प्रतिचयन नहीं, बल्कि निरंतर निरीक्षण हो रहा है — इसलिए वैज्ञानिक किसी परिवर्तन को घटित होते समय देख सकते हैं, वर्षों बाद नहीं।
| उपकरण | अब क्या देख सकता है | इससे क्या उजागर हो सकता है |
|---|---|---|
| पृथ्वी-निरीक्षण उपग्रह | समुद्र-सतह का ताप, हिम का विस्तार, वन आवरण, मृदा की नमी, CO2 और CH4 के प्रवाह — पूरे ग्रह पर, हर कुछ दिनों में | कौन-से विशिष्ट स्रोत मीथेन छोड़ रहे हैं; कोई हिमानी कितनी तेज़ी से पतली हो रही है; आग के बाद वन कितनी शीघ्रता से उबरता है |
| महासागरीय बॉय (buoys) और प्लव | अनेक गहराइयों पर ताप, लवणता और घुली CO2, स्वतः दर्ज होकर | महासागर की ऊष्मा और कार्बन कितनी गहराई तक संचित हो रहे हैं, और धाराएँ किस प्रकार खिसक रही हैं |
| युग्मित कंप्यूटर मॉडल | वायुमंडल, महासागर, स्थल और हिम का एक साथ अनुकरण, जैसा IITM पुणे के वैज्ञानिक भारतीय मानसून के लिए करते हैं | बेहतर ऋतुगत पूर्वानुमान, और यह स्पष्ट चित्र कि तापन भारत भर में मानसून वर्षा को कैसे बदलेगा |
| हिम-क्रोड, वृक्ष-वलय, अवसाद | लाखों वर्ष पीछे तक की CO2 और ताप | क्या आज की वृद्धि सचमुच "मानव सभ्यता के इतिहास में असामान्य" है — और वह है |
| स्वचालित मौसम केंद्र और नागरिक आँकड़े | वर्षा, ताप और वायु गुणवत्ता के सघन स्थानीय मापन | शहरी ऊष्मा द्वीप और बाढ़-जोखिम के गली-स्तर के मानचित्र |
बेहतर निरीक्षण से विज्ञान क्यों बदलता है, केवल रिकॉर्ड नहीं:
- यह पुनर्भरणों को उजागर करता है। हिम–एल्बिडो, पर्माफ़्रॉस्ट की मीथेन और कमज़ोर पड़ता महासागरीय कार्बन अवशोषक जैसे लूप ही तय करते हैं कि तापन संयत रहेगा या बेक़ाबू हो जाएगा। किसी पुनर्भरण को एक पाठ से नहीं मापा जा सकता; उसके लिए पूरे तंत्र को एक साथ देखना पड़ता है।
- यह "जलवायु" को स्थानीय बना देता है। 1.5 °C का वैश्विक औसत विदर्भ के किसान को कुछ नहीं बताता। उच्च विभेदन वाले मॉडल बता सकते हैं कि उस जिले की बुआई की तिथि का क्या होगा।
- यह हानि और प्रतिक्रिया के बीच का अंतराल घटाता है। मीथेन के रिसाव, अवैध कटाई या समुद्री ऊष्मा-लहर का वास्तविक समय में पता चलने का अर्थ है कि उस पर अगले वर्ष की रिपोर्ट में नहीं, इसी सप्ताह कार्रवाई हो सकती है।
- यह विज्ञान को जाँचने योग्य बनाता है। खुले उपग्रह आँकड़ों से कोई भी किसी देश के उत्सर्जन-दावों की पुष्टि कर सकता है — और यही पेरिस समझौते जैसे समझौतों को लागू करने योग्य बनाता है।
आपका अपना उत्तर: यहाँ कोई एक "सही" उत्तर नहीं है — यह प्रश्न तर्क करने के लिए है। कोई एक उपकरण चुनिए, बताइए कि वह किस अनुत्तरित प्रश्न को सुलझा सकता है, और उस क्रियाविधि की व्याख्या कीजिए जिसे वह देखने देगा। और पुस्तक की अंतिम पंक्ति याद रखिए — "संभव है कि आने वाली नई खोजें किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा की जाएँ जो वर्तमान में विज्ञान सीख रहा है — ठीक आपकी भाँति!"