कक्षा ९ विज्ञान अध्याय 13 वैज्ञानिक की भाँति सोचिए के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-08

प्र1.
एक रोचक अनुमान आधारित प्रश्न यह समझने में सहायता करता है कि हमें सूर्य से कितनी अधिक मात्रा में ऊर्जा प्राप्त होती है। हमें यह अनुमान लगाना है कि वर्तमान में हमारे देश में उपभोग होने वाली पूर्ण विद्युत आपूर्ति को पूरा करने के लिए पृथ्वी की सतह के कितने भाग पर सौर पैनल लगाने होंगे (चित्र 13.4)। इसका अनुमान लगाने के लिए आप आवश्यक आँकड़े इंटरनेट से प्राप्त कर सकते हैं। पृथ्वी की सतह पर कुछ सूर्यातप की कल्पना कीजिए जिसका कुछ अंश विद्युत ऊर्जा में रूपांतरित होता है। आप जानेंगे कि यदि थार मरुस्थल के केवल एक छोटे से भाग को सौर पैनलों से ढक दिया जाए तब वह भारत की संपूर्ण विद्युत आपूर्ति करने में सक्षम होंगे।
उत्तर

नीचे की गणना के अनुसार लगभग 4600 km2 क्षेत्र पर पैनल लगाने से काम चल जाएगा — अर्थात् लगभग 68 km × 68 km का एक वर्ग, जो थार मरुस्थल का केवल लगभग 2 प्रतिशत है। पूरी गणना, प्रत्येक चरण पर मात्रकों सहित:

चरण 1 — भारत कितनी विद्युत शक्ति उपयोग करता है?

भारत का वार्षिक विद्युत उपभोग ≈ 1.6 × 1012 kW h (लगभग 1600 अरब यूनिट)
एक वर्ष में घंटे = 365 × 24 h = 8760 h
औसत शक्ति, P = ऊर्जा ÷ समय
P = (1.6 × 1012 kW h) ÷ (8760 h)
P = 1.83 × 108 kW = 1.83 × 1011 W (लगभग 180 GW)

चरण 2 — एक वर्ग मीटर पैनल कितनी विद्युत शक्ति देता है?

सतह पर अधिकतम सूर्यातप ≈ 1 kW m–2 = 1000 W m–2 (स्वच्छ आकाश, सूर्य ऊँचा)
किंतु दिन-रात, बादल और तिरछी किरणों को मिलाकर भारत में औसतन
5 kW h m–2 प्रतिदिन → 5000 W h m–2 ÷ 24 h ≈ 200 W m–2 (चौबीसों घंटे का औसत)
सौर पैनल की दक्षता, η ≈ 20% = 0.20
प्रति वर्ग मीटर विद्युत शक्ति = 0.20 × 200 W m–2 = 40 W m–2

चरण 3 — भाग दीजिए।

आवश्यक क्षेत्रफल, A = आवश्यक शक्ति ÷ प्रति वर्ग मीटर शक्ति
A = (1.83 × 1011 W) ÷ (40 W m–2)
A = 4.6 × 109 m2
1 km2 = 106 m2, अतः A = 4.6 × 109 ÷ 106 = ≈ 4600 km2
अर्थात् √4600 km268 km भुजा वाला एक वर्ग

चरण 4 — थार मरुस्थल से तुलना।

थार मरुस्थल का क्षेत्रफल ≈ 2 × 105 km2
आवश्यक अंश = 4600 km2 ÷ 2 × 105 km2 = 0.023 = लगभग 2.3%
उत्तर इतना छोटा क्यों निकला: सूर्य अत्यंत तीव्र दर से ऊर्जा भेजता है — वायुमंडल के ऊपर प्रत्येक वर्ग मीटर पर प्रत्येक सेकंड 1400 जूल। पूरे वर्ष में फैली भारत की समस्त विद्युत माँग, मरुस्थल के एक छोटे-से टुकड़े पर गिरने वाली ऊर्जा के सामने बहुत छोटी है। इसलिए सौर ऊर्जा की सीमा सूर्य के प्रकाश की कमी नहीं है; सीमा है पैनलों की लागत, भूमि, और सबसे बढ़कर भंडारण, क्योंकि रात में और मानसून में सूर्य नहीं चमकता।
स्वयं जाँचिए: आपके आँकड़े इनसे भिन्न हो सकते हैं — नवीनतम उपभोग आँकड़ा लीजिए और दक्षता तथा औसत सूर्यातप की अपनी कल्पना कीजिए। यदि आप प्रत्येक चरण पर मात्रक लिखते हैं और वे ठीक से कटते हैं (W ÷ W m–2 = m2), तो आपका अनुमान सही है। अनुमान आधारित प्रश्न में परिमाण की कोटि महत्त्वपूर्ण होती है, अंतिम अंक नहीं।
क्या यह उपयोगी रहा? त्रुटि बताएँ