प्र1.
मनुष्यों में परिपक्व लाल रक्त कोशिकाओं में केंद्रक नहीं होता (केंद्रक-रहित)। क्या आप बिना केंद्रक की किसी अन्य कोशिका के विषय में जानते हैं?
उत्तर
हाँ। कई कोशिकाएँ केंद्रक खो देती हैं या बनाती ही नहीं, और हर बार इस हानि से कुछ लाभ मिलता है।
| कोशिका | कहाँ मिलती है | केंद्रक न होने से क्या मिलता है |
|---|---|---|
| परिपक्व लाल रक्त कोशिका | मानव रक्त | हीमोग्लोबिन के लिए अधिक स्थान, अतः अधिक ऑक्सीजन का परिवहन |
| बिंबाणु (प्लेटलेट) | मानव रक्त | छोटे कोशिका-खंड जो घाव को शीघ्र बंद कर देते हैं |
| फ्लोएम की चालनी नलिका कोशिकाएँ | पादप संवहन ऊतक | भोजन के बहाव के लिए खुला मार्ग; पास की सहचर कोशिका अपना केंद्रक रखकर इसे नियंत्रित करती है |
| परिपक्व जाइलम वाहिका और वाहिनिका | पादप संवहन ऊतक | मृत, खोखली नलिकाएँ — जल के लिए स्वच्छ पाइप |
| नेत्र लेंस की परिपक्व तंतु कोशिकाएँ | नेत्र का लेंस | पूर्ण पारदर्शिता, क्योंकि केंद्रक प्रकाश को प्रकीर्णित कर देता |
ऐसा क्यों होता है: केंद्रक नियंत्रण केंद्र है, अतः उसे छोड़ने की कीमत भी है — बिना केंद्रक की कोशिका न अपनी मरम्मत कर सकती है, न विभाजन। इसीलिए मानव लाल रक्त कोशिका लगभग 120 दिन ही जीवित रहती है और उसे अस्थि मज्जा से बदलना पड़ता है। यह सौदा फिर भी लाभ का है क्योंकि कार्य विशुद्ध यांत्रिक है — ऑक्सीजन ढोने, रिसाव रोकने या पाइप बनने के लिए नए अनुदेशों की आवश्यकता नहीं। जहाँ भी किसी कोशिका का एक सरल, निश्चित कार्य हो और उसे कहीं और से बदला जा सके, वहाँ विकास ने प्रायः केंद्रक त्याग दिया है।
क्या आप जानते हैं? लाल रक्त कोशिका का उभयावतल, केंद्रक-रहित आकार उसे इतना लचीला भी बना देता है कि वह स्वयं से पतली केशिकाओं में एक-एक करके निकल सके।