प्र1.
परिधि में यह वृद्धि किस कारण होती है?
उत्तर
तने के भीतर एक वलय के रूप में व्यवस्थित सक्रिय रूप से विभाजित होने वाली कोशिकाओं के कारण — अर्थात पार्श्व विभज्योतक के कारण।
ये कोशिकाएँ तने की लंबाई के अनुदिश एक बेलन के रूप में फैली होती हैं। विभाजन के समय ये नई कोशिकाएँ संकेंद्री रूप से भीतर और बाहर दोनों ओर जोड़ती हैं, अतः तना भीतर से मोटा होता जाता है और उसका गोल आकार भी बना रहता है।
यह वलयों के रूप में क्यों दिखता है: अनुकूल वर्ष में (पर्याप्त जल, उपयुक्त ताप) विभज्योतक तेजी से विभाजित होता है और प्रतिकूल वर्ष में धीरे। तीव्र वृद्धि से बड़ी, पतली भित्ति वाली कोशिकाओं की चौड़ी पट्टी बनती है; मंद वृद्धि से छोटी, मोटी भित्ति वाली कोशिकाओं की संकरी पट्टी। एक चौड़ी + एक संकरी पट्टी = एक वार्षिक वृद्धि वलय (चित्र 3.4)। वलय गिनकर वृक्ष की आयु ज्ञात होती है और उनकी चौड़ाई उस जलवायु का अभिलेख है जिसमें वृक्ष बढ़ा।
क्या आप जानते हैं? इसी कारण द्विबीजपत्री तने प्रतिवर्ष मोटे होते हैं, किंतु घास या ताड़ का तना नहीं — उनमें पार्श्व विभज्योतक होता ही नहीं।