कक्षा ९ विज्ञान अध्याय 3 क्रियाकलाप 3.1 के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-08

प्र1.
तालिका 3.1 में आपके द्वारा अभिलेखित किए गए आँकड़ों में आपने क्या अवलोकन किया? क्या आपके अवलोकन चित्र 3.2 में प्रस्तुत ग्राफीय निरूपण के समान हैं? इससे आप क्या निष्कर्ष निकालते हैं?
उत्तर

जार ‘क’ की जड़ें प्रतिदिन लंबी होती जाती हैं; जार ‘ख’ की जड़ें उसी दर से बढ़ती हैं जब तक उनके मूलाग्र काटे नहीं जाते, और उसके पश्चात वृद्धि पूर्णतः रुक जाती है।

पुस्तक के चित्र 3.2 में अंकित पाठ्यांक (शल्क कंद के आधार से जड़ की लंबाई, cm में) —

दिन1234567
जार ‘क’ (अकटी)0.250.81.82.93.84.95.8
जार ‘ख’ (मूलाग्र कटा)0.250.71.62.6 → 1.61.61.61.6
0123456 1234567 दिन जड़ की लंबाई (cm) जार ‘क’ जार ‘ख’ — मूलाग्र कटने पर वृद्धि रुकी
प्याज की जड़ों में वृद्धि, चित्र 3.2 के पाठ्यांकों से बनाया गया आलेख। बिंदुयुक्त ऊर्ध्वाधर रेखा वह 1 cm है जो काटकर हटाया गया।

अब वृद्धि की दर परिकलित कीजिए —

वृद्धि दर = (लंबाई में परिवर्तन) ÷ (लिया गया समय)
जार ‘क’, दिन 1 → दिन 7 = (5.8 cm − 0.25 cm) ÷ 6 दिन = 5.55 cm ÷ 6 दिन ≈ 0.93 cm दिन⁻¹
जार ‘ख’, काटने से पूर्व (दिन 1 → दिन 4) = (2.6 cm − 0.25 cm) ÷ 3 दिन = 2.35 cm ÷ 3 दिन ≈ 0.78 cm दिन⁻¹
काटकर हटाई गई लंबाई = 2.6 cm − 1.6 cm = 1.0 cm (चरण 5 के 1 सेंटीमीटर के अनुरूप)
जार ‘ख’, काटने के पश्चात (दिन 4 → दिन 7) = (1.6 cm − 1.6 cm) ÷ 3 दिन = 0 cm दिन⁻¹

निष्कर्ष: जड़ केवल अपने मूलाग्र से वृद्धि करती है। मूलाग्र हटा दिया जाए तो शेष जड़ के सजीव और स्वस्थ रहने पर भी लंबाई बढ़ना पूर्णतः रुक जाता है।

ऐसा क्यों होता है: मूलाग्र में मूल शीर्षस्थ विभज्योतक होता है — छोटी कोशिकाएँ, पतली भित्ति, सघन कोशिकाद्रव्य, बड़ा केंद्रक और रसधानी अनुपस्थित — जो निरंतर विभाजित होती रहती हैं। अध्याय 2 में आपने इन्हीं कोशिकाओं में समसूत्री विभाजन देखा था। मूलाग्र काटने से एकमात्र विभाजनशील भाग हट जाता है; पीछे बची कोशिकाएँ विभेदित होकर स्थायी ऊतक बन चुकी हैं और विभाजित नहीं हो सकतीं। प्ररोह के अग्रभाग में भी यही विभज्योतक होता है, इसलिए पौधा ऊँचाई भी अपने अग्रभाग से ही बढ़ाता है।
स्वयं जाँचिए: जार ‘क’ नियंत्रण (control) है। जल, प्रकाश, कंद — सब समान रखे गए हैं और केवल जार ‘ख’ में मूलाग्र काटा गया है। इसी कारण आप विश्वासपूर्वक कह सकते हैं कि अंतर का कारण केवल मूलाग्र ही है।
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