प्र1.
बल बढ़ाते हुए कमानीदार तुला को धीरे-धीरे खींचिए और जैसे ही गुटका गति आरंभ करे तो तुला के पाठ्यांक को अभिलेखित कीजिए। यह पाठ्यांक क्या दर्शाता है?
उत्तर
यह उस सतह द्वारा गुटके पर लगाए गए घर्षण बल का परिमाण दर्शाता है (फिसलन आरंभ होने से पहले सतह अधिकतम जितना घर्षण बल दे सकती है, उसका सन्निकट मान)।
गुटके पर क्षैतिज बल: स्प्रिंग का खिंचाव (आगे), घर्षण बल (पीछे)
"जैसे ही गति आरंभ करे" — उस क्षण वेग अभी बदल नहीं रहा
→ त्वरण ≈ 0 → परिणामी बल ≈ 0
→ Fस्प्रिंग = Fघर्षण
अतः तुला का पाठ्यांक = घर्षण बल, न्यूटन में
"जैसे ही गति आरंभ करे" — उस क्षण वेग अभी बदल नहीं रहा
→ त्वरण ≈ 0 → परिणामी बल ≈ 0
→ Fस्प्रिंग = Fघर्षण
अतः तुला का पाठ्यांक = घर्षण बल, न्यूटन में
संकेत: तुला को समान गति से और पूर्णत: क्षैतिज खींचिए। झटके से या तिरछा खींचने पर ऊर्ध्वाधर घटक जुड़ जाता है और पाठ्यांक बिगड़ जाता है।