प्र1.
घर्षण बल विश्व से लुप्त हो जाए तो वस्तुओं की गति पर इसका क्या प्रभाव होगा?
उत्तर
कोई भी गतिमान वस्तु स्वयं कभी नहीं रुकेगी — और हम किसी वस्तु को न तो चला पाएँगे, न मोड़ पाएँगे, न रोक पाएँगे।
- गतिमान वस्तुएँ कभी नहीं रुकेंगी। एक बार लुढ़काई गई गेंद, पैडल मारना बंद करने के बाद साइकिल, रबड़ बैंड से छोड़ा गया सिक्कों का ढेर — सब नियत वेग से सदैव चलते रहेंगे, ठीक वैसे ही जैसे परिणामी बल शून्य होने पर न्यूटन का प्रथम नियम कहता है।
- चलना और दौड़ना असंभव हो जाएगा। आप इसलिए आगे बढ़ते हैं क्योंकि आप पृथ्वी की सतह को पीछे धकेलते हैं और घर्षण बल आपके पैर को आगे धकेलता है। घर्षण न होने पर आपका पैर पीछे फिसल जाएगा और आप गिर जाएँगे।
- वाहन न त्वरित हो सकेंगे, न रुक सकेंगे। टायर बिना पकड़ के घूमते रहेंगे; ब्रेक पूर्णत: घर्षण पर ही निर्भर हैं।
- कोई वस्तु अपने स्थान पर नहीं टिकेगी। गाँठें, कीलें, पेच, थोड़ी ढलवाँ मेज पर रखा गिलास, खंभे पर लिपटी रस्सी — सब घर्षण के कारण ही टिकते हैं।
ऐसा क्यों होता है: दैनिक जीवन की अधिकांश स्थितियों में घर्षण ही एकमात्र क्षैतिज संपर्क बल है। इसे हटा दीजिए तो गतिमान वस्तु पर क्षैतिज परिणामी बल शून्य हो जाता है, अतः उसका वेग स्वयं कभी बदल ही नहीं सकता; और हम वह बल भी खो देते हैं जिससे हम धरती को धकेलते हैं।
संकेत: घर्षण को प्राय: हानिकारक कहा जाता है क्योंकि यह ऊर्जा का क्षय करता है, परंतु यह प्रश्न दर्शाता है कि नियंत्रित गति इसी के कारण संभव है।