कक्षा ९ विज्ञान अध्याय 8 भारत का वैज्ञानिक योगदान के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-08

प्र1.
ध्रुव के विषय में और अधिक शोध एवं खोज कीजिए!
उत्तर

ध्रुव भारत का सबसे बड़ा अनुसंधान रिएक्टर है, जो भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC), ट्रॉम्बे, मुंबई में स्थित है। यह विद्युत उत्पादन करने वाला रिएक्टर नहीं है। इसका कार्य प्रयोगों के लिए न्यूट्रॉनों का प्रबल एवं स्थिर स्रोत बनना है।

अनुसंधान रिएक्टर किस काम आता है

  • न्यूट्रॉन प्रकीर्णन। न्यूट्रॉनों का किरणपुंज किसी प्रतिदर्श पर डाला जाता है और प्रकीर्णित न्यूट्रॉनों को अंकित किया जाता है। न्यूट्रॉन अनावेशित होने के कारण इलेक्ट्रॉन मेघ को पार कर नाभिकों से अन्योन्यक्रिया करते हैं, अतः वे बता देते हैं कि किसी ठोस के भीतर परमाणु कहाँ स्थित हैं — यह कार्य हाइड्रोजन जैसे हल्के परमाणुओं के लिए X-किरणें ठीक से नहीं कर पातीं।
  • रेडियोसमस्थानिक बनाना जो अस्पतालों में उपयोग होते हैं — जैसे कैंसर की रेडियोथेरेपी में प्रयुक्त 6027Co तथा थायरॉइड रोगों में प्रयुक्त 13153I।
  • पदार्थों का परीक्षण — शक्ति रिएक्टरों में उपयोग से पहले पदार्थों को न्यूट्रॉन विकिरण में परखना।

भारतीय वैज्ञानिकों ने इससे क्या सीखा — अतिचालकों की आंतरिक संरचना, बैटरी इलेक्ट्रोडों के भीतर लीथियम आयनों की गति, औषधि अणुओं की आकृति तथा औद्योगिक मिश्र धातुओं का व्यवहार। ये परिणाम सीधे भारत में बनने वाली बेहतर दवाइयों, बेहतर ऊर्जा भंडारण एवं सुदृढ़ मिश्र धातुओं में काम आते हैं।

यह कीजिए: ध्रुव पर एक पृष्ठ का विवरण तैयार कीजिए। पता लगाइए — (i) यह किस वर्ष पूर्ण क्षमता पर पहुँचा, (ii) इसकी तापीय शक्ति MW में कितनी है, (iii) इसमें ईंधन, मंदक एवं शीतलक क्या हैं, तथा (iv) वर्ष 1956 में आरंभ हुए BARC के उस छोटे रिएक्टर का नाम क्या था जो इससे पहले बना। BARC एवं परमाणु ऊर्जा विभाग की वेबसाइटें इसके लिए विश्वसनीय स्रोत हैं।
यह क्यों महत्त्वपूर्ण है: भारतीय परमाणु कार्यक्रम के जनक होमी जहाँगीर भाभा का तर्क था कि किसी देश के पास अपने अनुसंधान उपकरण स्वयं के होने चाहिए, उधार के नहीं। ध्रुव जैसे रिएक्टर का अर्थ है कि भारतीय वैज्ञानिक न्यूट्रॉन प्रयोग विदेश में समय मिलने की प्रतीक्षा किए बिना अपने ही देश में कर सकते हैं।
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