कक्षा ९ विज्ञान अध्याय 8 सोचिए और बताइए के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-08

प्र1.
कल्पना कीजिए कि आप एक वैज्ञानिक हैं और आपने एक नया तत्व खोजा है। उसका नाम अपने नाम पर रखिए और सिद्ध कीजिए कि आपने उसके लिए जिस प्रतीक का चयन किया वह आई.यू.पी.ए.सी. के नियमों का पालन करता है।
उत्तर

यह उत्तर आपको स्वयं गढ़ना है, अतः यहाँ एक नमूना दिया गया है जिससे आप तर्क की विधि ले सकते हैं।

नमूना उत्तर: मैं अपने नाम पर इस तत्व का नाम आनंदियम रखता हूँ और इसका प्रतीक An चुनता हूँ।

अध्याय में दिए आई.यू.पी.ए.सी. नियमों के अनुसार औचित्य —

नियमक्या ‘An’ इसका पालन करता है?
प्रतीक नाम का प्रथम अक्षर अथवा प्रथम दो अक्षर होहाँ — Anandium (आनंदियम)
प्रथम अक्षर बड़ा, द्वितीय अक्षर (यदि हो) छोटाहाँ — A बड़ा, n छोटा। न AN, न an
प्रतीक पहले से किसी तत्व का न होजाँच लिया — ज्ञात 118 तत्वों में से किसी का प्रतीक An नहीं है
किसी व्यक्ति के नाम पर रखे तत्वों का नाम -ium पर समाप्त होता हैहाँ — आनंद + ियम = आनंदियम, जैसे क्यूरियम एवं आइंस्टीनियम

यदि ‘An’ पहले से प्रयोग में होता तो तीसरा आई.यू.पी.ए.सी. नियम द्वितीय अक्षर के स्थान पर नाम के किसी बाद वाले अक्षर की अनुमति देता है — जैसे Ad (आनियम से) अथवा Am। क्लोरीन को Cl और जिंक को Zn ठीक इसी नियम से मिला है।

संकेत: आई.यू.पी.ए.सी. — 'शुद्ध और अनुप्रयुक्त रसायन विज्ञान का अंतर्राष्ट्रीय संघ' — वह संस्था है जो वास्तव में नामों एवं प्रतीकों को स्वीकृति देती है। वास्तविक तत्वों के नाम स्थानों (पोलोनियम, निहोनियम), वैज्ञानिकों (बोरियम, माइटनेरियम) अथवा गुणधर्मों पर रखे जाते हैं, और किसी जीवित व्यक्ति के स्वयं के अनुरोध पर किसी तत्व का नाम नहीं रखा जाता।
प्र2.
यदि सभी वैज्ञानिक एक तत्व के लिए भिन्न-भिन्न प्रतीकों का उपयोग करते तो क्या समस्याएँ उत्पन्न हो सकती थीं?
उत्तर

तब रसायन विज्ञान एक साझा भाषा नहीं रह जाता, और त्रुटियाँ प्रत्येक गणना के पहले ही चरण से आरंभ हो जातीं।

  • सूत्र संदिग्ध हो जाते। यदि एक रसायनज्ञ सोडियम के लिए Na लिखे और दूसरा S, तो 'SO' का अर्थ सोडियम ऑक्साइड भी हो सकता है और सल्फर मोनोऑक्साइड भी। कागज़ देखकर यह तय करना असंभव है।
  • समीकरण न संतुलित किए जा सकते, न जाँचे जा सकते, अतः परिणामों को दोहराया नहीं जा सकता — और पुनरावृत्ति-योग्यता ही किसी दावे को वैज्ञानिक बनाती है।
  • संख्यात्मक कार्य गलत हो जाता। सल्फर (द्रव्यमान ≈ 32 u) को सोडियम (≈ 23 u) समझ लीजिए और प्रयोग की प्रत्येक द्रव्यमान गणना गलत हो जाएगी।
  • भाषा की बाधा लौट आती। आयरन को हिंदी में लोहा, फ्रेंच में fer और जर्मन में Eisen कहते हैं — परंतु प्रतीक सर्वत्र Fe है। एक ही प्रतीक के कारण चेन्नई का रसायनज्ञ जापान का शोध-पत्र पढ़ सकता है।
  • सुरक्षा पर संकट आता। रसायन के ड्रम, दवा के लेबल अथवा कारखाने के सूचना-पट को कोई भी प्रशिक्षित व्यक्ति तत्काल और बिना किसी संदेह के पढ़ सकना चाहिए।
ऐसा क्यों होता है: प्रतीक कोई सजावट नहीं, वह एक ऐसा आँकड़ा है जो आगे गणना में उपयोग होता है। उसका मानकीकरण ठीक वैसा ही आवश्यक है जैसा SI मात्रकों का। इसीलिए तत्वों का नामकरण अलग-अलग वैज्ञानिकों पर न छोड़कर एक अंतर्राष्ट्रीय संस्था, आई.यू.पी.ए.सी., को सौंपा गया।
क्या आप जानते हैं? वर्ष 1803 में डाल्टन के चित्रात्मक प्रतीक — हाइड्रोजन के लिए बिंदु वाला वृत्त, कार्बन के लिए भरा वृत्त — मानक बनाने का सच्चा प्रयास थे, परंतु उन्हें छापना और याद रखना कठिन था। बर्जेलियस ने वर्ष 1813 में इनके स्थान पर लैटिन नामों से लिए गए अक्षर रखे, और वही पद्धति आज भी चल रही है।
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