प्र1.
क्या आप अनुमान लगा सकते हैं कि इनमें से प्रत्येक समस्थानिक में कितने इलेक्ट्रॉन होते हैं?
उत्तर
प्रत्येक में एक इलेक्ट्रॉन। प्रोटियम, ड्यूटीरियम एवं ट्राइटियम — तीनों में ठीक 1 इलेक्ट्रॉन होता है।
| समस्थानिक | संकेतन | प्रोटॉन | न्यूट्रॉन | द्रव्यमान संख्या A | इलेक्ट्रॉन |
|---|---|---|---|---|---|
| प्रोटियम (~99.98%) | 11H | 1 | 0 | 1 | 1 |
| ड्यूटीरियम (~0.015%) | 21H | 1 | 1 | 2 | 1 |
| ट्राइटियम (अल्प मात्रा में) | 31H | 1 | 2 | 3 | 1 |
तर्क: तीनों हाइड्रोजन हैं, अतः तीनों के लिए Z = 1। उदासीन परमाणु में इलेक्ट्रॉनों की संख्या प्रोटॉनों के बराबर होती है, अतः प्रत्येक में 1 इलेक्ट्रॉन है, जो K-कोश में रहता है।
ऐसा क्यों होता है: ठीक इसी कारण समस्थानिकों के रासायनिक गुणधर्म समान होते हैं। रसायन संयोजकता इलेक्ट्रॉनों से तय होता है, और तीनों का विन्यास एक ही है — '1'। ये केवल न्यूट्रॉनों की संख्या में भिन्न हैं, जिससे द्रव्यमान बदलता है — अतः इनके भौतिक गुणधर्म, जैसे क्वथनांक एवं गलनांक, थोड़े भिन्न होते हैं।
क्या आप जानते हैं? प्रोटियम के स्थान पर ड्यूटीरियम से बने जल को भारी जल, D₂O, कहते हैं। यह रासायनिक रूप से जल ही है, परंतु लगभग 10% अधिक सघन है और 0 °C के बजाय 3.8 °C पर जमता है। काकरापार एवं कैगा जैसे भारतीय नाभिकीय रिएक्टरों में मंदक के रूप में भारी जल का उपयोग होता है।