प्र1.
उपर्युक्त चित्र को ध्यानपूर्वक देखिए। आपने क्या अवलोकन किया? क्या आपने ध्यान दिया है कि हमारे जैसे सजीव प्राणी और घर जैसी निर्जीव वस्तुएँ दोनों ही अंततः परमाणुओं से निर्मित हैं?
उत्तर
चित्र में दो शृंखलाएँ हैं जो बिल्कुल अलग-अलग स्थानों से आरंभ होकर एक ही स्थान पर पहुँचती हैं — परमाणु।
- निर्जीव शृंखला: घर → कक्ष → दीवार → ईंट → सिलिकेट → परमाणु।
- सजीव शृंखला: मानव शरीर → अंग → ऊतक → कोशिका → प्रोटीन → परमाणु।
हाँ — दोनों परमाणु पर ही समाप्त होती हैं। बीच में दर्शाए गए परमाणु (C, H, O, N, P, Si) दोनों शृंखलाओं में वही तत्व हैं। ईंट मुख्यतः सिलिकेट (Si एवं O) से बनी है; प्रोटीन C, H, O, N एवं S से बना है। परमाणुओं के प्रकार एवं उनकी व्यवस्था भिन्न होती है, परंतु 'सजीव द्रव्य' नाम का कोई अलग पदार्थ नहीं होता।
ऐसा क्यों होता है: कोशिका को सजीव बनाने वाली बात किसी भिन्न प्रकार का परमाणु नहीं, बल्कि व्यवस्था है — वह ढंग जिससे कार्बन, हाइड्रोजन, ऑक्सीजन एवं नाइट्रोजन जुड़कर ऐसे बड़े अणु बनाते हैं जो अपनी प्रतिकृति बना सकें और अभिक्रियाएँ चला सकें। व्यवस्था तोड़ दीजिए, शेष केवल साधारण परमाणु बचेंगे।