कक्षा ९ विज्ञान अध्याय 8 सोचिए और बताइए के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-08

प्र1.
मान लीजिए कि आपने टॉमसन के विवरणानुसार स्वयं एक ‘परमाणु’ बनाया जिसमें धनात्मक आवेश के लिए मिट्टी और वितरित इलेक्ट्रॉनों के लिए छोटे मोतियों का उपयोग किया। क्या होगा यदि — (i) मिट्टी पर धनावेश उसमें वितरित मोतियों के कुल ऋणावेश से कम हो? (ii) त्रुटिवश यदि मिट्टी में थोड़ा-सा भी ऋणावेश हो तो क्या आपका मॉडल अब भी उदासीन परमाणु को प्रदर्शित करेगा?
उत्तर

(i) मॉडल पर परिणामी ऋणावेश होगा — यह उदासीन परमाणु नहीं, बल्कि ऋणायन (ऐनायन) को प्रदर्शित करेगा।

परिणामी आवेश = (मिट्टी पर धनावेश) + (मोतियों पर कुल ऋणावेश)
यदि धनावेश का परिमाण ऋणावेश से कम है तो योग ऋणात्मक होगा
जैसे — मिट्टी +8, मोती 10 × (–1) = –10 → परिणामी = –2

वास्तविक उदाहरण ऑक्साइड आयन O2– है: 8 प्रोटॉन, 10 इलेक्ट्रॉन, परिणामी आवेश –2।

(ii) नहीं — यह उदासीन परमाणु को प्रदर्शित नहीं करेगा, बल्कि यह परमाणु का मॉडल ही नहीं रह जाएगा।

  • गणितीय रूप से आवेश कभी निरस्त हो ही नहीं सकते: ऋणात्मक मिट्टी + ऋणात्मक मोती का योग सदैव ऋणात्मक ही होगा।
  • वैचारिक रूप से टॉमसन के मॉडल का पूरा आधार यही है कि परमाणु का धनावेश गोले में और ऋणावेश उसमें धँसे कणों में रहता है। यदि गोला ही ऋणावेशित हो जाए तो इलेक्ट्रॉनों को संतुलित करने के लिए कुछ बचता ही नहीं।
ऐसा क्यों होता है: उदासीनता एक सटीक हिसाब की शर्त है — प्रोटॉनों की संख्या = इलेक्ट्रॉनों की संख्या, अतः कुल धनावेश एवं कुल ऋणावेश परिमाण में समान होकर निरस्त हो जाते हैं। उदासीन परमाणु के किसी भी मॉडल को यह शर्त पूरी करनी ही होगी।
प्र2.
क्या इसकी तुलना एक संतरे (अथवा एक नींबू जिनके नरम गूदों के मध्य बीज होते हैं) से करना उचित है? यह कहाँ तक टॉमसन के विचार से मेल खाता है और इसमें कहाँ कमी है?
उत्तर

हाँ, यह उतना ही उपयुक्त है जितना तरबूज — और इसकी कमियाँ भी ठीक वही हैं।

कहाँ मेल खाता है

  • बीज (इलेक्ट्रॉन) किसी बड़े पदार्थ (धनावेशित गूदे) के भीतर धँसे रहते हैं, बाहर चिपके नहीं होते।
  • बीज एक स्थान पर एकत्र न होकर पूरे फल में वितरित रहते हैं — टॉमसन के इलेक्ट्रॉन भी गोले में वितरित हैं।
  • फल लगभग गोलाकार है, जैसे मॉडल का धनावेश का गोला।

कहाँ कमी है

  • संतरा फाँकों में बँटा होता है जिनके बीच झिल्ली होती है, और बीज कुछ ही फाँकों में रहते हैं — टॉमसन का धनावेश पूर्णतः एकसमान है, उसमें कोई खाने नहीं।
  • बीज स्थिर हैं; इलेक्ट्रॉन गतिशील हैं।
  • संतरे पर मोटा छिलका होता है, अर्थात एक स्पष्ट बाहरी सीमा; परमाणु के चारों ओर ऐसी कोई परत नहीं होती।
  • पैमाना पूर्णतः गलत है। बीज फल का अच्छा-खासा भाग होता है, जबकि इलेक्ट्रॉन परमाणु की तुलना में अत्यंत सूक्ष्म है और उसका द्रव्यमान परमाणु के द्रव्यमान की तुलना में नगण्य है।
  • सबसे बड़ी बात — मॉडल स्वयं गलत है: वास्तविक परमाणु में फैला हुआ धनावेशित गूदा होता ही नहीं। संपूर्ण धनावेश परमाणु से 105 गुना छोटे नाभिक में सिमटा रहता है।
संकेत: विज्ञान की प्रत्येक उपमा की एक सीमा होती है। पहले यह बताइए कि उपमा किस बात को दर्शाने के लिए है (यहाँ — धनावेशित पदार्थ में धँसे ऋणावेशित कण) और उससे आगे उसका उपयोग मत कीजिए।
प्र3.
टॉमसन ने यह निष्कर्ष क्यों निकाला कि इलेक्ट्रॉन सभी परमाणुओं में उपस्थित होते हैं?
उत्तर

क्योंकि नली किसी भी पदार्थ की हो और उसमें कोई भी गैस भरी हो, कैथोड किरणें एक जैसी ही निकलीं।

टॉमसन ने विसर्जन नली का प्रयोग दो बातें बदलते हुए दोहराया —

  • कैथोड की धातु, तथा
  • निम्न दाब पर नली में भरी गैस

प्रत्येक बार किरणों ने विद्युत एवं चुंबकीय क्षेत्र में एक ही प्रकार का व्यवहार किया — आवेश का वही चिह्न, आवेश-द्रव्यमान का वही अनुपात। कण सदैव ऋणावेशित थे और सदैव परमाणु से बहुत हल्के।

ऐसा क्यों होता है: यह एक नियंत्रित प्रयोग है। यदि कण अपने स्रोत पर निर्भर होता तो स्रोत बदलने पर कण भी बदलता। ऐसा नहीं हुआ। शेष एकमात्र व्याख्या यही है कि यह कण किसी एक तत्व का लक्षण नहीं, बल्कि प्रत्येक परमाणु का घटक है। अतः टॉमसन ने निष्कर्ष निकाला कि इलेक्ट्रॉन समस्त द्रव्य का मूल घटक हैं — और इसलिए परमाणु विभाज्य हैं।
क्या आप जानते हैं? इलेक्ट्रॉन पहला ऐसा कण था जिसे अवपरमाणुक कण के रूप में पहचाना गया। गैसों की विद्युत चालकता पर उसी अध्ययन के लिए, जिससे यह खोज हुई, टॉमसन को वर्ष 1906 में भौतिकी का नोबेल पुरस्कार मिला।
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