कक्षा ९ विज्ञान अध्याय 9 क्रियाकलाप 9.3 के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-08

प्र1.
(चरण 7) आपने क्या अवलोकन किया?
उत्तर

तुरंत एक दुग्ध-श्वेत अवक्षेप बन जाता है जब बेरियम क्लोराइड का विलयन सोडियम सल्फेट के विलयन में डाला जाता है। स्वच्छ द्रव धुँधला और सफ़ेद हो जाता है।

सोडियम सल्फेट + बेरियम क्लोराइड → बेरियम सल्फेट + सोडियम क्लोराइड
Na₂SO₄ + BaCl₂ → BaSO₄↓ + 2 NaCl

यह श्वेत ठोस बेरियम सल्फेट है जो जल में अघुलनशील है और इसीलिए नीचे बैठ जाता है। साथ बना सोडियम क्लोराइड विलयन में ही घुला रहता है, अतः दिखाई नहीं देता।

ऐसा क्यों होता है: दोनों आरंभिक विलयनों में मुक्त आयन हैं — एक फ्लास्क में Na⁺ और SO₄²⁻, दूसरे में Ba²⁺ और Cl⁻। मिलने पर Ba²⁺ और SO₄²⁻ एक-दूसरे को इतने प्रबल रूप से आकर्षित करते हैं कि वे विलयन में रहने के स्थान पर ठोस जालक में बँध जाते हैं। Na⁺ और Cl⁻ में ऐसी प्रवृत्ति नहीं, अतः वे मुक्त बने रहते हैं। इस प्रकार बना नया अघुलनशील ठोस अवक्षेप कहलाता है और उसका बनना ही रासायनिक परिवर्तन का प्रमाण है।
प्र2.
(चरण 9) क्या विलयनों को मिश्रित करने के पश्चात आपको पाठ्यांक में कोई परिवर्तन दिखाई देता है?
उत्तर

नहीं — पाठ्यांक अपरिवर्तित रहता है। दोनों शंक्वाकार फ्लास्कों का कुल द्रव्यमान मिश्रण के पश्चात भी वही रहता है जो पहले था।

Na₂SO₄ विलयन का द्रव्यमान + BaCl₂ विलयन का द्रव्यमान
= BaSO₄ अवक्षेप का द्रव्यमान + NaCl विलयन का द्रव्यमान
मिश्रण से पूर्व कुल द्रव्यमान = मिश्रण के पश्चात कुल द्रव्यमान

इससे उस अभिक्रिया के लिए द्रव्यमान संरक्षण के नियम की पुष्टि होती है जिसमें ठोस बनता है।

ऐसा क्यों होता है: क्रियाकलाप 9.2 के विपरीत इस अभिक्रिया में कोई गैस नहीं बनती। फ्लास्क से कुछ बाहर जा ही नहीं सकता, अतः द्रव्यमान की दृष्टि से खुला फ्लास्क भी एक बंद निकाय है। प्रत्येक परमाणु पलड़े पर बना रहता है, इसलिए तुला का पाठ्यांक बदल ही नहीं सकता।
संकेत: पुस्तक कहती है कि दोनों फ्लास्क पूरे समय पलड़े पर ही रखे रहें, खाली फ्लास्क भी। स्थानांतरण के समय फ्लास्क 'ख' की दीवारों पर विलयन की सूक्ष्म परत सदैव चिपकी रह जाती है; यदि आप 'ख' को हटा लेंगे तो वह परत भी तुला से हट जाएगी और आप गलती से द्रव्यमान की कमी लिख लेंगे।
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