प्र1.
(चरण 7) आपने क्या अवलोकन किया?
उत्तर
तुरंत एक दुग्ध-श्वेत अवक्षेप बन जाता है जब बेरियम क्लोराइड का विलयन सोडियम सल्फेट के विलयन में डाला जाता है। स्वच्छ द्रव धुँधला और सफ़ेद हो जाता है।
सोडियम सल्फेट + बेरियम क्लोराइड → बेरियम सल्फेट + सोडियम क्लोराइड
Na₂SO₄ + BaCl₂ → BaSO₄↓ + 2 NaCl
Na₂SO₄ + BaCl₂ → BaSO₄↓ + 2 NaCl
यह श्वेत ठोस बेरियम सल्फेट है जो जल में अघुलनशील है और इसीलिए नीचे बैठ जाता है। साथ बना सोडियम क्लोराइड विलयन में ही घुला रहता है, अतः दिखाई नहीं देता।
ऐसा क्यों होता है: दोनों आरंभिक विलयनों में मुक्त आयन हैं — एक फ्लास्क में Na⁺ और SO₄²⁻, दूसरे में Ba²⁺ और Cl⁻। मिलने पर Ba²⁺ और SO₄²⁻ एक-दूसरे को इतने प्रबल रूप से आकर्षित करते हैं कि वे विलयन में रहने के स्थान पर ठोस जालक में बँध जाते हैं। Na⁺ और Cl⁻ में ऐसी प्रवृत्ति नहीं, अतः वे मुक्त बने रहते हैं। इस प्रकार बना नया अघुलनशील ठोस अवक्षेप कहलाता है और उसका बनना ही रासायनिक परिवर्तन का प्रमाण है।