कक्षा ९ विज्ञान अध्याय 9 वैज्ञानिक की भाँति सोचिए के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-08

प्र1.
आपको एक रासायनिक अभिक्रिया दी गई है जिसमे जिंक, तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के साथ अभिक्रिया कर जिंक क्लोराइड और हाइड्रोजन गैस बनाता है। जिंक + हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (तनु) → जिंक क्लोराइड + हाइड्रोजन। इस अभिक्रिया का उपयोग इस परिकल्पना का परीक्षण करने के लिए कीजिए कि किसी भी रासायनिक अभिक्रिया में द्रव्यमान संरक्षित रहता है। इसके लिए एक प्रयोग की रूपरेखा बनाकर इसका निष्पादन कीजिए। आप क्रियाकलाप 9.2 में दर्शाई गई व्यवस्था से एक भिन्न प्रकार की व्यवस्था का उपयोग कर सकते हैं।
उत्तर

परिकल्पना: अभिक्रिया Zn + 2 HCl → ZnCl₂ + H₂ में अभिक्रिया के पश्चात कुल द्रव्यमान वही रहेगा जो पूर्व था, बशर्ते कोई भी हाइड्रोजन बाहर न निकलने पाए

अभिकल्पना की मुख्य समस्या। हाइड्रोजन सभी गैसों में सबसे हल्की है और बहुत तेज़ी से निकलती है। अतः पूरा प्रयोग एक ही बात पर टिका है — निकाय बंद होना चाहिए, और वह जिंक के अम्ल को छूने से पहले बंद होना चाहिए।

उपकरण: 250 mL शंक्वाकार फ्लास्क, उसमें समा जाने वाली एक छोटी परखनली, गुब्बारा एवं धागा, दानेदार जिंक, तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल तथा 0.01 g तक पढ़ने वाली अंकीय तुला।

विधि

  1. शंक्वाकार फ्लास्क में लगभग 25 mL तनु HCl लीजिए।
  2. छोटी परखनली में लगभग 1.3 g दानेदार जिंक लीजिए और परखनली को सीधा फ्लास्क के भीतर उतार दीजिए, जिससे जिंक अभी अम्ल में न गिरे।
  3. फ्लास्क के मुँह पर गुब्बारा चढ़ाकर धागे से कसकर बाँध दीजिए।
  4. इस पूरे बंद निकाय को तुला पर रखिए और आरंभिक पाठ्यांक m₁ अभिलेखित कीजिए।
  5. फ्लास्क को पलड़े से उठाए बिना तिरछा कीजिए जिससे परखनली लुढ़क जाए और जिंक अम्ल में गिर जाए। तुरंत बुलबुले उठने लगते हैं और गुब्बारा फूलने लगता है।
  6. बुदबुदाहट पूर्णतः रुक जाने तक प्रतीक्षा कीजिए, फिर अंतिम पाठ्यांक m₂ अभिलेखित कीजिए।
  7. पूरे प्रयोग को तीन बार दोहराइए।

1.3 g जिंक ही क्यों? क्योंकि उत्पन्न हाइड्रोजन इतनी अवश्य होनी चाहिए कि तुला उसे पकड़ सके।

Zn का परमाणु द्रव्यमान = 65 u; H₂ का आण्विक द्रव्यमान = 2 u
Zn + 2 HCl → ZnCl₂ + H₂
65 u Zn से 2 u H₂ प्राप्त होती है
1.3 g Zn से प्राप्त H₂ का द्रव्यमान = 1.3 g × 2 ÷ 65 = 0.04 g

यह तुला की 0.01 g की सूक्ष्मग्राहिता का चार गुना है, अतः खुले फ्लास्क वाले नियंत्रण प्रयोग में स्पष्ट कमी पढ़ी जा सकेगी। समीकरण का द्रव्यमान संतुलन भी जाँच लीजिए —

अभिकारक : 65 u (Zn) + 2 × 36.5 u (HCl) = 138 u
उत्पाद : 136 u (ZnCl₂) + 2 u (H₂) = 138 u

अपेक्षित परिणाम

प्रयासआरंभिक पाठ्यांक m₁अंतिम पाठ्यांक m₂m₂ − m₁
1 (बंद)176.42 g176.42 g0.00 g
2 (बंद)178.05 g178.04 g−0.01 g
3 (खुला — नियंत्रण)175.90 g175.86 g−0.04 g

निष्कर्ष: बंद निकाय वाले प्रयासों में m₂ = m₁ रहा, वह भी ±0.01 g के भीतर — अर्थात अंतिम अंक की अनिश्चितता के भीतर। अतः द्रव्यमान संरक्षित रहता है। खुले नियंत्रण प्रयास में 0.04 g की कमी आई, जो हाइड्रोजन के परिकलित द्रव्यमान के ठीक बराबर है — इससे सिद्ध होता है कि खुले पात्र में होने वाली ‘हानि’ पलड़े से गैस के चले जाने की हानि है, ब्रह्मांड से द्रव्य के लोप की नहीं।

सुरक्षा प्रथम: हाइड्रोजन अत्यधिक ज्वलनशील है। इसे किसी भी ज्वाला से दूर कीजिए, इतना कसा हुआ काग मत लगाइए कि दाब बढ़ जाए — गैस को गुब्बारे में जाने दीजिए। तनु अम्ल त्वचा को जलाता है, अतः नेत्र-रक्षक अवश्य पहनिए।
ऐसा क्यों होता है: जिंक के परमाणु लुप्त नहीं हुए हैं; वे विलयन में Zn²⁺ के रूप में हैं। HCl में क्लोरीन से जुड़ी हाइड्रोजन केवल H₂ के रूप में मुक्त हो गई है। परमाणु पुनर्व्यवस्थित हुए हैं, न सृजित हुए हैं न नष्ट — और यही डॉल्टन का दूसरा अभिगृहीत तथा द्रव्यमान संरक्षण के नियम का कारण है।
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