पहले विन्यास निश्चित कीजिए। 'क' के तीसरे कोश में एक इलेक्ट्रॉन है, अतः पहले दो कोश पूर्ण होने ही चाहिए : क = 2, 8, 1 (Z = 11, सोडियम)। 'ख' के दूसरे कोश में छह इलेक्ट्रॉन हैं : ख = 2, 6 (Z = 8, ऑक्सीजन)।
(i) 'क' 1 इलेक्ट्रॉन त्यागेगा। अपना एकमात्र M-कोश इलेक्ट्रॉन हटा देने पर 2, 8 शेष रहता है — पूर्ण अष्टक। इसके स्थान पर सात इलेक्ट्रॉन ग्रहण करना कहीं कठिन होता।
(ii) 'क' एकसंयोजी धनायन क⁺ बनाएगा।
क⁺ : 11 प्रोटॉन (+11), 10 इलेक्ट्रॉन (−10) → कुल आवेश +1
(iii) 'ख' 2 इलेक्ट्रॉन ग्रहण करेगा। छह संयोजकता इलेक्ट्रॉनों के साथ वह अष्टक से दो कम है; छह त्यागने की अपेक्षा दो ग्रहण करना बहुत सरल है।
(iv) 'ख' द्विसंयोजी ऋणायन ख²⁻ बनाएगा (विन्यास 2, 8)।
(v) आयनिक आबंध। एक तत्व इलेक्ट्रॉन सौंपता है और दूसरा उन्हें ग्रहण करता है, अतः यह स्थानांतरण है, साझेदारी नहीं। इससे बने विपरीत आवेशित आयन फिर स्थिर विद्युत आकर्षण द्वारा परस्पर बँध जाते हैं।
(vi) क₂ख।
2 क⁺ + ख²⁻ → क₂ख (वास्तविक रूप में Na₂O — सोडियम ऑक्साइड)
आवेश जाँच : 2(+1) + (−2) = 0 ✓