30 g ऑक्सीजन।
अतः ऑक्सीजन का द्रव्यमान = सल्फर का द्रव्यमान × 3 ÷ 2
= 20 g × 3 ÷ 2
= 30 g
जाँच: प्रतिदर्श का कुल द्रव्यमान = 20 g + 30 g = 50 g। सल्फर का प्रतिशत = 20 ÷ 50 × 100 = 40 %, ऑक्सीजन का = 30 ÷ 50 × 100 = 60 % ✓
अद्यतन2026-09-08
30 g ऑक्सीजन।
जाँच: प्रतिदर्श का कुल द्रव्यमान = 20 g + 30 g = 50 g। सल्फर का प्रतिशत = 20 ÷ 50 × 100 = 40 %, ऑक्सीजन का = 30 ÷ 50 × 100 = 60 % ✓
12 g ऑक्सीजन।
जाँच: 9 g : 12 g = 3 : 4 ✓। द्रव्यमान संरक्षण के नियम से बनी कार्बन मोनोक्सॉइड का कुल द्रव्यमान = 9 g + 12 g = 21 g।
क्योंकि यौगिक में परमाणु रासायनिक आबंधों द्वारा एक निश्चित क्रम में बँधे होते हैं, जबकि मिश्रण केवल भौतिक मेल है जिसके अवयव किसी भी मात्रा में हो सकते हैं।
| यौगिक | मिश्रण | |
|---|---|---|
| अवयव किस प्रकार बँधे हैं | रासायनिक आबंधों द्वारा — प्रति अणु अथवा सूत्र इकाई प्रत्येक तत्व के परमाणुओं की संख्या निश्चित | बँधे होते ही नहीं; अवयव केवल साथ-साथ पड़े रहते हैं |
| द्रव्यमान संघटन | निश्चित — जल में सदैव H : O = 1 : 8 | कोई भी मान |
| उदाहरण | H₂O; 9 g से सदैव 1 g H और 8 g O | H₂ एवं O₂ गैसों का मिश्रण, अथवा जल में नमक, किसी भी अनुपात में |
| गुणधर्म | नए गुणधर्म, जो तत्वों से बिलकुल भिन्न होते हैं | प्रत्येक अवयव अपने गुणधर्म बनाए रखता है |
जल में दो हाइड्रोजन परमाणु एक ऑक्सीजन परमाणु से सदैव आबंधित रहते हैं। इस गिनती को बदले बिना पदार्थ नहीं बदला जा सकता; बदल दीजिए तो वह जल रह ही नहीं जाएगा। अतः द्रव्यमान अनुपात 2 × 1 u : 1 × 16 u = 1 : 8 पर बँधा रहता है।
मिश्रण पर ऐसा कोई बंधन नहीं। आप एक लीटर जल में 1 g नमक घोलिए अथवा 30 g — दोनों ही लवण-विलयन कहलाएँगे।
हाँ, उनके परिणाम नियम की पुष्टि करते हैं — क्योंकि 8 : 2 वही अनुपात है जो 4 : 1 है।
प्रतिशत के रूप में तुलना कीजिए, यही सबसे उचित परीक्षण है —
| विद्यार्थी | लिया गया Cu : O | कॉपर % | ऑक्सीजन % |
|---|---|---|---|
| X | 4 : 1 | 4/5 × 100 = 80 % | 1/5 × 100 = 20 % |
| Y | 8 : 2 | 8/10 × 100 = 80 % | 2/10 × 100 = 20 % |
दो स्वतंत्र निर्माणों से द्रव्यमान संघटन एक ही निकला — स्थिर अनुपात का नियम ठीक यही कहता है। विद्यार्थी Y ने केवल उसी ऑक्साइड की दुगुनी मात्रा बनाई है।