कक्षा ९ विज्ञान अध्याय 9 सोचिए और बताइए के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-08

प्र1.
एक विद्यार्थी किसी खुले बीकर में 10 g एथेनॉल जलाता है। अभिक्रिया पूर्ण होने के पश्चात बीकर में कोई अवशेष शेष नहीं रहता है। क्या इससे यह निष्कर्ष निकलता है कि द्रव्यमान संरक्षण के नियम का उल्लंघन हुआ है? व्याख्या कीजिए।
उत्तर

नहीं, नियम का उल्लंघन नहीं हुआ है। बीकर में कुछ शेष इसलिए नहीं बचता क्योंकि इस दहन के सभी उत्पाद गैसें हैं, और खुले बीकर में गैसें उड़ जाती हैं। द्रव्य स्थान बदल गया है, लुप्त नहीं हुआ।

एथेनॉल वायु की ऑक्सीजन में जलता है —

C₂H₅OH + 3 O₂ → 2 CO₂ + 3 H₂O

अब द्रव्यमान का हिसाब लगाइए। H = 1 u, C = 12 u, O = 16 u लीजिए।

एथेनॉल C₂H₅OH का आण्विक द्रव्यमान = (12 × 2) + (1 × 6) + 16 = 46 u
प्रयुक्त ऑक्सीजन : 3 O₂ = 3 × 32 u = 96 u, अतः 10 g एथेनॉल के लिए
O₂ का द्रव्यमान = 10 g × 96 ÷ 46 = 20.87 g
बनी कार्बन डाइऑक्साइड : 2 CO₂ = 88 u → 10 g × 88 ÷ 46 = 19.13 g
बना जल : 3 H₂O = 54 u → 10 g × 54 ÷ 46 = 11.74 g
अभिकारकों का कुल द्रव्यमान = 10 g + 20.87 g = 30.87 g
उत्पादों का कुल द्रव्यमान = 19.13 g + 11.74 g = 30.87 g
अभिकारकों का द्रव्यमान = उत्पादों का द्रव्यमान ✓

अतः तुला का पाठ्यांक घटता अवश्य, परंतु केवल इसलिए कि 30.87 g गैस बीकर से बाहर चली गई जबकि 20.87 g ऑक्सीजन चुपचाप वायु से भीतर आ गई। इनमें से कोई भी आवागमन तोला नहीं गया।

ऐसा क्यों होता है: कोई भी संरक्षण नियम बंद निकाय के विषय में कथन होता है। खुले बीकर में जलाना तो निकाय के खुलेपन की पराकाष्ठा है — द्रव्य ऑक्सीजन के रूप में भीतर आता है और कार्बन डाइऑक्साइड तथा जलवाष्प के रूप में बाहर जाता है। नियम की जाँच के लिए निकाय को बंद करना ही होगा, ठीक जैसे क्रियाकलाप 9.2 की व्यवस्था 2 में किया गया।
स्वयं जाँचिए: तुला पर रखे बंद जार के भीतर मोमबत्ती जलाइए। मोम घटता रहता है फिर भी पाठ्यांक स्थिर रहता है — क्योंकि CO₂ और जलवाष्प जार के भीतर ही बंद हैं।
प्र2.
जब 20 g हाइड्रोजन, 160 g ऑक्सीजन के साथ पूर्णतः अभिक्रिया करता है तब द्रव्यमान संरक्षण के नियम के अनुसार जल की कितनी मात्रा का निर्माण होगा?
उत्तर

180 g जल।

द्रव्यमान संरक्षण के नियम के अनुसार,
जल का द्रव्यमान = हाइड्रोजन का द्रव्यमान + ऑक्सीजन का द्रव्यमान
= 20 g + 160 g
= 180 g

स्थिर अनुपात के नियम से जाँच। जल में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन का द्रव्यमान अनुपात सदैव 1 : 8 होता है।

20 g : 160 g = 1 : 8 ✓

अनुपात ठीक वही है, इसीलिए प्रश्न में कहा गया है कि हाइड्रोजन पूर्णतः अभिक्रिया करता है — कोई भी गैस शेष नहीं बचती। यदि 20 g हाइड्रोजन के साथ केवल 100 g ऑक्सीजन ली जाती, तो सारी 100 g ऑक्सीजन मात्र 12.5 g हाइड्रोजन के साथ अभिक्रिया करती, 112.5 g जल बनता और 7.5 g हाइड्रोजन बिना अभिक्रिया के शेष रह जाती।

ऐसा क्यों होता है: दोनों नियम साथ-साथ कार्य करते हैं। द्रव्यमान संरक्षण का नियम कुल निश्चित करता है; स्थिर अनुपात का नियम यह तय करता है कि प्रत्येक अभिकारक की कितनी मात्रा वास्तव में भाग ले सकेगी। निश्चित अनुपात से अधिक अभिकारक डालने से उत्पाद नहीं बढ़ता — अतिरिक्त मात्रा शेष रह जाती है।
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