नहीं, नियम का उल्लंघन नहीं हुआ है। बीकर में कुछ शेष इसलिए नहीं बचता क्योंकि इस दहन के सभी उत्पाद गैसें हैं, और खुले बीकर में गैसें उड़ जाती हैं। द्रव्य स्थान बदल गया है, लुप्त नहीं हुआ।
एथेनॉल वायु की ऑक्सीजन में जलता है —
अब द्रव्यमान का हिसाब लगाइए। H = 1 u, C = 12 u, O = 16 u लीजिए।
प्रयुक्त ऑक्सीजन : 3 O₂ = 3 × 32 u = 96 u, अतः 10 g एथेनॉल के लिए
O₂ का द्रव्यमान = 10 g × 96 ÷ 46 = 20.87 g
बनी कार्बन डाइऑक्साइड : 2 CO₂ = 88 u → 10 g × 88 ÷ 46 = 19.13 g
बना जल : 3 H₂O = 54 u → 10 g × 54 ÷ 46 = 11.74 g
उत्पादों का कुल द्रव्यमान = 19.13 g + 11.74 g = 30.87 g
अभिकारकों का द्रव्यमान = उत्पादों का द्रव्यमान ✓
अतः तुला का पाठ्यांक घटता अवश्य, परंतु केवल इसलिए कि 30.87 g गैस बीकर से बाहर चली गई जबकि 20.87 g ऑक्सीजन चुपचाप वायु से भीतर आ गई। इनमें से कोई भी आवागमन तोला नहीं गया।