अतः ऑक्सीजन द्विसंयोजी ऋणायन बनाती है, संयोजकता 2। वह त्यागने के स्थान पर ग्रहण करती है क्योंकि छह संयोजकता इलेक्ट्रॉनों के साथ छह त्यागने की अपेक्षा दो ग्रहण करके अष्टक तक पहुँचना कहीं सरल है।
ऐसा क्यों होता है: O²⁻ का विन्यास 2, 8 है — ठीक निऑन जैसा। प्रत्येक परमाणु इसी स्थायी व्यवस्था की ओर बढ़ता है, और ऑक्सीजन के लिए दो इलेक्ट्रॉन ग्रहण करना वहाँ पहुँचने का सबसे सस्ता मार्ग है।
संकेत: इसी से धातुओं के ऑक्साइड बनते हैं। Na⁺ के साथ O²⁻ से Na₂O, Mg²⁺ के साथ MgO और Al³⁺ के साथ Al₂O₃ — प्रत्येक स्थिति में आवेश शून्य पर संतुलित हो जाते हैं।
प्र2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए — मैग्नीशियम और क्लोरीन में से Mg2+ बनने के लिए मैग्नीशियम परमाणु दो इलेक्ट्रॉन त्याग सकता है। यद्यपि क्लोरीन परमाणु एक इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके ____________ बनाता है। अब मैग्नीशियम का __________ आयन और क्लोरीन के __________ आयन संयोजित हो कर मैग्नीशियम क्लोराइड बनाते हैं।
उत्तर
पूर्ण वाक्य: “यद्यपि क्लोरीन परमाणु एक इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके क्लोराइड आयन Cl⁻ बनाता है। अब मैग्नीशियम का एक आयन और क्लोरीन के दो आयन संयोजित हो कर मैग्नीशियम क्लोराइड बनाते हैं।”
Mg (2, 8, 2) → Mg²⁺ (2, 8) + 2 e⁻ — दो इलेक्ट्रॉन मुक्त होते हैं
Cl (2, 8, 7) + 1 e⁻ → Cl⁻ (2, 8, 8) — प्रत्येक क्लोरीन केवल एक ले सकता है
अतः दोनों इलेक्ट्रॉन लेने के लिए दो क्लोरीन परमाणु चाहिए :
Mg²⁺ + 2 Cl⁻ → MgCl₂
आवेश जाँच : (+2) + 2(−1) = 0 ✓
ऐसा क्यों होता है: इलेक्ट्रॉन बचे नहीं रह सकते। मैग्नीशियम को ठीक दो इलेक्ट्रॉन देने ही हैं और प्रत्येक क्लोरीन परमाणु में ठीक एक के लिए स्थान है, अतः संख्याएँ 1 : 2 ही होंगी। सूत्र प्राप्त करने के लिए आवेशों का तिर्यक करना वस्तुतः इसी इलेक्ट्रॉन-हिसाब का संक्षिप्त रूप है।
प्र3.
पोटैशियम (K) और कैल्सियम (Ca) परमाणुओं के धनायनों के निर्माण तथा उनके संगत क्लोराइडों के निर्माण को चित्र द्वारा दर्शाइए।
उत्तर
पोटैशियम (Z = 19) : 2, 8, 8, 1। बाह्यतम कोश में एक इलेक्ट्रॉन — उसे त्याग देने पर आर्गन जैसी स्थायी व्यवस्था 2, 8, 8 शेष रह जाती है।
K (2, 8, 8, 1) अपना एकमात्र संयोजकता इलेक्ट्रॉन त्यागकर K⁺ (2, 8, 8) बनाता है, जो एकसंयोजी धनायन है।
कैल्सियम (Z = 20) : 2, 8, 8, 2। बाह्यतम कोश में दो इलेक्ट्रॉन — दोनों त्यागने पर 2, 8, 8 शेष रहता है।
Ca (2, 8, 8, 2) दो संयोजकता इलेक्ट्रॉन त्यागकर Ca²⁺ (2, 8, 8) बनाता है, जो द्विसंयोजी धनायन है।
पोटैशियम क्लोराइड, KCl। पोटैशियम द्वारा त्यागा गया एक इलेक्ट्रॉन एक क्लोरीन परमाणु ग्रहण कर लेता है (2, 8, 7 → 2, 8, 8)।
K⁺ और Cl⁻, जो स्थिर विद्युत आकर्षण द्वारा परस्पर बँधे हैं। एक धनायन के लिए एक ऋणायन, अतः सूत्र KCl है।
कैल्सियम क्लोराइड, CaCl₂। कैल्सियम को दो इलेक्ट्रॉन त्यागने हैं और प्रत्येक क्लोरीन केवल एक ले सकता है — अतः दो क्लोरीन परमाणु चाहिए।
एक Ca²⁺ के साथ दो Cl⁻ आयन। आवेश जाँच : (+2) + 2(−1) = 0, अतः सूत्र CaCl₂ है।
ऐसा क्यों होता है: दोनों धातुएँ सोडियम जैसी ही स्थिति में हैं — एक पूर्ण कोश के ऊपर लगभग खाली बाह्यतम कोश। उसे खाली कर देना ही अष्टक तक पहुँचने का सबसे छोटा मार्ग है। क्लोरीन परमाणु ठीक विपरीत स्थिति में हैं, एक इलेक्ट्रॉन कम, अतः यह स्थानांतरण दोनों पक्षों के अनुकूल है और फिर विपरीत आवेश उन्हें बाँधे रखते हैं।
प्र4.
दर्शाइए कि सोडियम सल्फाइड (Na2S) का निर्माण किस प्रकार होता है?
उत्तर
सोडियम 2, 8, 1 है — एक इलेक्ट्रॉन देने को। सल्फर 2, 8, 6 है — अष्टक से दो इलेक्ट्रॉन कम। चूँकि प्रत्येक सोडियम केवल एक इलेक्ट्रॉन दे सकता है, अतः एक सल्फर परमाणु के लिए दो सोडियम परमाणु चाहिए।
दो सोडियम परमाणु एक-एक इलेक्ट्रॉन एक ही सल्फर परमाणु को स्थानांतरित करते हैं। दोनों Na⁺ आयनों का विन्यास 2, 8 (निऑन जैसा) और S²⁻ का 2, 8, 8 (आर्गन जैसा) हो जाता है।
इसके पश्चात दोनों Na⁺ आयन और S²⁻ आयन विपरीत आवेशों के बीच के स्थिर विद्युत आकर्षण बल से बँधे रहते हैं — यही आयनिक आबंध है। सभी आयनिक यौगिकों की भाँति Na₂S भी पृथक अणु के रूप में नहीं रहता, अपितु त्रिविमीय क्रिस्टल जालक बनाता है; Na₂S उसकी सूत्र इकाई है, अर्थात आयनों का सरलतम पूर्ण संख्या अनुपात।
ऐसा क्यों होता है: Na₂S में पादांक 2 सजावट नहीं है — वह इलेक्ट्रॉनों की गिनती से बाध्य है। सल्फर को दो इलेक्ट्रॉन चाहिए और सोडियम एक-एक ही दे सकता है, अतः अनुपात 2 : 1 ही होगा। इसी तर्क से Na₂O, K₂S और Li₂O बनते हैं।
क्या यह उपयोगी रहा?प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद!त्रुटि बताएँ