कक्षा ९ विज्ञान अध्याय 9 सोचिए और बताइए के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-08

प्र1.
निम्नलिखित के नाम लिखिए। (i) CO2 (ii) NO2 (iii) SF6 (iv) PCl3
उत्तर

ये सभी सहसंयोजी यौगिक हैं, अतः इनका नामकरण उपसर्ग प्रणाली से होता है — प्रथम तत्व का नाम सामान्य रहता है, दूसरे तत्व के अंत में आइड (-ide) लगता है, और उपसर्ग (मोनो-, डाइ-, ट्राइ-, टेट्रा-, पेन्टा-, हेक्सा-) परमाणुओं की संख्या बताते हैं। प्रथम तत्व के लिए मोनो- नहीं लिखा जाता।

सूत्रदूसरे तत्व के परमाणुनाम
(i)CO₂2 ऑक्सीजन → डाइ- + ऑक्साइडकार्बन डाइऑक्साइड
(ii)NO₂2 ऑक्सीजन → डाइ- + ऑक्साइडनाइट्रोजन डाइऑक्साइड
(iii)SF₆6 फ्लुओरीन → हेक्सा- + फ्लुओराइडसल्फर हेक्साफ्लुओराइड
(iv)PCl₃3 क्लोरीन → ट्राइ- + क्लोराइडफॉस्फोरस ट्राइक्लोराइड
ऐसा क्यों होता है: दो तत्व मिलकर एक से अधिक यौगिक बना सकते हैं — CO और CO₂, NO तथा NO₂ और N₂O₄। उपसर्ग ही इन्हें अलग पहचानता है, अतः दूसरे तत्व से उपसर्ग हटाया नहीं जा सकता। यह भी ध्यान दीजिए कि CO कार्बन मोनोक्सॉइड है, मोनोऑक्साइड नहीं : अंग्रेज़ी नाम में जब ‘o’ या ‘a’ पर समाप्त होने वाला उपसर्ग स्वर से आरंभ होने वाले तत्व से मिलता है तब उपसर्ग का अंतिम स्वर छोड़ दिया जाता है।
क्या आप जानते हैं? SF₆ अब तक ज्ञात सबसे प्रबल ग्रीनहाउस गैसों में से एक है और उच्च वोल्टता वाले विद्युत स्विचगियर में विद्युतरोधी गैस के रूप में प्रयुक्त होती है। NO₂ वही लाल-भूरी गैस है जो व्यस्त यातायात चौराहों पर धुँधलापन उत्पन्न करती है।
प्र2.
निम्नलिखित के सूत्र लिखिए। (i) सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट (ii) सल्फर डाइऑक्साइड (iii) फेरिक क्लोराइड (iv) क्यूप्रस ऑक्साइड
उत्तर

तालिका 9.1 के आवेशों के साथ तिर्यक विधि का प्रयोग कीजिए — पहले धनायन लिखिए, प्रतीकों के नीचे आवेश की संख्याएँ लिखिए, उन्हें अदल-बदलकर पादांक बनाइए और फिर उभयनिष्ठ गुणनखंड से भाग दीजिए।

यौगिकआयन / संयोजकतातिर्यकसूत्र
(i)सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेटNa⁺ (1), HCO₃⁻ (1)1 और 1 → दोनों नहीं लिखे जातेNaHCO₃
(ii)सल्फर डाइऑक्साइडS (संयोजकता 4), O (संयोजकता 2)S₂O₄ ÷ 2SO₂
(iii)फेरिक क्लोराइडFe³⁺ (3), Cl⁻ (1)Fe₁Cl₃FeCl₃
(iv)क्यूप्रस ऑक्साइडCu⁺ (1), O²⁻ (2)Cu₂O₁Cu₂O
ऐसा क्यों होता है: तिर्यक विधि कुल धनावेश को कुल ऋणावेश से निरस्त कराने का शीघ्र उपाय है। FeCl₃ में (+3) + 3(−1) = 0; Cu₂O में 2(+1) + (−2) = 0। प्रत्येक आयनिक सूत्र वैद्युत रूप से उदासीन ही निकलना चाहिए।
संकेत: ‘-अस’ (-ous) सदैव कम आवेश और ‘-इक’ (-ic) अधिक आवेश दर्शाता है — क्यूप्रस Cu⁺ है और क्यूप्रिक Cu²⁺; फेरस Fe²⁺ और फेरिक Fe³⁺। इसमें भूल हुई तो पूरा सूत्र बदल जाएगा : क्यूप्रिक ऑक्साइड CuO है, Cu₂O नहीं।
प्र3.
निम्नलिखित आयनों के युग्मों से निर्मित यौगिकों के सूत्र लिखिए— (i) Fe3+ और ‒OH (ii) K+ और CO3 2–
उत्तर

(i) Fe³⁺ और OH⁻ → Fe(OH)₃

आवेश : Fe पर 3+, OH पर 1−
तिर्यक : Fe₁(OH)₃ → Fe(OH)₃ — फेरिक हाइड्रॉक्साइड
आवेश जाँच : (+3) + 3(−1) = 0

यहाँ कोष्ठक आवश्यक हैं क्योंकि तीन हाइड्रॉक्साइड आयन हैं। Fe(OH)₃ का अर्थ है एक आयरन और तीन OH समूह; FeOH₃ लिखने पर गलत अर्थ निकलेगा कि एक O और तीन H हैं।

(ii) K⁺ और CO₃²⁻ → K₂CO₃

आवेश : K पर 1+, CO₃ पर 2−
तिर्यक : K₂(CO₃)₁ → K₂CO₃ — पोटैशियम कार्बोनेट
आवेश जाँच : 2(+1) + (−2) = 0

यहाँ कोष्ठक नहीं लगेंगे, क्योंकि कार्बोनेट आयन केवल एक है। कोष्ठक तभी लगते हैं जब एक ही प्रकार के दो अथवा अधिक बहुपरमाण्विक आयन हों।

ऐसा क्यों होता है: OH⁻ अथवा CO₃²⁻ जैसा बहुपरमाण्विक आयन एक ही इकाई की भाँति व्यवहार करता है — उसके भीतर के परमाणु आपस में सहसंयोजी रूप से जुड़े होते हैं और पूरे समूह पर एक आवेश होता है। अतः तिर्यक करते समय उसे एकल प्रतीक की भाँति ही लीजिए, और कोष्ठक उस इकाई को जोड़े रखने का काम करता है।
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