कक्षा ९ गणित अध्याय 1 पाठ्य प्रश्न के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-08

प्र1.
ध्यान दीजिए, यह केवल तल के मानचित्र को प्रदर्शित करता है। क्या आपने देखा कि क्यों मानचित्र में खिड़कियों की स्थितियों को चिह्नित नहीं किया जा सकता है?
उत्तर

क्योंकि चित्र 1.1 केवल फर्श का मानचित्र है और खिड़की फर्श पर नहीं होती।

फर्श के किसी बिंदु के लिए दो संख्याएँ पर्याप्त हैं — कमरे में कितना आगे, कितना बगल में।
खिड़की के लिए एक तीसरी संख्या भी चाहिए — दीवार पर वह कितनी ऊँचाई पर है।
ऐसा क्यों होता है: शालिनी के पिन और धागों का जाल एक समतल, द्वि-विमीय प्रतिरूप है। फर्श पर दो अक्ष निर्धारित कर देने से केवल दो स्वतंत्र दिशाएँ निश्चित होती हैं — कमरे के अनुदिश और उसके आर-पार। फर्श के प्रत्येक बिंदु को एक पता (x, y) मिल जाता है और वह पता पूर्ण है। ऊँचाई इन दोनों अक्षों पर लंबवत दिशा है, अत: कोई भी युग्म (x, y) उसे अंकित नहीं कर सकता। तल के मानचित्र में खिड़की दीवार की रेखा पर ही सिमट जाएगी और दीवार से अलग नहीं दिखेगी।

द्वार अंकित किए जा सकते हैं, क्योंकि द्वार का रिक्त स्थान फर्श तक आता है और दीवार की रेखा में वास्तविक अंतराल छोड़ता है। खिड़की फर्श के स्तर पर कोई अंतराल नहीं छोड़ती।

संकेत: खिड़कियों को अंकित करने के लिए एक तीसरे अक्ष (ऊँचाई) की आवश्यकता होगी, अर्थात त्रि-विमीय निर्देशांक (x, y, z)। वास्तुकार इसका समाधान एक पृथक उन्नयन (एलिवेशन) रेखाचित्र से करते हैं, जिसके दो अक्ष ‘दीवार के अनुदिश’ और ‘ऊँचाई’ होते हैं। दो समतल रेखाचित्र मिलकर त्रि-विमीय सूचना दे देते हैं।
स्वयं जाँचिए: रियान नीचे की दीवार पर लगे ऊन को छूकर द्वार का अंतराल पहचान लेगा। सोचिए कि जहाँ खिड़की है वहाँ उसे क्या अनुभव होगा — शेष दीवार जैसा ही अटूट धागा।
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