कक्षा ९ गणित अध्याय 8 प्रश्नावली 8.2 के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-08

प्र1.
समानांतर श्रेढ़ी 3, 8, 13, 18, ... के 10वें और 26वें पद ज्ञात कीजिए।
उत्तर

प्रथम पद a = 3; सार्व अंतर d = 8 – 3 = 5 (तथा 13 – 8 = 5, 18 – 13 = 5)।

tn = a + (n – 1)d = 3 + (n – 1) × 5 = 5n – 2
t10 = 5 × 10 – 2 = 48
t26 = 5 × 26 – 2 = 128
ऐसा क्यों होता है: 26वाँ पद 10वें पद से 16 कदम आगे है, अत: वह उससे 16 × 5 = 80 अधिक होना चाहिए। और 48 + 80 = 128 — दोनों उत्तर परस्पर संगत हैं, जो एक ही सूत्र में दो बार मान रखने से अधिक मज़बूत जाँच है।
प्र2.
समानांतर श्रेढ़ी 21, 18, 15, ... का कौन-सा पद – 81 है? साथ ही क्या 0 इस समानांतर श्रेढ़ी का एक पद है? अपने उत्तर के लिए कारण दीजिए।
उत्तर

यहाँ a = 21 और d = 18 – 21 = –3 है, अत: श्रेढ़ी घटती है।

tn = 21 + (n – 1)(–3) = 21 – 3n + 3 = 24 – 3n
24 – 3n = –81
3n = 105
n = 35

अत: –81, 35वाँ पद है। जाँच: 24 – 3 × 35 = 24 – 105 = –81।

क्या 0 एक पद है? 24 – 3n = 0 हल कीजिए।

3n = 24
n = 8

हाँ — 0 इस श्रेढ़ी का पद है, 8वाँ पद, क्योंकि n = 8 प्राकृत संख्या है। पद लिखकर देखिए: 21, 18, 15, 12, 9, 6, 3, 0, –3, …

ऐसा क्यों होता है: इस श्रेढ़ी का प्रत्येक पद 3 का गुणज है (21 गुणज है, और 3 घटाने पर यह गुण बना रहता है)। 0 भी 3 का गुणज है और प्रथम पद से नीचे है, अत: घटती हुई श्रेढ़ी को उस पर पहुँचना ही है — और समीकरण ठीक-ठीक बता देता है कि कहाँ। 10 जैसी संख्या 3 का गुणज नहीं है, अत: 24 – 3n = 10 से n = 14/3 आता, जो कोई स्थिति नहीं है, और 10 कभी नहीं आ सकता।
संकेत: सार्व अंतर का ऋणात्मक होना सामान्य बात है। उल्टा घटाकर d को धनात्मक बनाने का प्रयास मत कीजिए।
प्र3.
समानांतर श्रेढ़ी 11, 8, 5, 2, ... का nवाँ पद ज्ञात कीजिए। इस श्रेढ़ी के लिए पुनरावर्ती सूत्र लिखिए।
उत्तर

a = 11 और d = 8 – 11 = –3 (तथा 5 – 8 = –3, 2 – 5 = –3)।

tn = 11 + (n – 1)(–3)
= 11 – 3n + 3
= 14 – 3n
जाँच: t1 = 11, t2 = 8, t3 = 5, t4 = 2

पुनरावर्ती सूत्र:

t1 = 11,   tn = tn–1 – 3   जहाँ n ≥ 2
ऐसा क्यों होता है: दोनों सूत्र अलग-अलग प्रश्नों के उत्तर देते हैं। "40वाँ पद क्या है?" व्यापक सूत्र का काम है — 14 – 120 = –106, एक ही पंक्ति में। "आगे क्या आएगा?" पुनरावर्ती सूत्र का काम है — 3 घटाइए। दोनों में सामंजस्य होना चाहिए, और है भी: 14 – 3n में से 14 – 3(n – 1) घटाने पर –3 मिलता है, जो ठीक वही कदम है जो पुनरावर्ती सूत्र उठाता है।
प्र4.
एक समानांतर श्रेढ़ी में 50 पद हैं। यदि श्रेढ़ी का तीसरा पद 12 और अंतिम पद 106 है तो इसका 29वाँ पद ज्ञात कीजिए। (संकेत — यदि ‘a’ प्रथम पद हो तथा ‘d’ सार्व अंतर हो, तब हमें दो समीकरण a + 2d = 12 और a + 49d = 106 प्राप्त होता है। रैखिक समीकरणों के इस युग्म को ‘a’ तथा ‘d’ के लिए हल कीजिए।)
उत्तर

दोनों तथ्यों को tn = a + (n – 1)d की सहायता से लिखिए। अंतिम पद 50वाँ है, अत: n = 50 से a + 49d मिलता है।

a + 2d = 12    (1)
a + 49d = 106  (2)

(2) में से (1) घटाइए — इससे a निरस्त हो जाता है:

47d = 94
d = 2
(1) से: a + 4 = 12, अत: a = 8

अब 29वाँ पद:

t29 = a + 28d = 8 + 28 × 2 = 8 + 56 = 64
ऐसा क्यों होता है: कोई भी समानांतर श्रेढ़ी केवल दो संख्याओं, a और d, से पूरी तरह निर्धारित हो जाती है। अत: उसके विषय में कोई भी दो तथ्य a और d में दो रैखिक समीकरण दे देते हैं — और दो चरों वाले रैखिक समीकरणों का युग्म हल करना अध्याय 2 में सीखा जा चुका है। यहाँ घटाना इसलिए सुविधाजनक है, क्योंकि दोनों समीकरणों में a का गुणांक 1 है।
स्वयं जाँचिए: a = 8 और d = 2 से श्रेढ़ी 8, 10, 12, 14, … बनती है। इसका तीसरा पद 12 है और 50वाँ पद 8 + 98 = 106 है।
प्र5.
कितनी 2-अंकीय संख्याएँ 3 से विभाज्य हैं? इन सभी 2-अंकीय संख्याओं का योगफल क्या है?
उत्तर

3 से विभाज्य 2-अंकीय संख्याएँ 12 से 99 तक हैं और वे d = 3 वाली समानांतर श्रेढ़ी बनाती हैं।

12, 15, 18, …, 99
tn = 12 + (n – 1) × 3 = 3n + 9
3n + 9 = 99
3n = 90
n = 30

अत: ऐसी 30 संख्याएँ हैं। योग के लिए अनुभाग 8.5 की तरह सिरों के युग्म बनाइए:

S = 12 + 15 + … + 96 + 99
S = 99 + 96 + … + 15 + 12
2S = 111 + 111 + … + 111  (111 का 30 बार योग)
2S = 30 × 111 = 3330
S = 1665
ऐसा क्यों होता है: अनुभाग 8.5 की उलट-कर-जोड़ने वाली युक्ति वास्तव में केवल 1, 2, 3, … के लिए नहीं थी — वह किसी भी समानांतर श्रेढ़ी पर चलती है, क्योंकि जब एक पंक्ति d से बढ़ती है तो दूसरी d से घटती है, अत: प्रत्येक स्तंभ का योग (प्रथम पद + अंतिम पद) रहता है। यहाँ वह योग 12 + 99 = 111 है और स्तंभ 30 हैं। शब्दों में: योग = (पदों की संख्या) × (प्रथम और अंतिम पद का औसत) = 30 × 55.5 = 1665।
स्वयं जाँचिए: दूसरा रास्ता — ये संख्याएँ 3 × 4, 3 × 5, …, 3 × 33 हैं, अत: योग = 3 × (4 + 5 + … + 33) = 3 × (S33 – S3) = 3 × (561 – 6) = 3 × 555 = 1665।
प्र6.
हरीश ने कोई कार्य (नौकरी) ₹5,00,000 वार्षिक आय से प्रारंभ की और प्रतिवर्ष ₹20,000 वेतन-वृद्धि के रूप में प्राप्त किए। कितने वर्षों के बाद उसकी आमदनी ₹7,00,000 हुई होगी?
उत्तर

उसकी वार्षिक आय समानांतर श्रेढ़ी बनाती है, जिसमें a = ₹5,00,000 और d = ₹20,000 है।

tn = 500000 + (n – 1) × 20000
500000 + (n – 1) × 20000 = 700000
(n – 1) × 20000 = 200000
n – 1 = 10
n = 11

उसकी आय नौकरी के 11वें वर्ष में ₹7,00,000 होती है, अर्थात 10 वर्षों के बाद

ऐसा क्यों होता है: पहले वर्ष में कोई वेतन-वृद्धि नहीं मिलती, अत: वृद्धियों की संख्या सदैव वर्ष-संख्या से एक कम रहती है। (n – 1) = 10 को "10 बार वेतन-वृद्धि हो चुकी है" पढ़ना ही इस प्रश्न का सार है; "11 वर्ष" उत्तर देने पर प्रारंभिक वर्ष भी चुपचाप वृद्धि वाले वर्षों में गिन लिया जाता।
स्वयं जाँचिए: ₹5,00,000 + 10 × ₹20,000 = ₹5,00,000 + ₹2,00,000 = ₹7,00,000।
प्र7.
एक बच्चा कंचों को पंक्तियों में इस प्रकार व्यवस्थित करता है कि पहली पंक्ति में 1 कंचा है, दूसरी पंक्ति में 2 कंचे हैं, तीसरी पंक्ति में 3 कंचे हैं तथा इसी प्रकार से 25वीं पंक्ति तक कंचे रखे गए हैं। बच्चा इनमें कुल कितने कंचों का उपयोग करता है?
उत्तर

कुल संख्या 1 + 2 + 3 + … + 25 है — प्रथम 25 प्राकृत संख्याओं का योग।

S25 = n(n + 1)/2, जहाँ n = 25
= (25 × 26)/2
= 650/2
= 325 कंचे
ऐसा क्यों होता है: यह व्यवस्था चित्र 8.1 की त्रिभुजाकार व्यवस्था ही है, जिसमें 25 पंक्तियाँ हैं, अत: कुल संख्या 25वीं त्रिभुजाकार संख्या है। युग्म बनाकर भी वही उत्तर मिलता है: 1 + 25 = 26, 2 + 24 = 26, …, 12 + 14 = 26 — अर्थात 26 वाले 12 युग्म, और बीच में बची 13 कंचों वाली पंक्ति। अत: 12 × 26 + 13 = 312 + 13 = 325।
संकेत: अंतिम पंक्ति में 25 कंचे हैं, 325 नहीं। प्रश्न कुल संख्या पूछ रहा है, अत: यह योग है, कोई पद नहीं।
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