प्रथम पद a = 3; सार्व अंतर d = 8 – 3 = 5 (तथा 13 – 8 = 5, 18 – 13 = 5)।
t10 = 5 × 10 – 2 = 48
t26 = 5 × 26 – 2 = 128
अद्यतन2026-09-08
प्रथम पद a = 3; सार्व अंतर d = 8 – 3 = 5 (तथा 13 – 8 = 5, 18 – 13 = 5)।
यहाँ a = 21 और d = 18 – 21 = –3 है, अत: श्रेढ़ी घटती है।
अत: –81, 35वाँ पद है। जाँच: 24 – 3 × 35 = 24 – 105 = –81।
क्या 0 एक पद है? 24 – 3n = 0 हल कीजिए।
हाँ — 0 इस श्रेढ़ी का पद है, 8वाँ पद, क्योंकि n = 8 प्राकृत संख्या है। पद लिखकर देखिए: 21, 18, 15, 12, 9, 6, 3, 0, –3, …
a = 11 और d = 8 – 11 = –3 (तथा 5 – 8 = –3, 2 – 5 = –3)।
पुनरावर्ती सूत्र:
दोनों तथ्यों को tn = a + (n – 1)d की सहायता से लिखिए। अंतिम पद 50वाँ है, अत: n = 50 से a + 49d मिलता है।
(2) में से (1) घटाइए — इससे a निरस्त हो जाता है:
अब 29वाँ पद:
3 से विभाज्य 2-अंकीय संख्याएँ 12 से 99 तक हैं और वे d = 3 वाली समानांतर श्रेढ़ी बनाती हैं।
अत: ऐसी 30 संख्याएँ हैं। योग के लिए अनुभाग 8.5 की तरह सिरों के युग्म बनाइए:
उसकी वार्षिक आय समानांतर श्रेढ़ी बनाती है, जिसमें a = ₹5,00,000 और d = ₹20,000 है।
उसकी आय नौकरी के 11वें वर्ष में ₹7,00,000 होती है, अर्थात 10 वर्षों के बाद।
कुल संख्या 1 + 2 + 3 + … + 25 है — प्रथम 25 प्राकृत संख्याओं का योग।