कक्षा ९ गणित अध्याय 8 प्रश्नावली 8.3 के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-08

प्र1.
उस गुणोत्तर श्रेढ़ी का 12वाँ पद ज्ञात कीजिए, जिसका सार्व अनुपात 2 है और 8वाँ पद 192 है।
उत्तर

12वाँ पद 8वें पद से चार कदम आगे है, और प्रत्येक कदम r = 2 से गुणा करता है।

t12 = t8 × 24 = 192 × 16 = 3072

लंबे रास्ते से भी वही उत्तर आता है। t8 = ar7 से:

a × 27 = 192
128a = 192
a = 1.5
t12 = 1.5 × 211 = 1.5 × 2048 = 3072
ऐसा क्यों होता है: गुणोत्तर श्रेढ़ी में tm ÷ tn = rm–n होता है — प्रथम पद निरस्त हो जाता है। अत: एक ही श्रेढ़ी के दो पदों को जोड़ने वाले प्रश्न में a की आवश्यकता ही नहीं पड़ती, इसीलिए छोटा रास्ता चलता है और उसकी गणना भी सुरक्षित रहती है।
प्र2.
गुणोत्तर श्रेढ़ी 5, 25, 125, ... का 10वाँ पद तथा nवाँ पद ज्ञात कीजिए।
उत्तर

a = 5 और r = 25 ÷ 5 = 5 (तथा 125 ÷ 25 = 5)।

tn = arn–1 = 5 × 5n–1 = 5n
t10 = 510 = 97,65,625

पुस्तक के पदों पर सूत्र की जाँच: t1 = 51 = 5, t2 = 52 = 25, t3 = 53 = 125।

ऐसा क्यों होता है: यहाँ संयोगवश प्रथम पद और सार्व अनुपात दोनों 5 हैं, अत: घातांक नियम am × ak = am+k से 5 × 5n–1 सिमटकर एक ही घात 5n बन जाता है। यह इसी श्रेढ़ी की विशेषता है, कोई व्यापक नियम नहीं — 3, 6, 12, … का nवाँ पद 3 × 2n–1 ही रहता है और उसे और छोटा नहीं किया जा सकता।
स्वयं जाँचिए: 510 = (55)2 = 31252 = 97,65,625।
प्र3.
एक अनुक्रम का पुनरावर्ती सूत्र t1 = 2, tn+1 = 3tn – 2, जबकि n ≥ 1 है। इस अनुक्रम का कौन-सा पद 730 है?
उत्तर

पद बनाते जाइए जब तक 730 न आ जाए।

t1 = 2
t2 = 3 × 2 – 2 = 4
t3 = 3 × 4 – 2 = 10
t4 = 3 × 10 – 2 = 28
t5 = 3 × 28 – 2 = 82
t6 = 3 × 82 – 2 = 244
t7 = 3 × 244 – 2 = 730

अत: 730 इस अनुक्रम का 7वाँ पद है।

बिना सूची बनाए भी यह देखा जा सकता है। प्रत्येक पद में से 1 घटाइए: 1, 3, 9, 27, 81, 243, 729 — 3 की घातों की गुणोत्तर श्रेढ़ी।

यदि un = tn – 1 हो, तो
un+1 = tn+1 – 1 = (3tn – 2) – 1 = 3(tn – 1) = 3un
जहाँ u1 = 1, अत: un = 3n–1
इसलिए tn = 3n–1 + 1
3n–1 + 1 = 730 → 3n–1 = 729 = 36 → n – 1 = 6 → n = 7
ऐसा क्यों होता है: सूत्र tn+1 = 3tn – 2 अपने रूप में गुणोत्तर श्रेढ़ी नहीं है, क्योंकि उसमें "– 2" है। किंतु प्रत्येक पद को 1 नीचे खिसकाने पर वह अचर हट जाता है और शुद्ध तिगुना करना बचता है — सूत्र का स्थिर बिंदु x = 3x – 2, अर्थात x = 1 है, और उसी बिंदु से मापने पर अनुक्रम गुणोत्तर श्रेढ़ी बन जाता है। इस पहचान से सूची बनाने वाला प्रश्न एक पंक्ति के समीकरण में बदल जाता है, और यदि प्रश्न 30वें पद के विषय में होता तो यही एकमात्र व्यावहारिक विधि होती।
प्र4.
गुणोत्तर श्रेढ़ी 2, 6, 18, ... का कौन-सा पद 4374 है? इस श्रेढ़ी के nवें पद के लिए मानक सूत्र और पुनरावर्ती सूत्र भी लिखिए।
उत्तर

a = 2 और r = 6 ÷ 2 = 3 (तथा 18 ÷ 6 = 3)।

व्यापक सूत्र: tn = 2 × 3n–1
पुनरावर्ती सूत्र: t1 = 2, tn = 3 × tn–1, जहाँ n ≥ 2

अब tn = 4374 हल कीजिए:

2 × 3n–1 = 4374
3n–1 = 2187
37 = 2187, अत: n – 1 = 7
n = 8

अत: 4374 इस श्रेढ़ी का 8वाँ पद है। जाँच: 2 × 37 = 2 × 2187 = 4374।

ऐसा क्यों होता है: गुणोत्तर श्रेढ़ी में अज्ञात स्थिति घातांक में बैठी होती है, अत: अंतिम कदम भाग नहीं, घातों का मिलान है: 2187 को 37 पहचानना पड़ता है। 3 की घातें नीचे से बनाइए — 3, 9, 27, 81, 243, 729, 2187 — और गिन लीजिए। यदि 4374, 3 की किसी घात का दुगुना न होता, तो वह इस श्रेढ़ी का पद ही नहीं होता।
प्र5.
एक गेंद को 80 मीटर की ऊँचाई से गिराया जाता है। भूमि से टकराने के बाद गेंद अपनी प्रारंभिक ऊँचाई के 60 प्रतिशत तक भूमि के ऊपर जाती है। इसी प्रकार से गेंद की उछाल जारी रहती है अर्थात प्रत्येक बार गेंद भूमि से टकराकर अपनी पिछली ऊँचाई के 60 प्रतिशत तक ऊपर जाती है। (i) 5 उछालों के बाद गेंद कितनी ऊँचाई तक जाती है? (ii) गेंद द्वारा भूमि से छठी बार टकराने तक तय की गई कुल लंबवत दूरी कितनी है?
उत्तर

अधिकतम ऊँचाइयाँ r = 60% = 0.6 वाली गुणोत्तर श्रेढ़ी बनाती हैं, जो 80 मी. की गिरावट से प्रारंभ होती है।

पहली उछाल के बाद: 80 × 0.6 = 48 मी.
दूसरी उछाल के बाद: 48 × 0.6 = 28.8 मी.
तीसरी उछाल के बाद: 28.8 × 0.6 = 17.28 मी.
चौथी उछाल के बाद: 17.28 × 0.6 = 10.368 मी.
पाँचवीं उछाल के बाद: 10.368 × 0.6 = 6.2208 मी.

(i) 5 उछालों के बाद गेंद 6.2208 मी. (लगभग 6.22 मी.) ऊँचाई तक जाती है। सीधे: 80 × (0.6)5 = 80 × 0.07776 = 6.2208 मी.।

(ii) यात्राओं को ध्यान से गिनिए। गेंद पहले 80 मी. गिरती है, फिर प्रत्येक उछाल में उतनी ही ऊपर जाकर उतनी ही नीचे आती है, और भूमि से छठी बार टकराना पाँचवीं उछाल के बाद वाली गिरावट पर होता है।

चरणदूरी
पहली गिरावट80 मी.
उछाल 1 के बाद ऊपर और नीचे2 × 48 = 96 मी.
उछाल 2 के बाद2 × 28.8 = 57.6 मी.
उछाल 3 के बाद2 × 17.28 = 34.56 मी.
उछाल 4 के बाद2 × 10.368 = 20.736 मी.
उछाल 5 के बाद (छठी बार टकराने तक)2 × 6.2208 = 12.4416 मी.
कुल = 80 + 2 × (48 + 28.8 + 17.28 + 10.368 + 6.2208)
= 80 + 2 × 110.6688
= 80 + 221.3376
= 301.3376 मी. (लगभग 301.34 मी.)
ऐसा क्यों होता है: ऊँचाइयाँ गुणोत्तर श्रेढ़ी बनाती हैं, किंतु तय की गई दूरी उसका कोई एक पद नहीं है — वह एक योग है, और पहली गिरावट के बाद प्रत्येक चढ़ाई के साथ उतनी ही लंबी गिरावट भी जुड़ी है। इसीलिए पाँचों अधिकतम ऊँचाइयाँ दुगुनी की जाती हैं जबकि प्रारंभिक 80 मी. केवल एक बार गिनी जाती है। यहाँ सामान्य भूल गिनती की होती है: छठी टक्कर केवल 5 उछालों के बाद आती है।
संकेत: 60 प्रतिशत का अर्थ r = 0.6 है, अत: गेंद प्रत्येक बार अपनी ऊँचाई का 40 प्रतिशत खो देती है। 5 उछालों के बाद प्रारंभिक ऊँचाई का केवल (0.6)5 ≈ 7.8 प्रतिशत ही बचता है।
प्र6.
अनुक्रम 2, 2√2, 4, ... का कौन-सा पद 128 है?
उत्तर

पहले अनुपात लेकर जाँचिए कि यह गुणोत्तर श्रेढ़ी है।

2√2 ÷ 2 = √2
4 ÷ 2√2 = 2/√2 = √2
अनुपात अचर है, अत: a = 2 और r = √2

अब √2 = 21/2 का उपयोग करके प्रत्येक पद को 2 की घात के रूप में लिखिए:

tn = 2 × (√2)n–1 = 21 × 2(n–1)/2 = 2(n+1)/2
128 = 27
अत: (n + 1)/2 = 7
n + 1 = 14
n = 13

128 इस अनुक्रम का 13वाँ पद है। जाँच: t13 = 2 × (√2)12 = 2 × 26 = 2 × 64 = 128।

ऐसा क्यों होता है: अनुक्रम है 2, 2√2, 4, 4√2, 8, 8√2, 16, … — पूर्ण संख्याएँ केवल प्रत्येक दूसरे कदम पर दुगुनी होती हैं, क्योंकि √2 से दो बार गुणा करना 2 से एक बार गुणा करने के बराबर है। करणी को घात 21/2 के रूप में लिख देने से कठिन दिखने वाला अनुक्रम 2 की सीधी घातें बन जाता है, और फिर घातांकों का मिलान एक ही पंक्ति में काम पूरा कर देता है।
स्वयं जाँचिए: पूर्ण संख्या वाले पद विषम स्थितियों पर आते हैं — t1 = 2, t3 = 4, t5 = 8, t7 = 16, t9 = 32, t11 = 64, t13 = 128।
प्र7.
चित्र 8.12 में सिएरपिंस्की वर्ग कारपेट के चरण 0 से चरण 3 तक प्रदर्शित हैं। इस फ्रैक्टल का चरण 0 कागज का एक वर्गाकार पत्रक है। चरण 1 की रचना करने के लिए वर्ग की प्रत्येक भुजा को तीन समान भागों में बाँटा गया है और सम्मुख भुजाओं के त्रिविभाजक बिंदुओं को मिलाने पर नौ छोटे वर्ग प्राप्त होते हैं। तत्पश्चात मध्य में स्थित वर्ग को हटा दिया जाता है और 8 छोटे वर्गों के मध्य एक वर्गाकार रिक्ति शेष रह जाती है। यही प्रक्रिया आठ छोटे छायांकित वर्गों पर दोहराई जाती है, जिससे चरण 2 प्राप्त होता है और आगे भी यही प्रक्रिया जारी रहती है। चित्र 8.12 को देखिए और नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर देने का प्रयास कीजिए। (i) चरण 0 से 3 तक कितने लाल वर्ग हैं? (ii) क्या आप चरण 4 से 5 में लाल वर्गों की संख्या का पूर्वानुमान लगा सकते हैं? (iii) क्या आप nवें चरण में लाल वर्गों की संख्या के लिए सूत्र ज्ञात कर सकते हैं? किसी भी चरण में लाल वर्गों की संख्या के लिए एक व्यापक सूत्र और पुनरावर्ती सूत्र भी लिखिए। (iv) मान लीजिए चरण 0 में वर्ग का क्षेत्रफल 1 वर्ग इकाई है। चरण 1, 2 और 3 में लाल क्षेत्र का क्षेत्रफल क्या है? चरण 4 और 5 में लाल क्षेत्र का क्षेत्रफल कितना होगा? nवें चरण में लाल क्षेत्र के क्षेत्रफल के लिए व्यापक सूत्र और पुनरावर्ती सूत्र भी ज्ञात कीजिए। चरण संख्या n बढ़ने के साथ इस क्षेत्रफल में क्या अंतर आता है?
उत्तर

प्रत्येक लाल वर्ग नौ छोटे वर्गों में बँटता है, जिनमें से 8 रखे जाते हैं — अत: संख्या और क्षेत्रफल दोनों एक ही क्रिया से नियंत्रित होते हैं।

रचना का एक चरण: 9 बराबर वर्ग, बीच वाला हटाया गया, 8 शेष — अत: संख्या 8 से और क्षेत्रफल 8/9 से गुणा होता है।

(i) चित्र 8.12 में लाल वर्ग गिनिए:

चरण 0: 1    चरण 1: 8    चरण 2: 8 × 8 = 64    चरण 3: 64 × 8 = 512

(ii)

चरण 4: 512 × 8 = 4096    चरण 5: 4096 × 8 = 32768

(iii) संख्याएँ 1, 8, 64, 512, … सार्व अनुपात 8 वाली गुणोत्तर श्रेढ़ी हैं, और ये 8 की वे घातें हैं जिनका घातांक चरण-संख्या के बराबर है।

व्यापक सूत्र: tn = 8n
पुनरावर्ती सूत्र: t0 = 1, tn = 8 × tn–1, जहाँ n ≥ 1

(iv) नौ छोटे वर्गों में से प्रत्येक का क्षेत्रफल मूल वर्ग का 1/9 है और उनमें से 8 रखे जाते हैं, अत: प्रत्येक चरण में लाल क्षेत्रफल 8/9 से गुणा हो जाता है।

चरण 1: 8/9 ≈ 0.8889
चरण 2: (8/9)2 = 64/81 ≈ 0.7901
चरण 3: (8/9)3 = 512/729 ≈ 0.7023
चरण 4: (8/9)4 = 4096/6561 ≈ 0.6243
चरण 5: (8/9)5 = 32768/59049 ≈ 0.5549
व्यापक सूत्र: sn = (8/9)n वर्ग इकाई
पुनरावर्ती सूत्र: s0 = 1, sn = (8/9) × sn–1, जहाँ n ≥ 1

चूँकि 8/9, 1 से छोटा है, क्षेत्रफल प्रत्येक चरण में घटता है और n के बढ़ने पर 0 की ओर जाता है, यद्यपि वह वास्तव में कभी 0 नहीं होता।

ऐसा क्यों होता है: यह सिएरपिंस्की त्रिभुज वाला ही तर्क है, केवल संख्याएँ बदली हैं। भुजाओं के त्रिविभाजन से 3 × 3 = 9 सर्वांगसम वर्ग बनते हैं, अत: प्रत्येक का क्षेत्रफल मूल का 1/9 है; उनमें से 8 रखने पर क्षेत्रफल का 8 × (1/9) = 8/9 भाग बचता है, जबकि टुकड़ों की संख्या 8 गुनी हो जाती है। चूँकि 8/9, त्रिभुज के 3/4 की तुलना में 1 के अधिक निकट है, कारपेट का क्षेत्रफल धीमे घटता है — किंतु घटता अवश्य है, और 8n, 3n से कहीं आगे निकल जाता है। फ्रैक्टल की यही पहचान है: टुकड़े अधिक से अधिक, क्षेत्रफल कम से कम।
स्वयं जाँचिए: चरण n पर 8n लाल वर्ग हैं, प्रत्येक का क्षेत्रफल (1/9)n। उनका योग 8n × (1/9)n = (8/9)n — दोनों सूत्र आपस में मेल खाते हैं।
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