प्र1.
चरण संख्या बढ़ने के साथ काले त्रिभुजों की संख्या अत्यंत तीव्रता से बढ़ती है। क्या आप व्याख्या कर सकते हैं कि ऐसा क्यों है?
उत्तर
क्योंकि वृद्धि गुणा से हो रही है, जोड़ से नहीं। प्रत्येक काला त्रिभुज अगले चरण में तीन बन जाता है, अत: पूरी संख्या हर बार तिगुनी हो जाती है।
tn = 3 × tn–1 से tn = 3n
चरण 5: 243 चरण 10: 59,049 चरण 15: 1,43,48,907
चरण 5: 243 चरण 10: 59,049 चरण 15: 1,43,48,907
अब इसकी तुलना चित्र 8.3 की समानांतर श्रेढ़ी से कीजिए, जहाँ प्रत्येक चरण में नियत 4 जुड़ते हैं:
| चरण n | 5 | 10 | 15 |
|---|---|---|---|
| AP: 4n – 3 | 17 | 37 | 57 |
| GP: 3n | 243 | 59,049 | 1,43,48,907 |
ऐसा क्यों होता है: जब कोई राशि जोड़ से बढ़ती है, तो प्रत्येक कदम उतनी ही नियत मात्रा देता है, चाहे राशि कितनी भी बड़ी हो चुकी हो। जब वह गुणा से बढ़ती है, तो प्रत्येक कदम पहले से उपस्थित राशि के समानुपाती मात्रा देता है — राशि जितनी बड़ी, अगली छलाँग उतनी बड़ी। 3n में स्थिति n घातांक में है, और n में 1 की वृद्धि पूरे उत्तर को 3 से गुणा कर देती है। यही चक्रवृद्धि संख्या को भगा ले जाती है।
क्या आप जानते हैं? इसी कारण नियत दर पर चक्रवृद्धि ब्याज पर्याप्त समय बीतने पर नियत राशि वाले साधारण ब्याज से आगे निकल जाता है।