कक्षा ९ गणित अध्याय 8 पाठ्य प्रश्न के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-08

प्र1.
प्रश्न — सूत्र un = 2n – 1 का उपयोग करते हुए, विषम संख्या अनुक्रम के 53वें, 108वें तथा 1170वें पद को ज्ञात कीजिए?
उत्तर

स्थिति संख्या सीधे सूत्र में रखिए।

u53 = 2 × 53 – 1 = 106 – 1 = 105
u108 = 2 × 108 – 1 = 216 – 1 = 215
u1170 = 2 × 1170 – 1 = 2340 – 1 = 2339
ऐसा क्यों होता है: विषम संख्याएँ सम संख्याओं से एक कम होती हैं। nवीं सम संख्या 2n है, अत: nवीं विषम संख्या 2n – 1 है। यहाँ कहीं भी पिछले पदों को जानने की आवश्यकता नहीं पड़ी — व्यापक सूत्र का यही लाभ है, और इसी कारण 1170वाँ पद निकालना 53वें पद जितना ही सरल है।
स्वयं जाँचिए: 105, 215 और 2339 तीनों विषम हैं, और प्रत्येक अपनी स्थिति के दुगुने से एक कम है।
प्र2.
प्रारंभिक दस अभाज्य संख्याओं का अनुक्रम — 2, 3, 5, 7, 11, 13, 17, 19, 23, 29 है। क्या आप इस अनुक्रम में कोई प्रतिरूप देखते हैं? क्या आप किसी सूत्र पर विचार कर सकते हैं, जिससे अगली कुछ अभाज्य संख्याओं का पूर्वानुमान लगाया जा सके?
उत्तर

कुछ विशेषताएँ अवश्य दिखती हैं, किंतु अगला पद बताने वाला कोई सूत्र नहीं है। अंतर देखिए:

2, 3, 5, 7, 11, 13, 17, 19, 23, 29
अंतर: 1, 2, 2, 4, 2, 4, 2, 4, 6

अंतर किसी अचर मान पर नहीं ठहरते (अत: यह समानांतर श्रेढ़ी नहीं है), और अनुपात 3/2, 5/3, 7/5, … भी अचर नहीं हैं (अत: गुणोत्तर श्रेढ़ी भी नहीं है)। आगामी अभाज्य संख्याएँ — 31, 37, 41, 43, 47 — विभाज्यता की जाँच से ज्ञात करनी पड़ती हैं, किसी सूत्र से नहीं।

जो बातें निश्चित रूप से कही जा सकती हैं:

  • 2 एकमात्र सम अभाज्य संख्या है; इसके बाद की सभी अभाज्य संख्याएँ विषम हैं।
  • 2 और 3 को छोड़कर प्रत्येक अभाज्य संख्या 6 के किसी गुणज से 1 अधिक या 1 कम होती है।
  • अभाज्य संख्याएँ कभी समाप्त नहीं होतीं — वे अपरिमित हैं।
ऐसा क्यों होता है: अभाज्य संख्या की परिभाषा बताती है कि वह क्या नहीं है — उसका 1 और स्वयं के अतिरिक्त कोई भाजक नहीं है। यह शर्त उससे छोटी सभी संख्याओं के विषय में है, न कि पिछले पद से आगे बढ़ने की कोई विधि। अत: परिभाषा एक अभाज्य से अगली अभाज्य तक पहुँचने का कोई रास्ता नहीं देती, और यही कारण है कि अभाज्य संख्याओं का कोई व्यापक या पुनरावर्ती सूत्र ज्ञात नहीं है। पुस्तक भी इसी को ऐसे अनुक्रम का उदाहरण बताती है, जिसके नियम में कोई नियमितता नहीं है।
क्या आप जानते हैं? अभाज्य संख्याओं के बीच के अंतर कितने भी बड़े हो सकते हैं — 100! के आगे कहीं ऐसी 99 क्रमागत संख्याएँ मिलती हैं, जिनमें एक भी अभाज्य नहीं है।
प्र3.
प्रश्न — व्यंजक tn = 3n – 7 पर विचार कीजिए। (i) इस अनुक्रम का पहला, दूसरा, तीसरा, 12वाँ, 18वाँ और 50वाँ पद ज्ञात कीजिए। (ii) अनुक्रम का कौन-सा पद 332 है? (iii) क्या 557 इस अनुक्रम का कोई पद है? क्यों या क्यों नहीं?
उत्तर

(i) प्रत्येक स्थिति को tn = 3n – 7 में रखिए।

t1 = 3 – 7 = –4    t2 = 6 – 7 = –1    t3 = 9 – 7 = 2
t12 = 36 – 7 = 29    t18 = 54 – 7 = 47    t50 = 150 – 7 = 143

(ii) tn = 332 हल कीजिए।

3n – 7 = 332
3n = 339
n = 113

अत: 332 इस अनुक्रम का 113वाँ पद है।

(iii) उसी प्रकार tn = 557 हल कीजिए।

3n – 7 = 557
3n = 564
n = 564 ÷ 3 = 188

188 प्राकृत संख्या है, अत: हाँ — 557 इस अनुक्रम का पद है, 188वाँ पद। जाँच: 3 × 188 – 7 = 564 – 7 = 557।

ऐसा क्यों होता है: इस अनुक्रम का प्रत्येक पद 3 के किसी गुणज से 7 कम है, अत: कोई संख्या k तभी पद होगी जब k + 7, 3 से विभाज्य हो — अर्थात जब k को 3 से भाग देने पर शेषफल 2 आए। 332 और 557 दोनों यह जाँच पास करते हैं (332 = 3 × 110 + 2 तथा 557 = 3 × 185 + 2), अत: दोनों पद हैं। 558 जैसी संख्या, जिसका शेषफल 0 है, कितना भी आगे बढ़ने पर कभी नहीं आएगी।
संकेत: "क्यों या क्यों नहीं" वाला प्रश्न वास्तव में जाँच माँगता है, केवल निर्णय नहीं। यहाँ जाँच यह है: क्या समीकरण 3n – 7 = k से n प्राकृत संख्या मिलती है?
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