प्र1.
क्या आप अन्य परिमित अनुक्रमों पर विचार कर सकते हैं, जिन्हें आप अपने दैनिक जीवन में देखते हैं?
उत्तर
हाँ — परिमित अनुक्रम वह क्रमिक सूची है, जो कहीं समाप्त हो जाती है, और दैनिक जीवन ऐसे अनुक्रमों से भरा है।
- टी-20 पारी के ओवर: 1, 2, 3, …, 20।
- प्रचलन में भारतीय नोट: 10, 20, 50, 100, 200, 500।
- किसी विद्यार्थी के छह विषयों के अंक, अंकपत्र के क्रम में लिखे हुए।
- वर्ष 2026 के बारह महीनों में दिनों की संख्या: 31, 28, 31, 30, 31, 30, 31, 31, 30, 31, 30, 31।
- सीढ़ियों की एक उड़ान की सीढ़ियाँ नीचे से ऊपर तक क्रम में, या रेलवे स्टेशन के प्लेटफ़ॉर्म नंबर।
ऐसा क्यों होता है: किसी सूची को अनुक्रम बनने के लिए दो शर्तें पूरी करनी होती हैं — वस्तुएँ निश्चित क्रम में हों, और प्रत्येक वस्तु की एक स्थिति संख्या हो। दुकान में बिखरी हुई कीमतें अनुक्रम नहीं हैं; वही कीमतें सस्ते से महँगे के क्रम में लिखी जाएँ तो अनुक्रम बन जाती हैं। अनुक्रम परिमित तभी है जब स्थितियों की यह सूची समाप्त हो जाए, जैसे 20वें ओवर पर या 12वें महीने पर।
संकेत: तीन बिंदु … ही परिमित और अपरिमित अनुक्रम को अलग करते हैं। 6, 12, 24, 48, 96 में पाँच पद हैं और यह समाप्त हो जाता है; 6, 12, 24, 48, 96, … कभी समाप्त नहीं होता।