कक्षा ९ संस्कृत अध्याय 1 आकाङ्क्षाविधिः के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-08

प्र१.
खण्डान्वय में प्रश्न किस क्रम से पूछे जाते हैं?
उत्तर

सबसे पहला प्रश्न सदा क्रियापद का होता है। पुस्तक कहती है — ‘अतः एषः विधिः आकाङ्क्षाविधिः इत्यपि उच्यते। अत्र प्रश्नेषु प्रथमतः क्रियापदेन आकाङ्क्षाप्रश्नः क्रियते।’

पुस्तक का छोटा उदाहरण —सा विद्यालयं गच्छति इति वाक्ये क्रियापदं किम् इति प्रश्नः भवति। तस्य उत्तरं ‘गच्छति’ इति। तदनन्तरं क्रियाम् अनुसृत्य कर्तुः कर्मणः तृतीयादिविभक्त्यन्तानां क्त्वान्तल्यबन्तानाम् अव्ययादीनां च विषये आकाङ्क्षां कृत्वा प्रश्नाः क्रियन्ते। छात्राः विचिन्त्य उत्तराणि वदिष्यन्ति।’

क्रमकिसके विषय में आकाङ्क्षाप्रश्न‘सा विद्यालयं गच्छति’ पर
क्रियापदम्क्रियापदं किम् ?गच्छति
कर्ताकः / का गच्छति ?सा गच्छति
कर्मकिं / कुत्र गच्छति ?सा विद्यालयं गच्छति
तृतीयादि विभक्त्यन्त पदकेन ? कस्मै ? कस्मात् ? कस्य ? कस्मिन् ?इस वाक्य में नहीं है
क्त्वान्त / ल्यबन्त पदकिं कृत्वा ? किं गत्वा ?इस वाक्य में नहीं है
अव्यय आदिकथम् ? कदा ? किमर्थम् ?इस वाक्य में नहीं है

प्रश्न कितने बड़े हों — ‘खण्डान्वयविधौ प्रश्नाः सामान्यतया द्विपदात्मकाः त्रिपदात्मकाः चतुष्पदात्मकाः वा भवितुमर्हन्ति। तन्नाम लघुप्रश्नाः भवन्ति।’ — अर्थात् प्रश्न दो, तीन या चार पदों के छोटे-छोटे होने चाहिए, जैसे ‘कः उपैति ?’ (दो पद), ‘कीदृशः घटः उपैति ?’ (तीन पद), ‘अर्धः घटः किम् उपैति ?’ (चार पद)।

क्रिया से ही क्यों शुरू करें: संस्कृत वाक्य का केन्द्र क्रिया है — कर्ता, कर्म, करण, सम्प्रदान, सब उसी से जुड़ते हैं। क्रिया मिल जाने पर बाकी प्रश्न अपने-आप बन जाते हैं (‘करोति’ मिला तो ‘कः ?’ और ‘किम् ?’ स्वयं उठेंगे)। यदि पहले कर्ता खोजें तो पता ही नहीं चलेगा कि उससे क्या पूछना है। इसीलिए स्मृति-श्लोक भी कहता है — कर्तृ-कर्म-क्रियाः पहले जोड़ो, ततः परं तृतीयादि।
प्र२.
‘किम्’ शब्द के कौन-कौन से रूप प्रश्न बनाने में काम आते हैं?
उत्तर

स्मृति-श्लोक का आदेश है — ‘किमो रूपं पुरस्कृत्य तृतीयादीनि योजयेत्’। नीचे वही पूरी सूची है, विभक्ति-सहित। यह याद कर लेने पर किसी भी श्लोक का खण्डान्वय स्वयं किया जा सकता है।

प्रश्न-पदविभक्ति / कारकक्या ढूँढ़ता हैउदाहरण (परिशिष्ट के श्लोकों से)
कः / का / किम्प्रथमा — कर्ताक्रिया करने वालाकः न करोति ? — सम्पूर्णकुम्भः
कम् / काम् / किम्द्वितीया — कर्मजिस पर क्रिया होकिं न करोति ? — शब्दम्
केनतृतीया — करणसाधनकेन न करोति ? — नाममात्रेण
कस्मैचतुर्थी — सम्प्रदानजिसके लिएकस्मै ददाति ?
कस्मात् / कुतःपञ्चमी — अपादानजिससे अलग होनाकस्मात् पतति ?
कस्य / केषाम्षष्ठी — सम्बन्धकिसकाकेषाम् अरोगं करोति ? — आतुराणाम्
कस्मिन् / कुत्रसप्तमी — अधिकरणकहाँकुत्र पुष्पं विकसति ? — गगने
कीदृशः / कीदृशी / कीदृशम्विशेषणकैसाकीदृशः घटः ? — अर्धः
कथम्क्रियाविशेषणकिस प्रकारकथम् उपैति ? — नूनम्
कदाकालवाचककबकदा पठति ?
किमर्थम् / किं निमित्तम्प्रयोजनकिसलिएकिमर्थं पठति ?
किं कृत्वाक्त्वान्त / ल्यबन्तपहले क्या करकेकिं कृत्वा मूर्खाः भवन्ति ? — शास्त्राणि अधीत्य
अभ्यास के लिए (स्वयं करें) — ये प्रश्न पुस्तक में नहीं हैं — परिशिष्ट पर शारदा कोई अभ्यास नहीं देती; ये केवल स्वयं जाँच के लिए हैं।
  1. ‘बालिका उद्याने पुष्पाणि पश्यति’ — इस वाक्य पर खण्डान्वय के तीन प्रश्न बनाइए तथा उत्तर लिखिए।
    उत्तर — क्रियापदं किम् ? — पश्यति। का पश्यति ? — बालिका पश्यति। कुत्र किं पश्यति ? — बालिका उद्याने पुष्पाणि पश्यति।
  2. ‘छात्रः लेखन्या पत्रं लिखति’ — इसमें ‘लेखन्या’ पद को खींचने वाला प्रश्न कौन-सा है?
    उत्तर — केन लिखति ? — ‘लेखनी’ करण है, अतः तृतीया; तृतीया का प्रश्न ‘केन ?’ है।
  3. पुस्तक के अनुसार खण्डान्वय के प्रश्न कितने पदों के होने चाहिए?
    उत्तर — ‘द्विपदात्मकाः त्रिपदात्मकाः चतुष्पदात्मकाः वा’ — अर्थात् दो, तीन या चार पदों के लघु प्रश्न।
क्या यह उपयोगी रहा? त्रुटि बताएँ