श्लोकः (पृष्ठ 165) —
विद्वान् कुलीनो न करोति गर्वमल्पो जनो जल्पति साट्टहासम् ॥
पदच्छेदः (पुस्तक के शब्दों में, अठारह पद) — सम्पूर्णकुम्भः, न, करोति, शब्दम्, अर्धः, घटः, घोषम्, उपैति, नूनम्, विद्वान्, कुलीनः, न, करोति, गर्वम्, अल्पः, जनः, जल्पति, साट्टहासम्।
सन्धि-विच्छेद, जिससे पदच्छेद बना —
| श्लोक में | विच्छेद | सन्धि |
|---|---|---|
| सम्पूर्णकुम्भो न | सम्पूर्णकुम्भः + न | विसर्ग सन्धि (उत्व) |
| शब्दमर्धो घटो | शब्दम् + अर्धः + घटः | म्-सन्धि + विसर्ग सन्धि |
| घोषमुपैति | घोषम् + उपैति | म्-सन्धि (उप + एति = उपैति — वृद्धि सन्धि) |
| कुलीनो न | कुलीनः + न | विसर्ग सन्धि |
| गर्वमल्पो जनो | गर्वम् + अल्पः + जनः | म्-सन्धि + विसर्ग सन्धि |
| साट्टहासम् | स (सह) + अट्टहासम् | अट्टहास-सहित — यहाँ क्रियाविशेषण |