श्लोक (पृष्ठ 162, जैसा पुस्तक में छपा है) —
सुचिन्तितं चौषधमातुराणां न नाममात्रेण करोत्यरोगम् ॥
पदच्छेदः (पुस्तक के अपने क्रम में, उन्नीस पद) — नीचे की संख्याएँ केवल गिनती की हैं; अन्वय का क्रम अलग है, वह अगले-अगले कार्ड में (पृष्ठ 163 की संख्या-सूची में) दिया गया है।
| गणना | पदम् | क्या है | हिन्दी अर्थ |
|---|---|---|---|
| १ | शास्त्राणि | नपुं., द्वितीया बहुवचन (कर्म) | शास्त्रों को |
| २ | अधीत्य | ल्यबन्त अव्यय (अधि+इ) | पढ़कर |
| ३ | अपि | अव्यय | भी |
| ४ | भवन्ति | भू, लट्, प्रथमपुरुष बहुवचन | होते हैं |
| ५ | मूर्खाः | पुं., प्रथमा बहुवचन | मूर्ख |
| ६ | यः | यद् शब्द, प्रथमा एकवचन | जो |
| ७ | तु | अव्यय | परन्तु / ही |
| ८ | क्रियावान् | मतुप्-प्रत्ययान्त विशेषण, प्रथमा एकवचन | कर्मशील, आचरण करने वाला |
| ९ | पुरुषः | पुं., प्रथमा एकवचन | पुरुष |
| १० | सः | तद् शब्द, प्रथमा एकवचन | वह |
| ११ | विद्वान् | विद्वस् शब्द, प्रथमा एकवचन | विद्वान् |
| १२ | सुचिन्तितम् | ‘औषधम्’ का विशेषण — नपुं., प्रथमा एकवचन | भली-भाँति सोची-समझी हुई |
| १३ | च | अव्यय | और |
| १४ | औषधम् | नपुं., प्रथमा एकवचन (कर्ता) | औषधि |
| १५ | आतुराणाम् | पुं., षष्ठी बहुवचन | रोगियों को / रोगियों का |
| १६ | न | निषेधार्थक अव्यय | नहीं |
| १७ | नाममात्रेण | नपुं., तृतीया एकवचन | केवल नाम लेने से |
| १८ | करोति | कृ, लट्, प्रथमपुरुष एकवचन | करती है |
| १९ | अरोगम् | विशेषण, द्वितीया एकवचन | नीरोग |