कक्षा ९ संस्कृत अध्याय 1 खण्डान्वयविधिः के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-08

प्र१.
खण्डान्वय किसे कहते हैं, और पुस्तक ने उसके नियम किन श्लोकों में दिए हैं?
उत्तर

परिभाषा — पुस्तक कहती है — ‘खण्डशः अन्वयः खण्डान्वयः इति। तन्नाम आरम्भे एव श्लोकस्य पूर्णभागस्य अन्वयः न क्रियते अपि तु प्रतिपदं परस्परम् अन्वयः क्रियते। तदपि प्रश्नोत्तरमाध्यमेन। अन्ते समग्रस्य श्लोकस्य अन्वयः स्वयमेव भविष्यति।’ — अर्थात् आरम्भ में ही पूरे श्लोक का अन्वय नहीं किया जाता; एक-एक पद जोड़ा जाता है, वह भी प्रश्नोत्तर के द्वारा — और अन्त में पूरा अन्वय अपने आप बन जाता है।

नियम-श्लोक (पृष्ठ 163, दो श्लोक) —

कर्तृ-कर्म-क्रियास्तावच्छ्लोके योज्यास्ततः परम् ।
किमो रूपं पुरस्कृत्य तृतीयादीनि योजयेत् ॥

ल्यबन्तञ्च तुमुन्तञ्च क्त्वान्तं कर्मविभूषितम् ।
अन्वयस्थपदानाञ्च यथा लिङ्गविशेषणे ॥

चारों पंक्तियों का अर्थ —

पंक्तिअर्थव्यवहार
कर्तृ-कर्म-क्रियास्तावत् श्लोके योज्याःपहले श्लोक में कर्ता, कर्म और क्रिया — ये तीन जोड़िए‘करोति’ → ‘सम्पूर्णकुम्भः’ → ‘शब्दम्’
ततः परं किमो रूपं पुरस्कृत्य तृतीयादीनि योजयेत्उसके बाद ‘किम्’ शब्द के रूपों (कः, किम्, केन, कस्मै, कस्मात्, कस्य, कस्मिन्, कीदृशः, कथम्…) को आगे रखकर, अर्थात् उन्हीं प्रश्नों से, तृतीया आदि विभक्ति वाले पद जोड़िए‘कथम् उपैति ?’ → ‘नूनम्’
ल्यबन्तञ्च तुमुन्तञ्च क्त्वान्तं कर्मविभूषितम्ल्यबन्त (आगत्य), तुमुन्नन्त (गन्तुम्) तथा क्त्वान्त (गत्वा) पदों को उनके कर्म-सहित जोड़िए‘शास्त्राणि अधीत्य’ — कर्म ‘शास्त्राणि’ ल्यबन्त के साथ ही
अन्वयस्थपदानाञ्च यथा लिङ्गविशेषणेअन्वय में रखे पदों का लिङ्ग तथा विशेषण जैसा उपयुक्त हो, वैसा (विशेष्य के अनुसार) रखिए‘अर्धः घटः’ — दोनों पुंलिङ्ग, प्रथमा, एकवचन
‘किमो रूपं पुरस्कृत्य’ यही विधि का हृदय है: ‘किमः’ अर्थात् ‘किम्’ शब्द का। ‘किम्’ के रूप ही प्रश्न-शब्द हैं — कः, कम्, केन, कस्मै, कस्मात्, कस्य, कस्मिन्, तथा उससे बने कीदृशः, कथम्, कदा, कुत्र, किमर्थम्। हर विभक्ति का अपना प्रश्न है — और हर प्रश्न ठीक उसी विभक्ति का पद खींच लाता है। इसीलिए इस विधि का दूसरा नाम आकाङ्क्षाविधिः है।
प्र२.
दण्डान्वय और खण्डान्वय — कब कौन-सा प्रयोग करें?
उत्तर

दोनों एक ही मंज़िल तक ले जाते हैं, रास्ता अलग है।

बिन्दुदण्डान्वयविधिःखण्डान्वयविधिः
व्युत्पत्तिदण्डवत् अन्वयःखण्डशः अन्वयः
प्रक्रियापूरे श्लोक का अन्वय एक साथ लिखा जाता है‘प्रतिपदं परस्परम् अन्वयः क्रियते’ — पद-दर-पद
माध्यमलेखनप्रश्नोत्तर संवाद
इकाईपूरा श्लोकएक-एक चरण (प्रथमचरणे, द्वितीयचरणे…)
नियम-श्लोकआद्ये विशेषणं योज्यम्… (एक श्लोक)कर्तृ-कर्म-क्रियास्तावत्… (दो श्लोक)
उपयोगउत्तर लिखते समय — अन्तिम रूप यही होता हैसमझते-सिखाते समय — कक्षा में तथा स्वयं सोचते हुए
पुस्तक का उदाहरणशास्त्राण्यधीत्यापि… (पृष्ठ 162–163)सम्पूर्णकुम्भो न करोति… (पृष्ठ 165–166)
परीक्षा की दृष्टि से: ‘अन्वयं कुरुत’ पूछे जाने पर उत्तर-पुस्तिका में दण्डान्वय ही लिखिए — एक सीधी पंक्ति में, कोष्ठक-सहित। खण्डान्वय की तालिका उत्तर नहीं, सोचने की सीढ़ी है; उसे मन-ही-मन चढ़िए और अन्तिम पंक्ति कागज़ पर लिखिए।
अभ्यास के लिए (स्वयं करें) — ये प्रश्न पुस्तक में नहीं हैं — परिशिष्ट पर शारदा कोई अभ्यास नहीं देती; ये केवल स्वयं जाँच के लिए हैं।
  1. ‘किमो रूपं पुरस्कृत्य तृतीयादीनि योजयेत्’ — इस पंक्ति के अनुसार बताइए कि निम्न विभक्तियों के लिए कौन-सा प्रश्न पूछा जाएगा : (क) तृतीया (ख) चतुर्थी (ग) पञ्चमी (घ) षष्ठी (ङ) सप्तमी।
    उत्तर — (क) केन ? (ख) कस्मै ? (ग) कस्मात् ? (घ) कस्य ? (ङ) कस्मिन् ? / कुत्र ?
  2. ‘बालकः पुस्तकालयं गत्वा पुस्तकं पठति’ — इस वाक्य में ल्यबन्त/क्त्वान्त पद तथा उसका कर्म पहचानकर लिखिए कि नियम-श्लोक की तीसरी पंक्ति यहाँ कैसे लगती है।
    उत्तर — क्त्वान्त पद ‘गत्वा’ है और उसका कर्म ‘पुस्तकालयम्’ है। ‘क्त्वान्तं कर्मविभूषितम्’ के अनुसार दोनों साथ रखे जाते हैं — पुस्तकालयं गत्वा — फिर मुख्य वाक्य : बालकः पुस्तकालयं गत्वा पुस्तकं पठति।
  3. रिक्तस्थान भरिए — खण्डान्वयविधि का दूसरा नाम ______ है, क्योंकि इसमें प्रश्न ______ के अनुसार पूछे जाते हैं।
    उत्तर — आकाङ्क्षाविधिः ; आकाङ्क्षा। (पुस्तक — ‘अतः एषः विधिः आकाङ्क्षाविधिः इत्यपि उच्यते’, ‘खण्डान्वयविधौ आकाङ्क्षानुगुणं प्रश्नाः भवन्ति’।)
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