प्र१.
पाँचों लकारों के परस्मैपद तथा आत्मनेपद प्रत्यय एक साथ कैसे याद करें?
उत्तर
सीधा उत्तर — परिशिष्ट की अट्ठाईस तालिकाओं में जो कुछ बदलता है वह अङ्ग है; प्रत्यय केवल दस समूहों के हैं — पाँच लकार × दो पद। इन्हें एक बार देख लेने पर हर तालिका अपने आप पढ़ी जाने लगती है।
ध्यान दें — नीचे की यह सारणी पुस्तक में छपी हुई नहीं है। यह ऊपर दी गई पुस्तक की अपनी तालिकाओं से निकाली गई है, ताकि सब कुछ एक दृष्टि में आ जाए। पुस्तक स्वयं केवल पूरे रूप देती है, प्रत्यय अलग से नहीं गिनाती।
| लकारः | पदम् | प्रथमपुरुषः (एक./द्वि./बहु.) | मध्यमपुरुषः | उत्तमपुरुषः |
|---|---|---|---|---|
| लट् | परस्मैपद | ति · तः · अन्ति | सि · थः · थ | मि · वः · मः |
| लट् | आत्मनेपद | ते · एते · अन्ते | से · एथे · ध्वे | ए · आवहे · आमहे |
| लृट् | परस्मैपद | स्यति · स्यतः · स्यन्ति | स्यसि · स्यथः · स्यथ | स्यामि · स्यावः · स्यामः |
| लृट् | आत्मनेपद | स्यते · स्येते · स्यन्ते | स्यसे · स्येथे · स्यध्वे | स्ये · स्यावहे · स्यामहे |
| लङ् | परस्मैपद | त् · ताम् · अन् | स् (→ विसर्ग) · तम् · त | अम् · व · म |
| लङ् | आत्मनेपद | त · एताम् · अन्त | थाः · एथाम् · ध्वम् | इ/ए · आवहि · आमहि |
| लोट् | परस्मैपद | तु/तात् · ताम् · अन्तु | — /तात् · तम् · त | आनि · आव · आम |
| लोट् | आत्मनेपद | ताम् · एताम् · अन्ताम् | स्व · एथाम् · ध्वम् | ऐ · आवहै · आमहै |
| विधिलिङ् | परस्मैपद | एत् · एताम् · एयुः | एः · एतम् · एत | एयम् · एव · एम |
| विधिलिङ् | आत्मनेपद | एत · एयाताम् · एरन् | एथाः · एयाथाम् · एध्वम् | एय · एवहि · एमहि |
दो जगह ‘एक से अधिक रूप’ क्यों लिखे हैं: (क) लङ् आत्मनेपद उत्तमपुरुष एकवचन में प्रत्यय ‘इ’ है, पर भ्वादि जैसे अ-कारान्त अङ्ग में वह अङ्ग के ‘अ’ से मिलकर ‘ए’ बन जाता है — इसीलिए अवर्धे, अलभे पर अशयि, अभुञ्जि। (ख) लोट् परस्मैपद में ‘तु/तात्’ तथा मध्यमपुरुष एकवचन में ‘शून्य/तात्’ — दोनों विकल्प शुद्ध हैं। शेष सब खाने एक ही रूप के हैं।
अङ्ग बनाम प्रत्यय — एक उदाहरण से पूरी बात —
प्रत्यय अन्ते (लट्, आत्मनेपद, प्रथमपुरुष बहुवचन) सब जगह वही है, अङ्ग बदलता है :
वर्ध् + अन्ते = वर्धन्ते · लभ् + अन्ते = लभन्ते · शी + अन्ते = शेरते (न् → र्) · भुञ्ज् + अन्ते = भुञ्जते (अ लुप्त)
प्रत्यय अन्ते (लट्, आत्मनेपद, प्रथमपुरुष बहुवचन) सब जगह वही है, अङ्ग बदलता है :
वर्ध् + अन्ते = वर्धन्ते · लभ् + अन्ते = लभन्ते · शी + अन्ते = शेरते (न् → र्) · भुञ्ज् + अन्ते = भुञ्जते (अ लुप्त)