प्र1.
मान लीजिए आप अपने विद्यालय से घर तक साइकिल चलाकर जाते हैं। आपको विद्यालय से घर तक पहुँचने में लगने वाले समय पर एक मॉडल तैयार करना है। आप अपने मॉडल में किन विवरणों को सम्मिलित करेंगे और किन विवरणों को अनदेखा करेंगे? सुझाव दीजिए कि कुछ विवरणों को अनदेखा करना वास्तव में क्यों उपयोगी हो सकता है।
उत्तर
मॉडल को केवल एक संख्या निकालनी है — समय t। अतः हर वह राशि रखिए जो t को एक-दो मिनट से अधिक बदलती है, शेष छोड़ दीजिए।
| सम्मिलित कीजिए | समय पर प्रभाव | अनदेखा कीजिए |
|---|---|---|
| विद्यालय से घर की दूरी | t इसके समानुपाती बढ़ता है | साइकिल का रंग व बनावट |
| आपकी औसत चाल | t इसके व्युत्क्रमानुपाती है | आपने क्या पहन रखा है |
| रुकावटों की संख्या व अवधि (सिग्नल, फाटक) | कुछ मिनट सीधे जुड़ जाते हैं | सड़क का हर गड्ढा अलग-अलग |
| सड़क की ढाल, तेज़ सामने की हवा | औसत चाल 10–20% तक बदल देती है | मन में बजते गीत |
3 km की दूरी, 12 km h⁻¹ की औसत चाल तथा लगभग 90 s वाले दो सिग्नल मानकर बनाया गया मॉडल —
चलने का समय = दूरी ÷ औसत चाल
= 3 km ÷ 12 km h⁻¹ = 0.25 h = 15 मिनट
रुकने का समय = 2 × 90 s = 180 s = 3 मिनट
कुल समय t = 15 मिनट + 3 मिनट = 18 मिनट
= 3 km ÷ 12 km h⁻¹ = 0.25 h = 15 मिनट
रुकने का समय = 2 × 90 s = 180 s = 3 मिनट
कुल समय t = 15 मिनट + 3 मिनट = 18 मिनट
विवरण अनदेखा करना क्यों उपयोगी है: तीन कारण, और तीनों महत्त्वपूर्ण हैं।
- जो बचा है, उसे वास्तव में मापा जा सकता है। दूरी और औसत चाल ओडोमीटर तथा घड़ी से ज्ञात की जा सकती हैं। सड़क के हर मीटर पर हवा कितनी थी, यह नहीं। जिस मॉडल के लिए अमाप्य आँकड़े चाहिए, वह कोई उत्तर देता ही नहीं।
- छोड़े गए विवरणों का प्रभाव दैनिक उतार-चढ़ाव से भी छोटा है। आपका अपना समय ही प्रतिदिन दो-तीन मिनट बदलता रहता है। जो विवरण उत्तर को दस सेकंड बदलता है, वह इसी उतार-चढ़ाव में दब जाएगा।
- सरल मॉडल का परीक्षण और सुधार संभव है। एक सप्ताह अपना समय नापिए। यदि वास्तविक समय सदैव 22 मिनट आता है, 18 नहीं, तो एक ही बात गलत है — प्रायः मानी गई चाल — और उसे सुधारा जा सकता है। बीस राशियों वाले मॉडल में यह पता ही न चलता कि दोष किसका है।
यह कीजिए: अवकाश के दिन, जब यातायात न हो, उसी मार्ग पर जाइए। यदि समय घटकर लगभग 15 मिनट रह जाए तो मॉडल का ‘रुकावट’ वाला पद सत्यापित हो गया। यही तो है — मॉडल का प्रेक्षण से परीक्षण, ठीक वैसे ही जैसे वैज्ञानिक करते हैं।