प्र1.
हम पूर्वानुमान किस प्रकार लगाएँ? वर्षा ने अपनी सहेली मेघना को बताया, “आज दोपहर में वर्षा होगी क्योंकि बादल काले दिखाई दे रहे हैं।” उन प्रश्नों के विषय में सोचिए जो मेघना द्वारा वर्षा से पूछे जा सकते हैं जिससे इस पूर्वानुमान को वैज्ञानिक रूप से परीक्षण योग्य बनाया जा सके।
उत्तर
मेघना को ऐसे प्रश्न पूछने चाहिए जो मापन योग्य प्रमाण और पिछले पैटर्न माँगें — जिनके उत्तर संख्याएँ हों, विचार नहीं।
- “जब पिछली बार वर्षा हुई थी तो आकाश की स्थिति क्या थी?”
- “आज आर्द्रता का स्तर कितना है? क्या विगत समय में यह 80 प्रतिशत थी?”
- “आज वायु की गति और दिशा क्या है?”
- “क्या तापमान वैसे ही कम हो गया है जैसा हाल की वर्षा से पूर्व हुआ था?”
- “पिछले एक माह में कितनी बार काले बादल दिखे और तीन घंटे के भीतर वर्षा भी हुई?”
साथ ही मेघना को कथन को ही अधिक स्पष्ट कराना चाहिए, जिससे बाद में उसकी जाँच हो सके —
अस्पष्ट: “आज दोपहर में वर्षा होगी।”
परीक्षण योग्य: “आज यहाँ दोपहर 2 बजे से शाम 6 बजे के बीच मापन योग्य वर्षा होगी।”
परीक्षण योग्य: “आज यहाँ दोपहर 2 बजे से शाम 6 बजे के बीच मापन योग्य वर्षा होगी।”
ऐसा क्यों है: जिन प्रश्नों का उत्तर केवल हाँ या ना में होता है (“क्या बादल काले हैं?”) वे बहुत उपयोगी नहीं होते, क्योंकि उनका उत्तर तो वर्षा के कथन में पहले से ही है और वह अच्छे पूर्वानुमान को संयोग से अलग नहीं कर पाता। काले बादल एक वास्तविक संकेत अवश्य हैं — इनका अर्थ है मोटे, जल से भरे बादल — परंतु ये अकेले पर्याप्त नहीं; काले बादल प्रायः बिना बरसे निकल भी जाते हैं। परीक्षण योग्य पूर्वानुमान के लिए एक मापन योग्य राशि (आर्द्रता, तापमान की प्रवृत्ति, वायु), एक स्थान व समय-सीमा, और तुलना के लिए पिछला रिकॉर्ड — तीनों चाहिए। तभी मेघना बाद में ईमानदारी से कह सकेगी कि पूर्वानुमान सही निकला या नहीं।
संकेत: यही तीन बातें — मापन योग्य राशि, निश्चित समय-सीमा और जाँच के लिए रिकॉर्ड — किसी भी रोज़मर्रा के दावे (“यह बस सदैव देर से आती है”, “यह साबुन अधिक चलता है”) को वास्तव में परखने योग्य बना देती हैं।