कक्षा ९ विज्ञान अध्याय 1 सोचिए और बताइए के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-08

प्र1.
उस पूर्वानुमान के विषय में विचार कीजिए जो वर्तमान में आपने या आपके परिवार के किसी सदस्य ने किया हो (जैसे — क्रिकेट मैच के परिणाम का पूर्वानुमान)। क्या यह पूर्वानुमान प्रमाणों और तर्कों पर आधारित था या मात्र अनुमान पर? विचार कीजिए कि वैज्ञानिक सोच किस प्रकार से ऐसे पूर्वानुमानों में सुधार ला सकती है?
उत्तर

किसी भी पूर्वानुमान को एक ही कसौटी पर परखिए — क्या कोई दूसरा व्यक्ति उन्हीं आँकड़ों से इसकी जाँच कर सकता है? यदि हाँ, तो वह प्रमाणों पर आधारित है; यदि वह केवल मन की बात है, तो मात्र अनुमान है।

नमूना उत्तर: एक दिवसीय मैच से पहले मेरे चाचा ने कहा, “भारत जीतेगा, इस मैदान पर तो सदैव जीतता ही है।” यह कुछ हद तक प्रमाण था, पर अधिकतर अनुमान। इसमें एक वास्तविक पैटर्न (घरेलू मैदान का रिकॉर्ड) तो था, परंतु पिच की स्थिति, खिलाड़ियों की चोट और कौन-सी टीम बाद में बल्लेबाज़ी कर रही है — इन सबकी उपेक्षा थी।

वैज्ञानिक सोच इस पूर्वानुमान को चार चरणों में सुधारती है —

  1. इसे ऐसे कहिए कि यह गलत सिद्ध हो सके। “भारत जीतेगा” परीक्षण योग्य है। “भारत अच्छा खेलेगा” नहीं, क्योंकि यह कब असफल हुआ, इस पर कोई सहमति नहीं बन सकती।
  2. महत्त्वपूर्ण राशियाँ पहचानिए। उस मैदान का जीत-रिकॉर्ड, पहली पारी का औसत स्कोर, सूर्यास्त के बाद ओस, आरंभिक गेंदबाज़ों का औसत।
  3. स्मृति नहीं, पिछले आँकड़े लीजिए। यदि उस मैदान के पिछले 20 मैचों में से 13 बार बाद में बल्लेबाज़ी करने वाली टीम जीती है, तो यह मापा हुआ 65% है — “सदैव जीतता है” से कहीं बेहतर आधार।
  4. परिणाम जाँचिए और सुधार कीजिए। यदि पूर्वानुमान बार-बार असफल होता है तो उसके पीछे की धारणा गलत है; उसे बदलना चाहिए, उसका बचाव नहीं करना चाहिए।
ऐसा क्यों है: कोई पूर्वानुमान इसलिए वैज्ञानिक नहीं होता कि वह सही निकला, अपितु इसलिए कि वह मापन योग्य राशियों से बना है और गलत सिद्ध किया जा सकता है। संयोग से सही निकला अनुमान कुछ नहीं सिखाता, क्योंकि यह पता ही नहीं चलता कि तर्क का कौन-सा भाग काम आया। इसके विपरीत, असफल हुआ तर्कयुक्त पूर्वानुमान वास्तव में उपयोगी है — वह सीधे उस धारणा की ओर संकेत करता है जिसमें सुधार चाहिए। वैज्ञानिक असफल पूर्वानुमानों का उपयोग ठीक इसी प्रकार करते हैं।
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