प्र1.
एक चार सदस्यीय परिवार के लिए एक माह में कितना चावल पर्याप्त होगा?
उत्तर
लगभग 70–80 kg कच्चा चावल — इस जानबूझकर मानी गई धारणा के अंतर्गत कि परिवार की संपूर्ण ऊर्जा केवल चावल से ही आती है।
एक वयस्क को प्रतिदिन ≈ 2000 – 2500 kcal, मान लीजिए 2250 kcal
चार सदस्यों का परिवार ≈ 4 × 2250 kcal ≈ 9000 kcal प्रतिदिन
100 g पका हुआ चावल लगभग 130 kcal ऊर्जा देता है
प्रतिदिन पका चावल = 9000 kcal ÷ (130 kcal / 100 g)
= 9000 ÷ 1.3 g ≈ 6900 g ≈ 6.9 kg प्रतिदिन
एक माह में = 6.9 kg × 30 ≈ 208 kg पका हुआ चावल
पकने पर चावल का द्रव्यमान लगभग 2.7 गुना हो जाता है
अतः कच्चा चावल ≈ 208 ÷ 2.7 = लगभग 77 kg
चार सदस्यों का परिवार ≈ 4 × 2250 kcal ≈ 9000 kcal प्रतिदिन
100 g पका हुआ चावल लगभग 130 kcal ऊर्जा देता है
प्रतिदिन पका चावल = 9000 kcal ÷ (130 kcal / 100 g)
= 9000 ÷ 1.3 g ≈ 6900 g ≈ 6.9 kg प्रतिदिन
एक माह में = 6.9 kg × 30 ≈ 208 kg पका हुआ चावल
पकने पर चावल का द्रव्यमान लगभग 2.7 गुना हो जाता है
अतः कच्चा चावल ≈ 208 ÷ 2.7 = लगभग 77 kg
अब वही कीजिए जो बॉक्स वास्तव में कहता है — जाँचिए कि उत्तर का कोई सही अर्थ बनता है या नहीं —
- एक माह के लिए 100 g तो स्पष्टतः बहुत कम है (यह तो एक छोटा भोजन भर है)।
- कुछ टन बहुत अधिक है (एक टन चावल एक छोटे कमरे को भर देगा)।
- 77 kg बाज़ार में मिलने वाली 50 kg की लगभग डेढ़ बोरी है — इतना चावल एक परिवार रख भी सकता है और एक माह में समाप्त भी कर सकता है। अनुमान उचित है।
ऐसा क्यों होता है: उत्तर वास्तविक परिवार की खरीद से लगभग दुगुना आता है, और यह त्रुटि नहीं — यह हमारी धारणा स्वयं दिखा रही है। वास्तविक भोजन में दाल, तेल, सब्ज़ी और दूध भी होते हैं; अकेले तेल में लगभग 900 kcal प्रति 100 g होती है। जब 9000 kcal में से केवल एक भाग चावल से आना है, तो चावल घटकर लगभग 35–40 kg प्रति माह रह जाता है, जो वास्तविक खपत के काफ़ी निकट है। अनुमान का मूल्य यही है — वह सटीक होने के लिए नहीं होता, पर वह बता देता है कि उत्तर किलोग्रामों की दहाई में है, और जिस धारणा से वह निकला है उसे स्पष्ट करके सुधारने योग्य बना देता है।
स्वयं जाँचिए: चावल के पैकेट पर छपा कैलोरी-मान और अपने घर के सदस्यों की संख्या लेकर ऊपर की पंक्तियाँ दोहराइए। यदि आपका उत्तर 30 kg से 100 kg प्रति माह के बीच कहीं आता है तो आपका तर्क सही है — सटीक संख्या कभी उद्देश्य थी ही नहीं।