प्र1.
सोशल मीडिया पर तीव्र गति से फैलने वाले (वायरल) दावों की जाँच — क्या ग्रहण के समय भोजन करना हानिकारक है?
उत्तर
नहीं। यह दावा उसी क्षण टूट जाता है जब आप पूछते हैं कि ग्रहण भोजन में आखिर कौन-सा भौतिक परिवर्तन करता है।
बॉक्स में सुझाए गए सरल वैज्ञानिक प्रश्न एक-एक करके पूछिए —
| प्रश्न | प्रमाण से मिला उत्तर |
|---|---|
| भौतिक रूप से ग्रहण है क्या? | केवल छायाओं का खेल — चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के एक भाग के बीच आ जाता है |
| क्या ताप में कोई महत्त्वपूर्ण परिवर्तन आता है? | कुछ मिनटों के लिए ताप कुछ °C घटता है, फिर लौट आता है — सूर्यास्त से भी कम परिवर्तन |
| क्या छाया में रखा भोजन खराब हो जाता है? | नहीं। पेड़ की छाया में रखने से भोजन खराब नहीं होता |
| क्या कोई नया विकिरण उत्पन्न होता है? | कोई नहीं। धरती पर सूर्य का प्रकाश कम पहुँचता है, अधिक नहीं |
ऐसा क्यों है: भोजन खराब होने का एक ही कारण है — सूक्ष्मजीवों की वृद्धि, जिसे ऊष्मा, नमी और समय बढ़ाते हैं। ग्रहण इनमें से किसी को नहीं बदलता; ताप में जो थोड़ी कमी आती है वह उल्टे सूक्ष्मजीवों को कुछ धीमा ही करती है। अतः ऐसा कोई भौतिक, रासायनिक या जैविक प्रमाण नहीं है जिससे ग्रहण भोजन को हानिकारक बना सके। यह दावा प्रमाण से नहीं, इस कारण टिका हुआ है कि ग्रहण एक विरल और नाटकीय घटना है और लोग स्वाभाविक रूप से उसे अपने आस-पास की हर बात से जोड़ लेते हैं।
संकेत: किसी भी वायरल दावे पर यही तीन प्रश्न लगाइए — (1) दावा ठीक-ठीक क्या है, मापन योग्य शब्दों में? (2) इसे उत्पन्न करने वाली क्रियाविधि क्या हो सकती है? (3) कौन-से आँकड़े इसे दिखाएँगे? जो दावा तीनों पर असफल हो, वह ‘अप्रमाणित’ नहीं, निराधार है।