कक्षा ९ विज्ञान अध्याय 1 आइए, और आगे बढ़ें के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-08

प्र1.
मास्क वास्तव में किस प्रकार कार्य करता है?
उत्तर

छानकर नहीं। मास्क इसलिए कार्य करता है क्योंकि कणों को किसी रेशे से टकराकर चिपकने पर विवश किया जाता है, और तीन भिन्न आमाप के कणों के लिए तीन भिन्न क्रियाविधियाँ यह कार्य करती हैं।

1. संघट्ट (जड़त्व से टकराव) भारी बूँदें (5 – 100 µm) इतनी भारी होती हैं कि मुड़ती हुई वायु का साथ नहीं दे पातीं और सीधे रेशे से टकरा जाती हैं। 2. अवरोधन (छूकर रुक जाना) मध्यम आमाप का कण (लगभग 1 µm) वायु के साथ मुड़ तो जाता है, पर इतना पास से निकलता है कि रेशे को छूकर रुक जाता है। 3. विसरण (टेढ़ी-मेढ़ी गति) अत्यंत सूक्ष्म कण (0.1 µm से छोटे) वायु के अणुओं की टक्करों से इधर-उधर भटकते हुए कुछ ही परतों में किसी रेशे पर जा लगते हैं।
धूसर वृत्त मास्क के एक-एक रेशे के अनुप्रस्थ काट हैं। मास्क ऐसे हज़ारों रेशों का घना जाल है, अतः जो कण एक परत से बच निकलता है उसे आगे अनेक परतें मिलती हैं।

अब वे शाखाएँ, ठीक जैसी बॉक्स में सूचीबद्ध हैं —

  • भौतिकी — कणीय गति व वैद्युत् स्थैतिक आकर्षण। बीच की मेल्ट-ब्लोन परत पर स्थायी आवेश होता है, जो उदासीन कणों में भी आवेश प्रेरित करके उन्हें खींच लेता है।
  • रसायन — बहुलक रेशों के गुणधर्म। पॉलिप्रोपिलीन इसलिए चुना जाता है कि वह अध्रुवीय है, जल को दूर रखता है और महीनों तक स्थिर आवेश धारण किए रहता है।
  • जीव विज्ञान — विषाणु की आमाप और प्रकृति। विषाणु लगभग 0.1 µm का होता है, परंतु वह अकेला नहीं चलता — वह 1 – 100 µm की श्वसन-बूँदों में सवार रहता है, जिन्हें पकड़ना कहीं सरल है।
  • गणित — वायुप्रवाह और निस्यंदन दक्षता का प्रतिरूपण। प्रत्येक परत एक निश्चित अंश रोकती है, अतः दक्षताएँ जुड़ती नहीं, गुणा होती हैं।
यदि एक परत 60% कण रोके तो 0.4 अंश निकल जाता है
ऐसी तीन परतों से निकलेगा = 0.4 × 0.4 × 0.4 = 0.064
कुल दक्षता = 1 − 0.064 = 93.6%
ऐसा क्यों होता है: मास्क के रेशों के बीच के अंतराल दसियों माइक्रोमीटर चौड़े होते हैं — विषाणु से सैकड़ों गुना बड़े। अतः यदि मास्क छलनी होता तो वह बिल्कुल निरर्थक होता। वह छलनी नहीं, जाल है। संघट्ट बड़े कणों को पकड़ता है और विसरण अत्यंत सूक्ष्म कणों को, अतः सबसे कठिन कण लगभग 0.3 µm वाले रह जाते हैं — इतने हल्के नहीं कि रेशे से टकरा जाएँ, इतने भारी नहीं कि भटककर उस पर जा लगें। इसी आमाप को सर्वाधिक भेदी कण-आमाप कहते हैं, और मास्क के मानक इसी पर जानबूझकर परखे जाते हैं — जो मास्क अपनी सबसे कठिन आमाप पर खरा उतरे, वह शेष सभी आमापों पर उससे बेहतर ही करेगा।
संकेत: इसी से यह भी स्पष्ट होता है कि मास्क का ठीक बैठना क्यों आवश्यक है। नाक या गालों के पास से निकलने वाली वायु किसी रेशे से मिलती ही नहीं, अतः ऊपर निकाली गई 93.6% दक्षता ढह जाती है। निस्यंदन दक्षता पदार्थ का गुण बताती है; ढीला पहना गया मास्क उस गुण का उपयोग ही नहीं करता।
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