प्र1.
आवृत्ति को प्रत्येक बार 100 Hz बढ़ाते हुए 1000 Hz तक ले जाइए और वर्णन कीजिए कि ध्वनि किस प्रकार परिवर्तित होती है?
उत्तर
जैसे-जैसे आवृत्ति 100 Hz से 1000 Hz तक बढ़ती है, ध्वनि क्रमशः तीक्ष्ण होती जाती है — तारत्व बढ़ता जाता है — जबकि प्रबलता की सेटिंग को छुआ तक नहीं गया।
| निर्धारित आवृत्ति | कैसी सुनाई देती है | वायु में तरंगदैर्घ्य (v = 344 m s⁻¹) |
|---|---|---|
| 100 Hz | गहरी, गुंजार जैसी, मानो दूर का इंजन | 344 ÷ 100 = 3.44 m |
| 300 Hz | भरी हुई, पुरुष की गंभीर वाणी जैसी | 344 ÷ 300 = 1.15 m |
| 600 Hz | उजली, स्पष्ट | 344 ÷ 600 = 0.57 m |
| 1000 Hz | पतली, कर्णभेदी, सीटी जैसी | 344 ÷ 1000 = 0.34 m |
तारत्व क्यों बढ़ता है: तारत्व आवृत्ति का मस्तिष्क द्वारा किया गया बोध है। अधिक आवृत्ति का अर्थ है कि आपके कर्णपटल पर वायु का घनत्व प्रति सेकंड अधिक बार अधिकतम से न्यूनतम और वापस झूलता है, और कान इसे तीक्ष्ण ध्वनि के रूप में पढ़ता है। सामान्यतः उच्च तारत्व उच्च आवृत्ति के साथ और कम तारत्व कम आवृत्ति के साथ चलता है, यद्यपि सटीक संबंध सरल नहीं है। ध्यान दीजिए कि ध्वनि की चाल भर 344 m s⁻¹ बनी रहती है — घटता तो तरंगदैर्घ्य है, क्योंकि λ = v/ν।
संकेत: आवृत्ति बदलते समय प्रबलता कुछ बदली-सी लग सकती है। इसका दोष ऐप्प का नहीं — मानव कान स्वाभाविक रूप से लगभग 1000 – 4000 Hz के बीच सर्वाधिक सुग्राही होता है, अतः समान ऊर्जा की ध्वनियाँ समान प्रबल नहीं लगतीं।