प्र1.
ऐसा स्थान जहाँ कोई माध्यम (द्रव्य) नहीं होता उसे निर्वात (vacuum) कहा जाता है। क्या आप निर्वात में ध्वनि सुन पाएंगे?
उत्तर
नहीं। निर्वात में ध्वनि नहीं सुनी जा सकती, क्योंकि कणों के बिना ध्वनि तरंग के संचरण का कोई साधन नहीं है।
इसका प्रमाण है निर्वात बेलजार प्रयोग (चित्र 10.7):
- बंद बेलजार में रखी विद्युत घंटी का स्विच ऑन किया जाता है — ध्वनि प्रबल सुनाई देती है।
- निर्वात पंप से धीरे-धीरे वायु निकाली जाती है। ध्वनि क्रमशः धीमी होती जाती है।
- लगभग निर्वात की स्थिति में घंटी को बजते हुए देखा तो जा सकता है पर ध्वनि सुनाई नहीं देती।
- वायु पुनः प्रविष्ट कराने पर ध्वनि लौट आती है और धीरे-धीरे पूर्व जितनी प्रबल हो जाती है।
ऐसा क्यों होता है: संपीडन वह क्षेत्र है जहाँ कण पास-पास आ गए हों। जार में जितने कम कण बचेंगे, इस निकटता को आगे बढ़ाने वाले संघट्ट भी उतने ही कम होंगे, अतः जार की दीवार और आपके कान तक उत्तरोत्तर कम ऊर्जा पहुँचेगी। कण बिल्कुल न हों तो संपीडित करने और आगे बढ़ाने को कुछ भी नहीं — इसलिए ध्वनि तरंग का अस्तित्व ही संभव नहीं। ध्वनि एक यांत्रिक तरंग है: उसे भौतिक माध्यम चाहिए।
संकेत: ध्यान दीजिए कि ध्वनि लुप्त होते समय भी घंटी दिखाई देती रहती है — प्रकाश आपके पास पहुँचता रहता है। प्रकाश यांत्रिक तरंग नहीं है, अतः वह निर्वात को सरलता से पार कर लेता है। अंतर याद रखने का यही सबसे स्पष्ट ढंग है।