कक्षा ९ विज्ञान अध्याय 10 क्रियाकलाप 10.4 के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-08

प्र1.
अब दोनों चम्मचों को बाल्टी के पार्श्वों अथवा तल को स्पर्श किए बिना जल में डुबोइए और उन्हें जल के भीतर पुन: एक-दूसरे से टकराइए (चित्र 10.6 ख)। क्या अब भी आपको उत्पन्न ध्वनि सुनाई देती है?
उत्तर

हाँ, टकराहट स्पष्ट सुनाई देती है — वायु में सुनी ध्वनि से कुछ मंद और गुणता में भिन्न, पर निश्चित रूप से सुनाई देती है।

टक्कर से चम्मच कंपन करने लगते हैं। कंपन करती धातु अपने चारों ओर के जल को संपीडित और विरल करती है, अतः संपीडन-विरलन जल से होकर आगे बढ़ते हैं, जल की सतह पार कर वायु में आते हैं और आपके कान तक पहुँचते हैं।

चम्मच बाल्टी को छूने क्यों नहीं चाहिए: यदि वे पार्श्व या तल को छू लें तो कंपन ठोस बाल्टी और मेज़ के रास्ते भी कान तक पहुँच सकते हैं। उन्हें अलग रखने पर एकमात्र शेष पथ जल → वायु रह जाता है, अतः प्रयोग वास्तव में यही जाँचता है कि द्रव ध्वनि का संचरण करते हैं या नहीं।
संकेत: ध्वनि की गुणता इसलिए बदलती है क्योंकि जल और वायु स्वर की विभिन्न आवृत्तियों को असमान रूप से वहन करते हैं, और कुछ ध्वनि जल की सतह से वापस परावर्तित हो जाती है।
प्र2.
यदि ध्वनि द्रवों में संचरण नहीं करती तो क्या आप यह ध्वनि सुन पाते?
उत्तर

नहीं। चम्मचों को बाल्टी से अलग रखने पर उन्हें छूने वाला एकमात्र माध्यम जल ही है।

ध्वनि का पथ: कंपन करते चम्मच → जल → जल की सतह → वायु → कान

यदि ध्वनि द्रवों में संचरित न होती तो इस शृंखला की पहली ही कड़ी टूट जाती। कंपन धातु की सतह पर ही समाप्त हो जाता, कोई संपीडन चम्मचों से बाहर ही न निकलता, और आपको कुछ भी सुनाई न देता।

यह तर्क सही क्यों है: वैज्ञानिक किसी दावे की जाँच इसी प्रकार करते हैं — हर वैकल्पिक पथ हटा दीजिए और देखिए कि प्रभाव बचता है या नहीं। चूँकि टकराहट सुनाई देती है, शेष एकमात्र व्याख्या यही है कि जल ने उसे वहन किया। अतः ध्वनि ठोसों और गैसों की भाँति द्रवों से होकर भी संचरित होती है।
क्या आप जानते हैं? जल में ध्वनि की चाल वायु की तुलना में लगभग 4 – 5 गुना अधिक होती है और वह क्षीण होने से पहले कहीं अधिक दूरी तय करती है। इसीलिए पनडुब्बियाँ खोजने और महासागर की तली का मानचित्र बनाने के लिए प्रकाश या रेडियो नहीं, सोनार प्रयुक्त होता है।
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