प्र1.
अब दोनों चम्मचों को बाल्टी के पार्श्वों अथवा तल को स्पर्श किए बिना जल में डुबोइए और उन्हें जल के भीतर पुन: एक-दूसरे से टकराइए (चित्र 10.6 ख)। क्या अब भी आपको उत्पन्न ध्वनि सुनाई देती है?
उत्तर
हाँ, टकराहट स्पष्ट सुनाई देती है — वायु में सुनी ध्वनि से कुछ मंद और गुणता में भिन्न, पर निश्चित रूप से सुनाई देती है।
टक्कर से चम्मच कंपन करने लगते हैं। कंपन करती धातु अपने चारों ओर के जल को संपीडित और विरल करती है, अतः संपीडन-विरलन जल से होकर आगे बढ़ते हैं, जल की सतह पार कर वायु में आते हैं और आपके कान तक पहुँचते हैं।
चम्मच बाल्टी को छूने क्यों नहीं चाहिए: यदि वे पार्श्व या तल को छू लें तो कंपन ठोस बाल्टी और मेज़ के रास्ते भी कान तक पहुँच सकते हैं। उन्हें अलग रखने पर एकमात्र शेष पथ जल → वायु रह जाता है, अतः प्रयोग वास्तव में यही जाँचता है कि द्रव ध्वनि का संचरण करते हैं या नहीं।
संकेत: ध्वनि की गुणता इसलिए बदलती है क्योंकि जल और वायु स्वर की विभिन्न आवृत्तियों को असमान रूप से वहन करते हैं, और कुछ ध्वनि जल की सतह से वापस परावर्तित हो जाती है।