कक्षा ९ विज्ञान अध्याय 10 सोचिए और बताइए के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-08

प्र1.
किसी प्रयोग में यह आवश्यक है कि प्रतिध्वनि ध्वनि उत्सर्जन के कम-से-कम 0.2 सेकंड पश्चात सुनाई दे। परावर्तक सतह को न्यूनतम कितनी दूरी पर रखा जाना चाहिए? इसके लिए ध्वनि की चाल को आप 343 m s−1 मान लीजिए।
उत्तर

परावर्तक सतह कम-से-कम 34.3 m दूर होनी चाहिए।

ध्वनि को आना-जाना दोनों करना है: स्रोत से दीवार तक और वापस श्रोता तक। अतः कुल पथ पूछी गई दूरी का दुगुना है।

तय की गई कुल दूरी = चाल × समय
= 343 m s⁻¹ × 0.2 s
= 68.6 m

यह आने-जाने की कुल दूरी है, अतः
परावर्तक सतह की दूरी = 68.6 m ÷ 2
= 34.3 m

एक ही सूत्र में: d = v t / 2 = (343 m s⁻¹ × 0.2 s) / 2 = 34.3 m। इससे नज़दीक की कोई भी दीवार प्रतिध्वनि बहुत जल्दी लौटा देगी और प्रयोग के लिए अनुपयुक्त होगी।

2 का गुणक छोड़ा नहीं जा सकता: इसे भूलने पर उत्तर दुगुना 68.6 m आ जाएगा। इस अध्याय की प्रतिध्वनि, सोनार और पराश्रव्य संवेदक की हर गणना की संरचना एक ही है — मापा गया समय सदैव आने-जाने का समय होता है, अतः या तो समय आधा कीजिए या दूरी, दोनों नहीं और कोई नहीं भी नहीं।
संकेत: पुस्तक के अपने उदाहरण से तुलना कीजिए। प्रतिध्वनि सुनाई देने के लिए न्यूनतम दूरी कान की 0.1 s की सीमा से तय होती है: d = (340 m s⁻¹ × 0.1 s) / 2 = 17 m। यह प्रयोग दुगुना विलंब माँगता है, अतः उसे लगभग दुगुनी दूरी चाहिए।
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